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एनआरसी और नागरिकता बिल पर अमेरिकी धार्मिक आयोग को भारत की दो टूक
Tue, 10 Dec 2019 02:54 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Tue, 10 Dec 2019 02:54 PM IST
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रवीश कुमार, MEA
- फोटो : ANI (file photo)
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नागरिकता संशोधन विधेयक पर अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग को भारत ने सख्त जवाब दिया है। यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ओर से उठाए गए सवालों के बीच विदेश मंत्रालय ने आयोग के बयान को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बिल पर यूएससीआईआरएफ का बयान सही नहीं है और इसकी जरूरत भी नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता नहीं छीनता है। अमेरिका सहित हर देश को अपने यहां की नीतियों के तहत नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने का हक है।
यूएससीआईआरएफ ने क्या कहा?
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक पर चिंता जाहिर की थी। सोमवार को यह विधेयक लोकसभा से पास हो गया। अमेरिका का कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल के लिए कोई भी धार्मिक परीक्षण किसी राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। यूएससीआईआरएफ ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 'गलत दिशा में बढ़ाया गया एक खतरनाक कदम' है और यदि यह भारत की संसद में पारित होता है तो भारतीय नेतृत्व के खिलाफ प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
यूएससीआईआरएफ ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विधेयक के लोकसभा में पारित होने से वह बेहद चिंतित है। लोकसभा ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी दे दी, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता नहीं छीनता है। अमेरिका सहित हर देश को अपने यहां की नीतियों के तहत नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने का हक है।
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MEA: Neither #CitizenshipAmendmentBill nor National Register of Citizens process seeks to strip citizenship from any Indian citizen of any faith. Every nation, including the US, has right to enumerate&validate its citizenry&to exercise this prerogative through various policies https://t.co/5BmvTRmF7P
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 10, 2019
यूएससीआईआरएफ ने क्या कहा?
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक पर चिंता जाहिर की थी। सोमवार को यह विधेयक लोकसभा से पास हो गया। अमेरिका का कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल के लिए कोई भी धार्मिक परीक्षण किसी राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। यूएससीआईआरएफ ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 'गलत दिशा में बढ़ाया गया एक खतरनाक कदम' है और यदि यह भारत की संसद में पारित होता है तो भारतीय नेतृत्व के खिलाफ प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
यूएससीआईआरएफ ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विधेयक के लोकसभा में पारित होने से वह बेहद चिंतित है। लोकसभा ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी दे दी, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।