MEA: 'हमारा ध्यान कनाडा की राजनयिक उपस्थिति में समानता सुनिश्चित करने पर', तनाव के बीच भारत की दो टूक
अरिंदम बागची ने कहा कि भारत का प्राथमिक ध्यान दो चीजों पर है, पहला कनाडा में ऐसा माहौल होना, जहां भारतीय राजनयिक ठीक से काम कर सकें और दूसरा कूटनीतिक ताकत के मामले में समानता हासिल कर सकें। गौरतलब है कि बीते महीने भी भारत ने कनाडा के आंतरिक मामलों में राजनयिक हस्तक्षेप का हवाला दिया था।
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विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कनाडा से अपने राजनयिकों की संख्या सीमित करने के आह्वान को दोहराया। कनाडा से राजनयिकों की संख्या सीमित करने को कहने के मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने भारत में कनाडा की राजनयिक उपस्थिति में समानता की मांग की है। इस संबंध में चर्चा जारी है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का प्राथमिक ध्यान दो चीजों पर है, पहला कनाडा में ऐसा माहौल होना, जहां भारतीय राजनयिक ठीक से काम कर सकें और दूसरा कूटनीतिक ताकत के मामले में समानता हासिल कर सकें। गौरतलब है कि बीते महीने भी भारत ने कनाडा के आंतरिक मामलों में राजनयिक हस्तक्षेप का हवाला दिया था। साथ ही कहा था कि राजनयिक कर्मचारियों की संख्या में समानता होनी चाहिए।
अफगान दूतावास को बंद करना उनका अपना निर्णय
इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली में अफगानिस्तान के दूतावास द्वारा एक अक्तूबर से परिचालन बंद करने पर भी प्रतिक्रिया दी। इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमारी समझ यह है कि नई दिल्ली में दूतावास काम कर रहा है या काम करना जारी रखेगा। हम वहां मौजूद अफगान राजनयिकों और मुंबई और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावासों में मौजूद अफगान राजदूत के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, हमें पिछले सप्ताह कथित तौर पर दूतावास से संचार प्राप्त हुआ था, जिसमें संकेत दिया गया था कि वह सितंबर के अंत में परिचालन को निलंबित करने का इरादा रखते है। बेशक, ऐसा निर्णय यह एक विदेशी मिशन का आंतरिक मामला है। हालांकि, हमने नोट किया है कि मुंबई और हैदराबाद में अफगान वाणिज्य दूतावासों ने उस निर्णय या ऐसे निर्णय पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है। हम यह भी जानते हैं कि राजदूत की लंबे समय से अनुपस्थिति रही है और हाल के दिनों में बड़ी संख्या में अफगान राजनयिकों ने भारत छोड़ दिया है। हम उम्मीद करेंगे कि छात्रों सहित भारत में बड़ी संख्या में अफगान नागरिक आवश्यक कांसुलर समर्थन प्राप्त करना जारी रख सकेंगे। हम अपनी ओर से अफगानिस्तान के लोगों की सहायता के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।
अमेरिकी राजदूत के पीओजेके दौरे पर अमेरिका को बताई अपनी चिंता
भारत ने पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम के पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के हालिया दौरे पर अपनी चिंता अमेरिका के सामने रखी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस बारे में हमारी स्थिति बिलकुल स्पष्ट है। हमने ब्लोम के हालिया दौरे पर अपनी चिंता अमेरिका के साथ साझा की है। बागची से ब्लोम के दौरे और इस बारे में भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की टिप्पणी के बारे में सवाल पूछा गया था। वहीं, ब्रिटेन के सांसद एंड्रयू ग्वायने के पीओजेके दौरे के बारे में पूछे जाने पर अपने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागची ने कहा, हम अपना पुराना रुख दोहराना चाहते हैं। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करते हैं कि भारत की संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता का सम्मान करे।
ब्लोम हाल में छह दिन के दौरे पर गिलगित-बाल्टिस्तान गए थे और वहां उन्होंने स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। ब्लोम के दौरे के बारे में गार्सेटी ने 26 सितंबर को कहा था, यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान को खुद सुलझाना है और अमेरिका समेत किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत के दौरे के बारे में उनका कोई टिप्पणी करना नहीं बनता लेकिन वह (ब्लोम) वहां पहले जा चुके हैं और जी-20 के दौरान हम भी जम्मू-कश्मीर जा चुके हैं। गार्सेटी की टिप्पणी के बारे में बागची ने कहा, दोनों स्थितियां बराबर नहीं हैं।
नियमित रूप से अपनी चिंता जताते हैं
ब्रिटेन के सांसद की टिप्पणी के बारे में बागची ने कहा, आप जिस वीडियो की चर्चा कर रहे हैं उसके बारे में मेरे पास विशेष कुछ कहने के लिए नहीं है। मुझे नहीं पता हमारे दूतावास ने यह मामला उठाया है नहीं लेकिन जब भी ऐसा कुछ होता है तो हम ऐसे मामलों में नियमित रूप से अपनी चिंता जाहिर करते हैं।
राजनयिकों की सुरक्षा का मामला ब्रिटेन के सामने उठाया
बागची ने कहा, ब्रिटेन में भारत के राजनयिकों और हमारे संस्थानों की सुरक्षा का मामला हमने वहां की सरकार के सामने उठाया है। बागची ने कहा, भारत में वांछित तत्वों की ओर से विदेशों में भारतीय राजनयिकों और मिशनों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार काम कर रही है। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। पिछले सप्ताह ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी को ग्लासगो के गुरुद्वारा कमेटी ने विचार-विमर्श के लिए बुलाया था लेकिन तीन खालिस्तान समर्थकों ने उनका विरोध किया। खास बात थी कि तीनों स्कॉटलैंड के बाहर से विरोध करने आए थे। बागची ने कहा, ब्रिटेन में 2 अक्तूबर को एक घटना हुई और हमने निश्चित रूप से अपने राजनयिकों और संस्थानों की सुरक्षा का मामला ब्रिटेन के अधिकारियों के सामने उठाया। हमारे राजनयिक सामान्य रूप से काम कर सकें और हमारे परिसर सुरक्षित हों और हमारे समुदाय पर हमले न हों यह इससे जुड़ा मुद्दा है।
मालदीव में नई सरकार के साथ करने के लिए उत्सुक
बागची ने कहा, भारत सरकार अपने पड़ोसी मालदीव में नई सरकार के साथ काम करने के लिए उत्सुक है। वहां के राष्ट्रपति निर्वाचित मोहम्मद मूईज्जू को निर्वाचन के बाद सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने शुभकामना संदेश भेजा। मुईज्जू को चीन समर्थक माना जाता है और निर्वाचित घोषित होने के बाद उन्होंने सबसे पहले मालदीव से भारतीय सुरक्षा बलों को वापस भेजने की घोषणा की। बागची ने कहा, पीएम मोदी ने समय पर खरे उतरे भारत-मालदीव द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत का संदेश दिया है।