मेधा पाटकर पर लगे किडनैपिंग के आरोप, जमानत के लिए जाएंगी MP हाईकोर्ट
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को जेल में और दिन बिताने पड़ सकते हैं। जमानत याचिका खारिज होने की वजह से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, बताया जा रहा है कि वो अपनी जमानत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं।
बताया जा रहा है कि मेधा पाटकर को किडनैपिंग के केस में गिरफ्तार किया गया है। धार जिले के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज प्रवीण व्यास ने तीन मामलों में पाटकर की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें दो मामलों में उन्हें जमानत देने की अनुमति दे दी, लेकिन नर्मदा बचाओं आंदोलन (एनबीए) के कार्यकर्ताओं ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों के कथित अपहरण से संबंधित मामले में उन्हें जमानत से इनकार कर दिया।
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सेशन कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद पाटकर के वकील ने बताया कि वे अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपनी याचिका लेकर जाएंगे। आरोप है कि एनबीए कार्यकर्ताओं ने जबरन रिवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों को वेन्यू से उठा लिया, साथ ही उनकी सरकारी फाइलों को भी उनसे छीन लिया। इसके बाद पाटकर को 4 आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 353 और 356 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
17 दिनों के बाद धार के जेल में अनशन तोड़ा
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने आज 17 दिनों के बाद शनिवार को धार के जेल में अनशन तोड़ा। बता दें कि धार जाते समय पीथमपुर से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इंदौर के एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मेधा फिर से चिखल्दा गांव में धरना दे रहे सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों से मिलने धार जिले की ओर जा रही थी।
इंदौर रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक अजय शर्मा ने बताया कि हमने मेधा को गिरफ्तार कर लिया है। क्योंकि वह सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों से मिलने फिर जा रही थीं। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें कह दिया था कि इलाके में धारा 144 लागू होने के कारण वह वहां नहीं जा सकती, लेकिन फिर भी वह वहां जा रही थी। इसलिए हमने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मेधा को धार जिला जाते समय रास्ते में गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार होने से कुछ घंटे पहले अस्पताल से व्हील चेयर पर बाहर आयीं मेधा ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा कि अलग-अलग अस्पतालों में ड्रिप के जरिये हम अनशनकारियों के शरीर में दवाइयां पहुंचायी गयीं। लेकिन मैंने और 11 अन्य अनशनकारियों ने अब तक अन्न ग्रहण नहीं किया है। हमारी मांग है कि विस्थापितों के उचित पुनर्वास के इंतजाम पूरे होने तक उन्हें अपनी मूल बसाहटों में ही रहने दिया जाये और फिलहाल बाँध के जलस्तर को नहीं बढ़ाया जाये।