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बौद्ध धर्म अपनाएंगी मायावती, RSS को दी दलित विरोधी मुहिम बंद करने की चेतावनी
सुरेंद्र मिश्र / नागपुर
Updated Mon, 11 Dec 2017 06:59 AM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने महाराष्ट्र के नागपुर में रविवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दलितद्वेष की राजनीति कर रही है। इसलिए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैसा हिंदुत्ववादी संगठन यदि दलित विरोधी मुहिम को विराम नहीं देते तो डॉ. भीमराव अंबेडकर की तर्ज पर वह भी करोड़ों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेंगी।
बसपा सुप्रीमो ने नागपुर में पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा व कांग्रेस पर हमला बोला और धर्म परिवर्तन की बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की विचारधारा दलितों के प्रति एक समान है। मायावती का यह बयान इसलिए मायने रखता है क्योंकि सन् 1956 में नागपुर में ही अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था। मायावती ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था, जबकि वह करोड़ों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण करेंगी।
पढ़ें- काडर अभी भी निभा रहा बहन मायावती का साथ, निकाय चुनाव में बसपा की जोरदार वापसी
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मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद एक भी मामला दलित एक्ट के तहत दर्ज नहीं हुआ। भाजपा सरकार का एजेंडा उद्योगपतियों का हित साधना है। इसलिए कंपनियों का निजीकरण किया जा रहा है। वह जल्द ही निजी कंपनियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करेंगी। साथ ही, उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाने का आह्वान किया।
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बसपा सुप्रीमो ने नागपुर में पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा व कांग्रेस पर हमला बोला और धर्म परिवर्तन की बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की विचारधारा दलितों के प्रति एक समान है। मायावती का यह बयान इसलिए मायने रखता है क्योंकि सन् 1956 में नागपुर में ही अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था। मायावती ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था, जबकि वह करोड़ों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण करेंगी।
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मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद एक भी मामला दलित एक्ट के तहत दर्ज नहीं हुआ। भाजपा सरकार का एजेंडा उद्योगपतियों का हित साधना है। इसलिए कंपनियों का निजीकरण किया जा रहा है। वह जल्द ही निजी कंपनियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करेंगी। साथ ही, उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाने का आह्वान किया।
राम मंदिर से केवल पुजारियों का भला होगा
प्रतीकात्मक तस्वीर
मायावती ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि मंदिर से सिर्फ पुजारियों का भला होगा। वह चाहे अयोध्या का राम मंदिर हो या कोई अन्य मंदिर। इसलिए मंदिर की राजनीति के बजाए विकास की राजनीति होनी चाहिए।
दलित राष्ट्रपति होने का नहीं है लाभ
बसपा प्रमुख ने भाजपा के कथित दलित प्रेम पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री भले ही दलित समाज से हों, लेकिन यदि वे दलित विरोधी पार्टी से हैं तो उससे देश के दलितों का भला नहीं हो सकता। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपानीत सरकार रईसों की पार्टी है इसलिए दलितों के कल्याण के बारे में नहीं सोचती।
दलित राष्ट्रपति होने का नहीं है लाभ
बसपा प्रमुख ने भाजपा के कथित दलित प्रेम पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री भले ही दलित समाज से हों, लेकिन यदि वे दलित विरोधी पार्टी से हैं तो उससे देश के दलितों का भला नहीं हो सकता। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपानीत सरकार रईसों की पार्टी है इसलिए दलितों के कल्याण के बारे में नहीं सोचती।