फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   martyrdom of Shere Thapa hero of Indo-China war in 1962 did not get respect even after 60 years

शेरे थापा: जिनके सामने 1962 में चीनी सैनिकों ने टेक दिए थे घुटने, देश के गुमनाम हीरो की शहादत को सम्मान की आस

Sun, 13 Nov 2022 07:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 13 Nov 2022 07:32 PM IST
सार

शेरे थापा भारतीय सेना की जम्मू- कश्मीर राइफल्स की दूसरी बटालियन में थे। उन्होंने नवंबर, 1962 में अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी सेक्टर में हुई लड़ाई में अभूतपूर्व बहादुरी दिखाते हुए अकेले ही 79 चीनी सैनिकों को मार गिराया था और कई अन्य को घायल कर दिया था। 

विज्ञापन
martyrdom of Shere Thapa  hero of Indo-China war in 1962 did not get respect even after 60 years
शहीद शेरे थापा की प्रतिमा का अनावरण करते सीएम खांडू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अंग्रेजों से आजाद होने के बाद भारत को पाकिस्तान और चीन से युद्ध करने पड़े थे। आज भी जब कभी इन लड़ाइयों का जिक्र होता है तो देश के उन वीर जवानों को भी याद किया जाता है जिन्होंने विरोधियों ना केवल धूल चटाई बल्कि देश के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर दी। चीन के साथ हुए युद्ध में भी भारतीय सेना के ऐसे ही नायक थे जिनका नाम था शेरे सिंह थापा। शेर सिंह थापा को आज गुमनामी में हैं। ऐज भले ही ज्यादा लोग उनके बारे में ना जानते हों, लेकिन चीन के साथ हुए युद्ध के वो हीरो थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने नवंबर, 1962 में अरुणाचल के सुबनसिरी सेक्टर में हुई लड़ाई में अकेले 79 चीनी सैनिकों को मार गिराया था। लेकिन उस युद्ध के 60 साल होने के बाद भी उनकी बहादुरी को सम्मान और पहचान का इंतजार है। इतने सालों में देश में कई प्रधानमंत्री बदल गए लेकिन शेरे सिंह थापा को किसी ने वो सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। 

विज्ञापन


सम्मान का इंतजार
अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस साल की शुरुआत में ट्वीट करके उनको याद किया था। खांडू ने गुमनाम नायक थापा की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा था कि “हम भारतीय सेना के हवलदार शेरे थापा के बारे में बहुत कम जानते हैं, जिन्होंने 1962 के युद्ध के दौरान ऊपरी सुबनसिरी सेक्टर में अकेले चीनी सेना के ताबड़तोड़ हमलों का जवाब दिया था।" उन्होंने यह भी लिखा था कि युद्ध के 60 साल बाद भी थापा की शहादत को केंद्र सरकार की तरफ से पहचान नहीं मिली है। 
विज्ञापन


79 सैनिकों को अकेले मार गिराया था
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, शेरे थापा भारतीय सेना की जम्मू- कश्मीर राइफल्स की दूसरी बटालियन में थे। उन्होंने नवंबर, 1962 में अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी सेक्टर में हुई लड़ाई में अभूतपूर्व बहादुरी दिखाते हुए अकेले ही 79 चीनी सैनिकों को मार गिराया था और कई अन्य को घायल कर दिया था।  
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे दिखाई थी बहादुरी
कर्नल के रूप में सेवानिवृत्त हुए थापा के कमांडिंग ऑफिसर-सेकेंड लेफ्टिनेंट अमर पाटिल ने बताया कि साल 1928 में नेपाल में जन्मे थापा ने 27 दिसंबर, 1945 से 31 दिसंबर, 1956 तक जेके रेजीमेंट स्पेशल फोर्स में सेवाएं दी थीं। 1 जनवरी, 1957 को वे भारतीय सेना का हिस्सा बने थे। बाद में सूबेदार शेर बहादुर के मातहत उन्हें पलटन हवलदार नियुक्त किया गया। थापा को चीन-भारत सीमा से आने वाले रास्तों को कवर करने के लिए ऊपरी सुबनसिरी जिले में रियो ब्रिज के पास तमा चुंग चुंग रिज पर सुरक्षात्मक गश्त में तैनात किया गया था। 

चीनियों के शवों का लग गया था अंबार
चीन से युद्ध के दौरान 18 नवंबर, 1962 को पीएलए (चीनी सेना) के लगभग 200 सैनिकों ने तमा चुंग चुंग रिज के रास्ते घुसपैठ करते हुए  2-जेएके आरआईएफ के सुरक्षात्मक गश्ती दल पर हमला कर दिया था। उस समय हवलदार थापा पहाड़ों पर सीमा की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने चीनी सैनिकों के हमले का बहादुरी से जवाब दिया। उनके हमले में देखते ही देखते कई चीनी सैनिक ढेर हो गए। वह बिना कुछ खाए लगातार गोलीबारी करते रहे। तीन दिन चीनियों के पार्थिव शरीर वहीं पड़ा रहे। पाटिल ने कहा कि लड़ाई के दौरान चीनी सैनिकों के शवों का अंबार लग गया था। हालांकि बाद में वे एक चीनी सैनिक की गोली का शिकार हो गए। उन्होंने बताया कि शेरे थापा ने वीरता दिखाते हुए 72 घंटे तक चीनी सैनिकों को आगे बढ़ने से रोके रखा था। 


केंद्र ने अभी तक नहीं किया है शहादत को सलाम
कर्नल के रूप में सेवानिवृत्त हुए थापा के कमांडिंग ऑफिसर-सेकेंड लेफ्टिनेंट अमर पाटिल ने कहा कि इतिहास के पन्नों में खोए इस शहीद को साठ बरस बाद भी पहचान नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरुणाचल-पूर्व संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद तपीर गाओ ने पिछले साल सितंबर में नयी दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने एक पत्र सौंपकर थापा को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार प्रदान करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र सरकार ने उनकी शहादत को सम्मान देने का काम अभी तक नहीं किया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed