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दुनिया को तबाह कर रहे मीट खाने वाले, रिपोर्ट का दावा
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Sat, 07 Oct 2017 02:18 PM IST
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सोयाबीन की खेती करते ट्रेक्टर।
- फोटो : AP
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वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (WWF) द्वारा एक चौंकाने वाली रिपोर्ट दी गई है जिसमें दावा किया गया है कि मीट खाने वालों की वजह से हिमालय और कांगो तबाह हो रहे हैं। WWF का कहना है कि मीट खाने वाले लगातार बढ़ रहे हैं और इस वजह से ज्यादा जानवर चाहिए, ज्यादा जानवर होंगे तो उनके लिए ज्यादा चारा भी पैदा करना होगा, ज्यादा चारे के लिए ज्यादा जगह की भी जरूरत होगी।
इस वजह से अमेजन, कांगो और हिमालय के इलाके इस वजह से ही तबाह हो रहे हैं। बता दें कि कांगो अपने जंगलों और हिमालय अपने पहाड़ों के लिए मशहूर है।
पढ़ें: जंगल गर्ल की कहानी पर डबल्यूडबल्यूएफ ने की जांच, सामने आई ये रिपोर्ट
WWF ने यह रिपोर्ट 'Appetite for Destruction', 'विनाश के लिए भूख' नाम से जारी की है। इसको लिवस्टॉक कॉन्फ्रेंस में जारी किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि जानवरों के प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग की वजह से उनके चारे के लिए ज्यादा जमीन का इस्तेमाल हो रहा है।
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WWF के मुताबिक, जैव विविधता को होने वाली हानि का 60 प्रतिशत जानवरों के प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग की वजह से है। WWF ने बताया कि मांस में पहले जैसे पोषक तत्व भी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 में एक चिकन को खाने से जितना ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता था अब उतना छह चिकन खाकर भी नहीं मिल पाता।
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इस वजह से अमेजन, कांगो और हिमालय के इलाके इस वजह से ही तबाह हो रहे हैं। बता दें कि कांगो अपने जंगलों और हिमालय अपने पहाड़ों के लिए मशहूर है।
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WWF ने यह रिपोर्ट 'Appetite for Destruction', 'विनाश के लिए भूख' नाम से जारी की है। इसको लिवस्टॉक कॉन्फ्रेंस में जारी किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि जानवरों के प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग की वजह से उनके चारे के लिए ज्यादा जमीन का इस्तेमाल हो रहा है।
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WWF के मुताबिक, जैव विविधता को होने वाली हानि का 60 प्रतिशत जानवरों के प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग की वजह से है। WWF ने बताया कि मांस में पहले जैसे पोषक तत्व भी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 में एक चिकन को खाने से जितना ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता था अब उतना छह चिकन खाकर भी नहीं मिल पाता।