अभद्र टिप्पणी के मामले में जेल से रिहा हुए दयाशंकर
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बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी के मामले में जेल में बंद दयाशंकर सिंह को आखिरकारद रविवार को जेल से रिहा कर दिया गया। दयाशंकर सिंह ने कहा कि वो पहले अपने परिवार से मिलने लखनऊ जाएंगे उसके बाद ही मीडिया से बात करेंगे।
बता दें कि दयाशंकर सिंह की जमानत अर्जी को कोर्ट नंबर चार अपर जिला जज डा. अजय कुमार ने शनिवार को स्वीकार कर लिया था। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 50-50 हजार रुपये के दो जमानत और 50 हजार के व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
आदेश शाम पांच बजे तक जेल नहीं पहुंचा था, जिसकी वजह से उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी। 20 जुलाई को शहर कोतवाली क्षेत्र के भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए दयाशंकर सिंह ने मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस मामले में बसपा के राष्ट्रीय सचिव मेवालाल गौतम ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 28 जुलाई को लखनऊ पुलिस ने दयाशंकर को बक्सर से गिरफ्तार किया था। तब से वे मऊ जेल में थे।
शनिवार को उनकी जमानत अर्जी पर कोर्ट नंबर चार एडीजे डॉ. अजय कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे ने दयाशंकर सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये के दो जमानत और 50 हजार का व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने और मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के बाद अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में बंधपत्र और शपथपत्र दाखिल किया गया। जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट आने के बाद सीजेएम प्रमोद कुमार सिंह ने दयाशंकर सिंह की रिहाई का आदेश जेल अधीक्षक मऊ को भेजा।
साथ ही शर्त रखी कि दयाशंकर सिंह नियत तिथियों पर कोर्ट में व्यक्तिगत से या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होंगे। दयाशंकर सिंह की तरफ से उसके अधिवक्ता श्रीकृष्ण सिंह, फतेह बहादुर सिंह, सदानंद राय, सूर्यनाथ यादव, प्रदीप सिंह और दरोगा सिंह तथा अभियोजन की तरफ से एसपीओ रामध्यान पांडेय, एसपीओ छेदी लाल गुप्ता के साथ वीरेंद्र बहादुर पाल, गनी अहमद ने अपने तर्क रखे।
देर से पहुंचा आदेश, नहीं हुई रिहाई
दयाशंकर सिंह की जमानत मंजूर होने के बाद प्रक्रिया पूरी करने में देर होने से रिहाई का आदेश जेल पर देर शाम 06.55 बजे पहुंचा। इस दौरान जेल का फाटक बंद हो चुका था। जेलर मृत्युंजय पांडेय ने जेल मैनुअल का हवाला देते हुए बताया कि शाम पांच बजे तक आदेश आ जाता तो रिहाई हो जाती।
अब रिहाई अगले दिन सुबह होगी। जेलर ने बताया कि आदेश में विशेष परिस्थितियों में रिहा करने की बात भी नहीं लिखी थी। यदि यह बात लिखी होती तो वे दयाशंकर सिंह को उसी वक्त रिहा कर देते।
उधर, दयाशंकर के समर्थक रात आठ बजे तक जेल पर डटे थे और प्रशासन के विरुद्घ नारेबाजी की। इस दौरान एएसपी सुनील सिंह, एसडीएम सदर जगदंबा सिंह और कई थानों की पुलिस मौजूद थी।