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'वेंस की टिप्पणी अनुचित': समुद्री सुरक्षा से एच-1बी वीजा तक, विदेश मंत्रालय ने किन मुद्दों पर रखी भारत की बात?

Fri, 09 Oct 2026 05:50 PM IST
देवेश त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 09 Oct 2026 05:50 PM IST
सार

विदेश मंत्रालय ने एच-1बी वीजा और पीईआरएम कार्यक्रम को अलग बताते हुए कहा कि कुछ कंपनियों के आवेदनों पर अमेरिकी रोक से मौजूदा वीजा अपने आप प्रभावित नहीं होते, हालांकि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर संभव है। भारत ने जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों संबंधी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।

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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित और कुशल हैं। वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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जायसवाल ने कहा, ''अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) के आवेदनों पर रोक लगाने का फैसला एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है। इस फैसले से मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर अपने आप कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।''
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जेडी वेंस के बयान पर भारत की दो टूक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमें अमेरिकी श्रम विभाग के कुछ कंपनियों के लिए पीईआरएम से संबंधित फैसले की जानकारी है। यह ध्यान रखना चाहिए कि पीईआरएम, एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है। पीईआरएम आवेदनों पर रोक से अपने आप एच-1बी वीजा की वैधता या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति प्रभावित नहीं होती। हालांकि, संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।"
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जायसवाल ने आगे कहा, "यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रतिभाओं का आवागमन भारतीय और अमेरिकी, दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाता है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणियों के संबंध में हमारा मानना है कि इस तरह का वर्णन अनुचित है। यह इस तथ्य को नजरअंदाज करता है कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित और कुशल हैं तथा वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था में योगदान देते हैं। अमेरिका का इतिहास भी प्रवासियों की कई पीढ़ियों से आकार लेता रहा है। उनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने देश की वृद्धि और समृद्धि में योगदान दिया है।"

समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए 25 देशों ने की चर्चा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और लाइबेरिया समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए गठित 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' का संयुक्त रूप से समन्वय कर रहे हैं। इस समूह की पहली बैठक न्यूयॉर्क में हुई थी, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री और लाइबेरिया के विदेश मंत्री ने की थी।

जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल में हुए कई हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की है। इस मुद्दे पर हुई हालिया बैठक में करीब 25 देशों ने हिस्सा लिया। इन देशों का संबंध वाणिज्यिक जहाजरानी उद्योग या समुद्री समुदाय से है।

उन्होंने कहा कि सभी देशों का साझा हित यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों पर हमले बंद हों और समुद्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा बनी रहे। जायसवाल ने कहा, "इस पहल का उद्देश्य संवाद के लिए एक मंच का इस्तेमाल करना और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को वैश्विक विमर्श तथा चर्चा के एजेंडे में प्रमुख स्थान दिलाना है।" उन्होंने आगे कहा कि भारत विभिन्न देशों और संबंधित पक्षों को एक साथ लाकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना चाहता है, ताकि वाणिज्यिक जहाजरानी बाधित न हो, जहाजों को निशाना न बनाया जाए और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

शिमला समझौते के बाद यूएनएमओजीआईपी की प्रासंगिकता खत्म : भारत
भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में भारत का रुख लगातार एक जैसा रहा है। जायसवाल ने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के बाद यूएनएमओजीआईपी की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है।"

गंगा जल समझौते पर संयुक्त नदी आयोग के ढांचे में चर्चा
1996 की गंगा जल बंटवारा संधि के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि नदी और जल से जुड़े सभी मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग के ढांचे के तहत चर्चा की जाती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक नई दिल्ली में गुरुवार और शुक्रवार को हुई।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की निश्चित जानकारी नहीं है कि बैठक समाप्त हो चुकी है या नहीं। हालांकि, उनके अनुसार, बातचीत हाल ही में समाप्त हुई हो सकती है या उस समय जारी हो सकती है। जायसवाल ने बताया कि बैठक का नेतृत्व संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने किया। इसमें व्यापार से जुड़े मुद्दों और दोनों देशों के द्विपक्षीय एजेंडे में शामिल विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर बातचीत जारी
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की अगली बैठक के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि भारत इस पहल को काफी महत्व देता है और इससे जुड़े सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम आईएमईसी पहल को बहुत महत्व देते हैं और इससे जुड़े सभी पक्षों के साथ चर्चा कर रहे हैं।''

उन्होंने कहा, ''फिलहाल, मेरे पास यह जानकारी नहीं है कि आईएमईसी पर अगली बैठक कब होगी। हालांकि, इस पहल में भाग लेने वाले देशों के विवरण सहित कोई भी नई जानकारी उपलब्ध होने पर हम उसे साझा करेंगे।"

सऊदी अरब में हमलों की भारत ने की निंदा
सऊदी अरब में हालिया हमलों के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इन घटनाओं के कारण कुछ व्यवधान पैदा हुए हैं। भारत ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। जायसवाल ने कहा कि इसके अलावा संपर्क व्यवस्था से जुड़ी कोई अन्य समस्या उनकी जानकारी में नहीं है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई यातायात विभिन्न हवाई अड्डों के जरिए जारी है।

अमेरिका ने किन कंपनियों पर पीईआरएम कार्यक्रम के तहत कार्रवाई?
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को घोषणा की थी कि कई प्रमुख प्रौद्योगिकी और आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने इसके पीछे कई सक्रिय संघीय जांच का हवाला दिया। जिन कंपनियों के नाम सामने आए, उनमें कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के अलावा अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी भी शामिल हैं।

सोंडरलिंग ने कहा कि अमेरिकी श्रम विभाग इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और न ही पहले से लंबित आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, "हम इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही लंबित आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।"


अमेरिकी श्रम मंत्री ने यह भी दावा किया कि इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से लाखों विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया और उन्हें बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा की मंजूरी तथा स्थायी श्रम प्रमाणन मिले। सोंडरलिंग ने कहा, "2009 से अब तक सिर्फ इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं।"
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