Marburg Virus: कोरोना के साथ इस नए वायरस ने बढ़ाई भारत समेत दुनिया की चिंता, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
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विस्तार
कोरोना वायरस संक्रमण के बाद एक और वायरस में दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मारबर्ग नामक वायरस अफ्रीका में अब तक नौ लोगों की जान ले चुका है। ये वायरस इबोला से काफी मिलता जुलता है। अब तक इस वायरस पर कोई भी वैक्सीन प्रभावी नहीं है।
नए वायरस को लेकर भारत के हेल्थ विशेषज्ञ का कहना है कि मारबर्ग एक रेयर और काफी खतरनाक वायरस है। इसके संपर्क में आने वाले मरीज को तेज बुखार होता है। इसमें संक्रमित व्यक्ति को तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है। अगर इसके इलाज में देरी होती है या संक्रमण गंभीर होता है तो ऐसे में मरीज की मौत भी हो सकती है। जिस किसी मनुष्य में मारबर्ग वायरस के लक्षण नजर आते हैं, तो उसे फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। हालांकि अभी तक भारत में इसका असर नहीं दिखाई दे रहा हैं। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।
नए वायरस के संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि मारबर्ग एक बेहद घातक वायरस है। जो चमगादड़ों से लोगों में पहुंचता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को रक्तस्रावी बुखार आता है। इसके बाद व्यक्ति गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। अफ्रीका में अब तक सामने आए मरीजों में से 88 फीसदी की मौत हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की अफ्रीका इकाई का कहना है कि नया वायरस बहुत ही ज्यादा खतरनाक है। यह वायरस इबोला फैमिली से ही संबंध रखता है। वायरस से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति में अचानक लक्षण दिखने शुरू होते हैं। यह वायरस इंसानों में फ्रूट बैट से पहुंचता है। इससे संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 88 फीसदी है। मारबर्ग वायरस के लक्षण मरीज में दो से लेकर 21 दिनों की अवधि के बीच अचानक शुरू होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द होते हैं। इन लक्षणों के कुछ दिनों बाद छाती, पीठ और पेट पर दाने निकल आते हैं। इसके अलावा उल्टी, सीने में दर्द, गले में खराश, पेट में दर्द और दस्त इस वायरस के लक्षण हो सकते हैं।
मारबर्ग वायरस के यह है लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मारबर्ग वायरस के लक्षण अचानक शुरू हो सकते जिनमें तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द और बेचैनी शामिल हैं। इनके अलावा मांसपेशियों में दर्द और दर्द की भी शिकायत हो सकती है। यह वायरस हर अंग को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से आसानी से रक्तस्राव हो सकता है। पहले सात दिनों में त्वचा पर दाने दिखाई दे सकते हैं। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे आपको भ्रम, आक्रामकता और चिड़चिड़ापन हो सकता है। वायरस के शुरुआत के आठ से नौ दिन बाद पीड़ित की मौत हो सकती होती है।
मारबर्ग के लिए वर्तमान में कोई टीका नहीं है और इसका इलाज करने के लिए कोई दवा या उपचार नहीं है। लेकिन मरीजों की मदद की जा सकती है। हालांकि लक्षणों को कम करने के लिए मरीज की देखभाल जरूरी है। मरीज को खूब तरल पदार्थ दें और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें। इससे मौत का जोखिम काफी हद तक हो सकता है।
मारबर्ग वायरस क्या है, इस तरह है फैलता
मारबर्ग वायरस फल खाने वाले अफ्रीकी चमगादड़ों में पैदा हुआ था। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, युगांडा से आयात किए गए हरे बंदरों के साथ काम करने वाले लोगों के बीच पहली बार 1967 में जर्मनी और पूर्व यूगोस्लाविया में इसकी पहचान की गई थी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ऐसे लोग खानों या गुफाओं में लंबे समय तक काम करते हैं उन्हें इसका ज्यादा खतरा होता है क्योंकि ऐसी जगहों पर चमगादड़ पाए जाते हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से वायरस से दूषित सतहों जैसे कि कपड़े या चादर के जरिए मनुष्यों के बीच फैलता है। मारबर्ग एयरबोर्न नहीं है।