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मराठा आरक्षण के लिए 19 सितंबर से मुंबई में अनशन: समर्थकों को दिए ये निर्देश, क्या सरकार की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Sat, 12 Sep 2026 04:59 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 12 Sep 2026 04:59 PM IST
सार

मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया है। इससे पहले 15 सितंबर से उनका मुंबई मार्च शुरू होगा। आंदोलन गणपति उत्सव के बीच होने जा रहा है। जरांगे ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है। हाईकोर्ट ने भी तत्काल रोक लगाने से इनकार किया है। ऐसे में क्या इस बार मुंबई में आरक्षण की लड़ाई कोई बड़ा मोड़ लेगी। आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Maratha Reservation Protest Manoj Jarange Announces Mumbai Hunger Strike From 19 Sep What His Instructions?
गणपति उत्सव के बीच मुंबई पहुंचेंगे जरांगे समर्थक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों के साथ 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू होने जा रहा है, जब महाराष्ट्र में 14 से 25 सितंबर तक गणपति उत्सव का दौर रहेगा। जरांगे ने कहा कि आरक्षण मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा और उनका मकसद लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग मनवाना है।

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जरांगे मुंबई कब पहुंचेंगे और आंदोलन कैसे शुरू होगा?

  • मनोज जरांगे ने जालना के अंतरवाली सराटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि वह 15 सितंबर से मुंबई की ओर मार्च शुरू करेंगे। यहां उनका आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में पहुंच गया। 
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  • उन्होंने बताया कि मुंबई जाने वाले प्रदर्शनकारी अलग-अलग जगहों पर रुकते हुए आगे बढ़ेंगे। 15 सितंबर को बीड के पाटोदा, 16 सितंबर को अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंदा, 17 सितंबर को पुणे जिले के हडपसर और 18 सितंबर को रायगढ़ जिले के खोपोली में पड़ाव होगा। 
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  • इसके बाद प्रदर्शनकारी नवी मुंबई के खारघरखैराने में रुकेंगे और फिर मुंबई की ओर बढ़ेंगे। जरांगे के मुताबिक प्रदर्शनकारी हर दिन करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। आजाद मैदान में 19 सितंबर सुबह 10 बजे से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू होगी।

आंदोलन को लेकर जरांगे ने समर्थकों को क्या निर्देश दिए?

जरांगे ने साफ कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहना चाहिए और किसी को पत्थरबाजी या आगजनी नहीं करनी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से वाहन ठीक तरीके से चलाने और आचार संहिता का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मराठा समाज की आरक्षण की मांग पूरी होने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा। जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी प्रदर्शनकारियों के रास्ते में बाधा नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस बैरिकेड लगाकर रोके तो प्रदर्शनकारी वहीं सड़क पर बैठ जाएं, लेकिन बैरिकेड को हाथ न लगाएं। इसके बाद वैकल्पिक रास्ते से आंदोलन स्थल तक पहुंचें। जरांगे ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को रोका गया तो ऐसी कार्रवाई की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री फडणवीस की होगी।

मराठा आरक्षण को लेकर जरांगे की मुख्य मांग क्या है?

जरांगे ने राज्य सरकार पर गजट से जुड़ी मांगों को लागू नहीं करने और 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब यह मुद्दा मुंबई तक ले जाया जाएगा और यह आरक्षण की मांग की अंतिम लड़ाई है। उनकी प्रमुख मांगों में एक ऐसी सरकारी अधिसूचना जारी करना शामिल है, जिसके तहत पुराने रिकॉर्ड और गजट दस्तावेजों के आधार पर मराठा समुदाय के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी में कुणबी समुदाय को मिलने वाले आरक्षण का लाभ मिल सके। हालांकि, ओबीसी समूह इसका जोरदार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके हिस्से के आरक्षण और दूसरे लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

महिलाओं से जरांगे ने क्या अपील की और हाईकोर्ट ने क्या कहा?

  • जरांगे ने महिलाओं से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महालक्ष्मी उत्सव के बाद इच्छुक महिलाएं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पत्नी लता शिंदे के घर शांतिपूर्ण तरीके से जाकर हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम के जरिए आरक्षण की मांग रखें। 
  • इससे पहले पिछले साल अगस्त-सितंबर में मुंबई में जरांगे की भूख हड़ताल के कारण शहर के कई हिस्सों में असर पड़ा था और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के आसपास का बड़ा इलाका भी ठप हो गया था। शुक्रवार को बंबई हाईकोर्ट ने मुंबई में उनके नए प्रदर्शन को रोकने की मांग वाली याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति को प्रदर्शन करने का अधिकार है और केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर रोक का आदेश नहीं दिया जा सकता। अब 19 सितंबर से आजाद मैदान में शुरू होने वाले आंदोलन पर सबकी नजर है।
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