शहीद मेजर केतन शर्मा ने ऐसे दिया था आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब, जानिए पूरी कहानी
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जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में शहीद हुए मेजर केतन शर्मा का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके शहर मेरठ पहुंचा। इससे पहले उन्हें दिल्ली में आखिरी विदाई दी गई। कश्मीर में शहीद हुए मेरठ के रहने वाले मेजर केतन शर्मा के घर गमजदा माहौल में उन्हें आखिरी सलामी दी गई। आखिरी सलामी के वक्त शहीद मेजर के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। खासकर उनकी 4 साल की मासूम बेटी को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
मेजर की पत्नी और उनकी बेटी मंगलवार सुबह अपने घर पहुंचीं। इससे पहले शहीद मेजर की पत्नी ईरा दिल्ली स्थित अपने मायके में थीं। उन्हें भी रात में ही अपने पति के शहीद होने का समाचार मिला था। लेकिन उनके परिजनों ने रात में मेरठ नहीं आने दिया। आज सुबह वह अपने अपने परिजनों के साथ मेरठ कंकरखेड़ा स्थित अपनी ससुराल पहुंची। ससुराल पहुंचने पर उनका रो-रोकर बुरा हाल था। मेजर की बेटी जो कि अभी चार साल की है वह गुमसुम सबको देखती रही। उसको यह नहीं मालूम कि उसके घर में हो क्या रहा है।
कैसे हुई शहादत
19 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर केतन शर्मा और उनकी टीम ने दो आतंकी ढेर कर दिए थे। बाकी आतंकी झाड़ियों में छिपे हुए थे, जिन्हें मारने के लिए वे झाड़ियों को जला रहे थे। इसी दौरान आतंकियों की एक गोली सिर में लगी और मेजर शहीद हो गए। सोमवार शाम पांच बजे श्रद्धापुरी सेक्टर चार स्थित मेजर केतन शर्मा के आवास पर पहुंचे मेरठ छावनी के सैन्य अधिकारियों ने उनकी शहादत के बारे में परिवार वालों को बताया।
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक सोमवार सुबह कुछ आतंकियों के एक बिल्डिंग में छिपे होने की सूचना मिली। मेजर केतन शर्मा कुछ जवानों के साथ पहुंच गए और पूरी बिल्डिंग को घेर लिया। दोनों तरफ से भारी गोलाबारी हुई। इसमें दो आतंकी मारे गए और सेना के दो जवान घायल हो गए। एक जवान के पैर और दूसरे के पेट में गोली लगी।
कौन थे मेजर केतन शर्मा
मेजर केतन शर्मा के पिता रविंद्र शर्मा ने बताया कि करीब 35 साल पूर्व कंकरखेड़ा आए थे तो पहले आर्मी कैंट एरिया में कासमपुर में रहते थे। यहीं पर केतन व मेघा दोनों बच्चों ने जन्म लिया। पास में ही सेना के जवानों व अफसरों का आना-जाना रहता था। केतन बचपन में खेलते समय जब भी किसी जवान या अफसर को उधर से आते-जाते देखते थे तो उन्हें सैल्यूट करते थे। उन्होंने उसी समय ठान लिया था कि वह भी एक दिन सेना में अफसर बनेंगे।
कंकरखेड़ा की अशोका एकेडमी में 9वीं तक पढ़ाई करने के बाद केतन का दाखिला मेरठ पब्लिक स्कूल की मेन ब्रांच में कक्षा 10 में कराया गया था। यहां 10वीं व 12वीं में वे फर्स्ट रहे। यहां भी कैंट एरिया में सेना के अफसरों को देखते थे।
केतन ने परिजनों से साफ कह दिया था कि मुझे आर्मी अफसर बनना है। केतन ने सरूरपुर के संजय डिग्री कॉलेज से बीएससी की। उसके बाद दो साल तक गुरुग्राम में एक प्राईवेट कंपनी में जॉब भी की। लेकिन उसमें मन नहीं लगा और जॉब छोड़ दी।
कैसे बने सैन्य अधिकारी
साल 2011 में वे आईएमए देहरादून में भर्ती हुए। पासिंग आउट परेड के बाद साढ़े तीन साल पुणे में ट्रेनिंग हुई। फिर मेरठ की 57 इंजीनियर रेजीमेंट में पोस्टिंग हुई। मेरठ में कुछ दिन ही रहे। वर्तमान में जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में मेजर पद पर तैनात थे।
पिता रविंद्र शर्मा ने बताया कि बेटे केतन ने ठान लिया था कि उसे सेना में अफसर ही बनना है। उसके इरादे व हौसला देखकर उन्होंने उसे कभी रोका नहीं और जितना हो सका सपोर्ट किया। उन्हें खुद को नहीं पता कि वह कब सेना में अफसर बन गया। चयन हुआ तो केतन ने फोन करके उन्हें बताया था कि वह अफसर बन गया। सुनकर परिवार के लोग बहुत खुश हुए थे।