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MEA: दलाई लामा पर रिजिजू के बयान से सरकार की दूरी, कहा- भारत आस्था से संबंधित मामलों पर कोई रुख नहीं अपनाता
Fri, 04 Jul 2025 07:34 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 04 Jul 2025 07:34 PM IST
सार
MEA On Dalai Lama And His Successor: भारत सरकार ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर दिए गए हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि सरकार धर्म और आस्था से जुड़े मामलों पर कोई रुख नहीं अपनाती है।
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दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
भारत सरकार ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर दिए गए हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि सरकार धर्म और आस्था से जुड़े मामलों पर कोई रुख नहीं अपनाती है। वहीं सरकार ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से दिए गए बयानों से भी खुद को अलग कर लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, हमने परम पूज्य दलाई लामा द्वारा दिए गए बयान की खबरें देखी हैं। भारत सरकार आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करती और न ही कोई स्थिति अपनाती है। सरकार ने हमेशा भारत में धर्म की स्वतंत्रता को बरकरार रखा है और ऐसा करना जारी रखेगी।
दलाई लामा का क्या कहना है?
बुधवार को जारी बयान में दलाई लामा ने दो टूक कहा, 'मैं यह दोहराना चाहता हूं कि केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट को मेरे भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार है। किसी अन्य को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।'
चीन का कड़ा विरोध
दलाई लामा के बयान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, 'दलाई लामा, पंचेन लामा और अन्य बड़े बौद्ध गुरुओं का पुनर्जन्म स्वर्ण कलश की प्रणाली से होना चाहिए और इसके लिए केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन धार्मिक स्वतंत्रता की नीति अपनाता है, लेकिन धार्मिक मामलों और तिब्बती 'लिविंग बुद्धा' के पुनर्जन्म को लेकर नियम और प्रबंधन की विधियां भी लागू हैं।
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जल्द ही अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करेंगे दलाई लामा
यह बयान ऐसे समय आया है जब दलाई लामा ने अपने 90वें जन्मदिवस से पहले यह घोषणा की कि उनके भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट को है। दलाई लामा ने बुधवार को एक बयान में कहा था, मैं पुनः स्पष्ट करता हूं कि गदेन फोडरंग ट्रस्ट को ही मेरे भविष्य के पुनर्जन्म की मान्यता देने का विशेषाधिकार है। किसी और को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
यह भी पढ़ें - Dalai Lama: दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनाव पर भारत ने चीन को फटकारा, कहा- फैसला सिर्फ तिब्बती धर्मगुरु लेंगे
किरेन रिजिजू ने क्या दिया था बयान?
वहीं आज केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को दोहराया कि दलाई लामा के सभी भक्त और अनुयायी चाहते हैं कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता खुद अपने उत्तराधिकारी पर फैसला करें। हालांकि, किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि वह भारत सरकार की ओर से यह टिप्पणी नहीं कर रहे हैं और न ही वह चीन द्वारा दिए गए उस बयान पर टिप्पणी कर रहे हैं, जिसमें दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना को खारिज किया गया है।
इस मुद्दे पर भ्रम की जरूरत नहीं- किरेन रिजिजू
किरेन रिजिजू ने संवाददाताओं से कहा, 'दलाई लामा मुद्दे पर किसी तरह के भ्रम की कोई जरूरत नहीं है। दुनिया भर में बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले और दलाई लामा को मानने वाले सभी लोग चाहते हैं कि दलाई लामा ही (अपने उत्तराधिकार पर) फैसला करें। मुझे या सरकार को कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। अगला दलाई लामा कौन होगा, यह वही तय करेंगे।' इस मुद्दे पर चीन के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'मैं चीन के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता। मैं एक भक्त के रूप में बोल रहा हूं, मुझे दलाई लामा पर भरोसा है, दलाई लामा का अनुसरण करने वाले लोग चाहते हैं कि वे अपने उत्तराधिकारी का फैसला करें।'
यह भी पढ़ें - धर्मशाला: हॉलीवुड स्टार रिचर्ड गेर बोले- तिब्बत ही नहीं, पूरी दुनिया के हैं दलाई लामा
दलाई लामा के जन्मदिन समारोह में शामिल होंगे रिजिजू
दलाई लामा का 90वां जन्मदिन (छह जुलाई) जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, गहरे लाल और भगवा वस्त्र पहने भिक्षु हिमालयी शहर मैक्लॉडगंज में मुख्य दलाई लामा मंदिर, त्सुगलागखांग की ओर बढ़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश का यह छोटा सा शहर निर्वासित तिब्बत सरकार का मेजबान होने के कारण ‘लिटल ल्हासा’ भी कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेर समेत गणमान्य व्यक्ति इस विशेष समारोह में भाग लेंगे।
दलाई लामा के बारें में जानिए
दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं। वह 1959 में चीन के कब्जे के बाद तिब्बत छोड़कर भारत आ गए थे और तब से धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में रह रहे हैं। उनका पुनर्जन्म कौन और कहां होगा, यह लंबे समय से विवाद का विषय रहा है – खासकर चीन और निर्वासित तिब्बती समुदाय के बीच।
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दलाई लामा का क्या कहना है?
बुधवार को जारी बयान में दलाई लामा ने दो टूक कहा, 'मैं यह दोहराना चाहता हूं कि केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट को मेरे भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार है। किसी अन्य को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।'
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चीन का कड़ा विरोध
दलाई लामा के बयान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, 'दलाई लामा, पंचेन लामा और अन्य बड़े बौद्ध गुरुओं का पुनर्जन्म स्वर्ण कलश की प्रणाली से होना चाहिए और इसके लिए केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन धार्मिक स्वतंत्रता की नीति अपनाता है, लेकिन धार्मिक मामलों और तिब्बती 'लिविंग बुद्धा' के पुनर्जन्म को लेकर नियम और प्रबंधन की विधियां भी लागू हैं।
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जल्द ही अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करेंगे दलाई लामा
यह बयान ऐसे समय आया है जब दलाई लामा ने अपने 90वें जन्मदिवस से पहले यह घोषणा की कि उनके भविष्य के पुनर्जन्म को मान्यता देने का अधिकार केवल गदेन फोडरंग ट्रस्ट को है। दलाई लामा ने बुधवार को एक बयान में कहा था, मैं पुनः स्पष्ट करता हूं कि गदेन फोडरंग ट्रस्ट को ही मेरे भविष्य के पुनर्जन्म की मान्यता देने का विशेषाधिकार है। किसी और को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
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किरेन रिजिजू ने क्या दिया था बयान?
वहीं आज केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को दोहराया कि दलाई लामा के सभी भक्त और अनुयायी चाहते हैं कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता खुद अपने उत्तराधिकारी पर फैसला करें। हालांकि, किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि वह भारत सरकार की ओर से यह टिप्पणी नहीं कर रहे हैं और न ही वह चीन द्वारा दिए गए उस बयान पर टिप्पणी कर रहे हैं, जिसमें दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना को खारिज किया गया है।
इस मुद्दे पर भ्रम की जरूरत नहीं- किरेन रिजिजू
किरेन रिजिजू ने संवाददाताओं से कहा, 'दलाई लामा मुद्दे पर किसी तरह के भ्रम की कोई जरूरत नहीं है। दुनिया भर में बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले और दलाई लामा को मानने वाले सभी लोग चाहते हैं कि दलाई लामा ही (अपने उत्तराधिकार पर) फैसला करें। मुझे या सरकार को कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। अगला दलाई लामा कौन होगा, यह वही तय करेंगे।' इस मुद्दे पर चीन के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'मैं चीन के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता। मैं एक भक्त के रूप में बोल रहा हूं, मुझे दलाई लामा पर भरोसा है, दलाई लामा का अनुसरण करने वाले लोग चाहते हैं कि वे अपने उत्तराधिकारी का फैसला करें।'
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दलाई लामा के जन्मदिन समारोह में शामिल होंगे रिजिजू
दलाई लामा का 90वां जन्मदिन (छह जुलाई) जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, गहरे लाल और भगवा वस्त्र पहने भिक्षु हिमालयी शहर मैक्लॉडगंज में मुख्य दलाई लामा मंदिर, त्सुगलागखांग की ओर बढ़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश का यह छोटा सा शहर निर्वासित तिब्बत सरकार का मेजबान होने के कारण ‘लिटल ल्हासा’ भी कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेर समेत गणमान्य व्यक्ति इस विशेष समारोह में भाग लेंगे।
दलाई लामा के बारें में जानिए
दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं। वह 1959 में चीन के कब्जे के बाद तिब्बत छोड़कर भारत आ गए थे और तब से धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में रह रहे हैं। उनका पुनर्जन्म कौन और कहां होगा, यह लंबे समय से विवाद का विषय रहा है – खासकर चीन और निर्वासित तिब्बती समुदाय के बीच।