{"_id":"68b4ccaa907127d9210e43e4","slug":"maritime-warfare-capability-will-increase-india-will-buy-nine-submarines-for-rs-1-lakh-crore-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Defence: समुद्री युद्ध क्षमता में होगा इजाफा, एक लाख करोड़ से नौ पनडुब्बियां खरीदेगा भारत, दो सौदों की तैयारी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Defence: समुद्री युद्ध क्षमता में होगा इजाफा, एक लाख करोड़ से नौ पनडुब्बियां खरीदेगा भारत, दो सौदों की तैयारी
Mon, 01 Sep 2025 03:59 AM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 01 Sep 2025 03:59 AM IST
सार
भारत अगले साल के मध्य तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के दो बड़े पनडुब्बी सौदों को अंतिम रूप दे सकता है। इसे लेकर बातचीत जारी है।
विज्ञापन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : X / @rajnathsingh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत के मद्देनजर भारत हिंद महासागर में अपनी समुद्री युद्ध क्षमताओं में लगातार इजाफा कर रहा है। इसी के तहत अगले साल के मध्य तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के दो बड़े पनडुब्बी सौदों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पहली परियोजना तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद की है। इस पर बातचीत चल रही है। इनका निर्माण सरकारी कंपनी मझगांव डॉक लि. (एमडीएल) व फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप की ओर से संयुक्त रूप से किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने करीब 36,000 करोड़ रुपये के इस सौदे को दो वर्ष पहले मंजूरी दे दी थी, पर परियोजना के विभिन्न तकनीकी और वाणिज्यिक पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत में देरी हुई है। रक्षा मंत्रालय की जिस दूसरी परियोजना पर नजर है, वह लगभग 65,000 करोड़ की लागत से छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों की खरीद है। इस खरीद को मंत्रालय ने 2021 में ही मंजूरी दी थी।
जर्मन कंपनी ने की साझेदारी
अग्रणी जर्मन जहाज निर्माता कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स ने छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों से जुड़ी परियोजना के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लि. के साथ साझेदारी की है। इसे हाल के वर्षों में सबसे बड़ी मेक इन इंडिया पहल में से एक बताया जा रहा है। दोनों परियोजनाओं के तहत पनडुब्बियों की आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के लगभग छह वर्ष बाद शुरू होगी।
विज्ञापन
सरकार का लक्ष्य चीनी नौसेना को चुनौती देना
चीनी नौसेना के तेजी से आधुनिकीकरण की पृष्ठभूमि में, भारत सरकार ने परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की कई पनडुब्बी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हालांकि, भारत को अपने हित के क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान, दोनों का मुक्क्राबला करने के लिए वांछित क्षमताओं का तेजी से विकास करना होगा। भारतीय नौसेना अगले दशक में अपनी लगभग 10 पनडुब्बियों को चरणबद्ध तरीके से हटा सकती है और उसी समय-सीमा में उन्हें बदलने की आवश्यकता होगी।
दुर्गम क्षेत्र में तकनीक के साथ सेना का सफल युद्धाभ्यास
भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के कामेंग क्षेत्र में ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों और कठिन मौसम में अपनी लड़ाकू तैयारियों को परखने के लिए बड़ा सैन्य अभ्यास किया। यह अभ्यास शनिवार को पूरा हुआ। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि युद्ध कौशल 3.0 नाम के इस अभ्यास ने सेना की उभरती तकनीकों जैसे ड्रोन, सटीक हथियार और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमताओं को मजबूत किया है।
अभ्यास के दौरान ड्रोन से निगरानी, रियल-टाइम लक्ष्य पहचान, सटीक हमले, एयर-लिटोरल डॉमिनेंस और युद्धक्षेत्र में तालमेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया। इसमें तकनीक और सैनिकों की पेशेवर क्षमता का शानदार संगम दिखा। अभ्यास की खासियत नई गठित अश्नि प्लाटून का संचालन था, जिसने अगली पीढ़ी की तकनीक को पारंपरिक सैन्य कौशल के साथ जोड़कर भविष्य की जंग में निर्णायक बढ़त हासिल करने का उदाहरण पेश किया।
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि अभ्यास में भारतीय रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी रही। इससे स्पष्ट हुआ कि स्वदेशी रक्षा नवाचार अब सीधे युद्ध क्षेत्र में फायदा पहुंचा रहे हैं। इस अभ्यास ने न सिर्फ ऊंचाई और कठिन मौसम में सेना की तैयारी को साबित किया बल्कि यह भी दिखाया कि सेना नई तकनीक अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विज्ञापन
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पहली परियोजना तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद की है। इस पर बातचीत चल रही है। इनका निर्माण सरकारी कंपनी मझगांव डॉक लि. (एमडीएल) व फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप की ओर से संयुक्त रूप से किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने करीब 36,000 करोड़ रुपये के इस सौदे को दो वर्ष पहले मंजूरी दे दी थी, पर परियोजना के विभिन्न तकनीकी और वाणिज्यिक पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत में देरी हुई है। रक्षा मंत्रालय की जिस दूसरी परियोजना पर नजर है, वह लगभग 65,000 करोड़ की लागत से छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों की खरीद है। इस खरीद को मंत्रालय ने 2021 में ही मंजूरी दी थी।
विज्ञापन
जर्मन कंपनी ने की साझेदारी
अग्रणी जर्मन जहाज निर्माता कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स ने छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों से जुड़ी परियोजना के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लि. के साथ साझेदारी की है। इसे हाल के वर्षों में सबसे बड़ी मेक इन इंडिया पहल में से एक बताया जा रहा है। दोनों परियोजनाओं के तहत पनडुब्बियों की आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के लगभग छह वर्ष बाद शुरू होगी।
विज्ञापन
सरकार का लक्ष्य चीनी नौसेना को चुनौती देना
चीनी नौसेना के तेजी से आधुनिकीकरण की पृष्ठभूमि में, भारत सरकार ने परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की कई पनडुब्बी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हालांकि, भारत को अपने हित के क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान, दोनों का मुक्क्राबला करने के लिए वांछित क्षमताओं का तेजी से विकास करना होगा। भारतीय नौसेना अगले दशक में अपनी लगभग 10 पनडुब्बियों को चरणबद्ध तरीके से हटा सकती है और उसी समय-सीमा में उन्हें बदलने की आवश्यकता होगी।
दुर्गम क्षेत्र में तकनीक के साथ सेना का सफल युद्धाभ्यास
भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के कामेंग क्षेत्र में ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों और कठिन मौसम में अपनी लड़ाकू तैयारियों को परखने के लिए बड़ा सैन्य अभ्यास किया। यह अभ्यास शनिवार को पूरा हुआ। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि युद्ध कौशल 3.0 नाम के इस अभ्यास ने सेना की उभरती तकनीकों जैसे ड्रोन, सटीक हथियार और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमताओं को मजबूत किया है।
अभ्यास के दौरान ड्रोन से निगरानी, रियल-टाइम लक्ष्य पहचान, सटीक हमले, एयर-लिटोरल डॉमिनेंस और युद्धक्षेत्र में तालमेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया। इसमें तकनीक और सैनिकों की पेशेवर क्षमता का शानदार संगम दिखा। अभ्यास की खासियत नई गठित अश्नि प्लाटून का संचालन था, जिसने अगली पीढ़ी की तकनीक को पारंपरिक सैन्य कौशल के साथ जोड़कर भविष्य की जंग में निर्णायक बढ़त हासिल करने का उदाहरण पेश किया।
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि अभ्यास में भारतीय रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी रही। इससे स्पष्ट हुआ कि स्वदेशी रक्षा नवाचार अब सीधे युद्ध क्षेत्र में फायदा पहुंचा रहे हैं। इस अभ्यास ने न सिर्फ ऊंचाई और कठिन मौसम में सेना की तैयारी को साबित किया बल्कि यह भी दिखाया कि सेना नई तकनीक अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।