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Maharashtra: 'सरकार कई मांगें मानने को तैयार है', दावे के साथ मनोज जरांगे ने खत्म की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

Thu, 30 Jan 2025 05:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालना Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 30 Jan 2025 05:49 PM IST
सार

Maharashtra: महाराष्ट्र के जालना जिले में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने पांच दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि, सरकार उनकी कई मांगें मानने को तैयार है।

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Maratha activist Manoj Jarange ends fast, claims govt ready to accept several demands News in hindi
मनोज जरांगे पाटिल, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता - फोटो : ANI

विस्तार

मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने गुरुवार को पांच दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकारी प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी कई मांगें मान ली जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो मराठा समुदाय के सदस्य मुंबई तक मार्च करेंगे।
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भाजपा विधायक और डीएम की मौजूदगी में खत्म की हड़ताल
सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे कार्यकर्ता ने भाजपा विधायक सुरेश धास और जिला कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पंचाल की मौजूदगी में महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में अपनी भूख हड़ताल खत्म की। जरांगे ने पत्रकारों से कहा कि सरकारी प्रतिनिधियों ने उनसे वादा किया है कि शिंदे समिति को फिर से सक्रिय करने समेत उनकी कई मांगें पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा, सरकार ने आश्वासन दिया है कि मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी मामले वापस लिए जाएंगे, जबकि समुदाय के सदस्यों के लिए 'कुनबी' प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अलग से अनुभाग स्थापित किए जाएंगे।'
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सरकार ने मसौदा अधिसूचना लागू करने के लिए मांगा समय
उन्होंने कहा कि मराठों के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के प्रावधानों को भी लागू किया जाएगा, जबकि आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले समुदाय के सदस्यों को मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, जरांगे ने कहा कि सरकार ने मसौदा अधिसूचना को लागू करने के लिए और समय मांगा है, जो कुनबी को मराठा समुदाय के सदस्यों के 'ऋषि सोयारे' (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता देता है, ताकि उन्हें ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी के तहत आरक्षण दिया जा सके।
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मराठों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने की पद्धति निर्धारित करने और उनके सदस्यों को कुनबी समुदाय का हिस्सा साबित करने के लिए सबूत इकट्ठा करने के लिए 7 सितंबर, 2023 को शिंदे समिति का गठन किया गया था। मनोज जरांगे के साथ अनशन कर रहे सैकड़ों मराठा प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। जरांगे के पांच दिवसीय विरोध प्रदर्शन के दौरान, कई लोगों को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।


'मैंने केवल अपना अनशन स्थगित किया है, अपना संघर्ष नहीं'
मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों से कहा, 'मैंने केवल अपना अनशन स्थगित किया है, अपना संघर्ष नहीं। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं तो हम मुंबई तक मार्च करेंगे। तब मुंबई ठप हो जाएगी। हालांकि, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि शहर को कोई नुकसान न पहुंचे'। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मराठा समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'मराठियों को धोखा मत दीजिए, नहीं तो हम मुंबई चले जाएंगे।' 1 सितंबर, 2023 को पुलिस ने अंतरवाली सरती में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था, उसके बाद से यह उनका सातवां अनिश्चितकालीन अनशन है। फरवरी 2024 में, महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया।
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