बहुत सी बातें तो केवल प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ही जानते हैं
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अनौपचारिक मुलाकात का कार्यक्रम बनाकर भारत आए थे। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव उन्हीं की तरफ से था। इसके पीछे राष्ट्रपति पुतिन का मकसद तमाम मुद्दों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साझा करना था। रूस के राष्ट्रपति का मानना था कि औपचारिक मुलाकात, राजकीय सम्मान और शिष्टाचार की औपचारिकताएं काफी समय ले लेती हैं। ऐसे में बातचीत के लिए समय कम मिल पाता है।
पुतिन के इस प्रस्ताव को भारत ने स्वीकार कर लिया और जैसा राष्ट्रपति चाहते थे, उसी के अनुरुप दोनों देशों के नेता मिले। ऐसे में दोनों शिखर नेताओं के बीच में कई ऐसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसकी जानकारी केवल राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी को ही है।
साढ़े चार घंटे अकेले में हुई बात
सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति पुतिन इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद पालम टेक्निकल एरिया आए। वहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनकी आगवानी की। इसके बाद राष्ट्रपति ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी के आवास सात कल्याण मार्ग का रूख किया। वहां प्रधानमंत्री के साथ तीन घंटे तक उन्होंने अकेले (वन टू वन) बात की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के सम्मान में रात्रि भोज दिया था।
अगले दिन दोनों शिखर नेताओं के बीच प्रतिनिधि मंडल स्तरीय वार्ता प्रस्तावित थी। लेकिन यहां भी यही हाल रहा। प्रतिनिधि मंडल स्तरीय वार्ता से पहले राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने फिर अकेले चर्चा की। समझा जा रहा है कि इन साढ़े चार घंटे में राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री के साथ कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की। इसमें द्विपक्षीय हित, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे शामिल थे।
राष्ट्रपति पुतिन ने ली जीएसटी की जानकारी, रखे कई प्रस्ताव
राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी से वस्तु एवं सेवाकर अधिनियम (जीएसटी) के बारे में पूछा। उन्होंने जीएसटी के प्रभाव, भारतीय बाजार, उत्पादन क्षेत्र समेत अन्य पहलुओं के बारे में जानना चाहा। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत में जीएसटी लागू करने तथा इसे लागू करने के बाद आने वाले परिणाम के बारे में बताया। इसी तरह से राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में शांति बहाली और सुरक्षा को लेकर भी चर्चा की। रूस और भारत के बीच में सहयोग बढ़ाने के तमाम उपायों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत की चिंताओं को रूस से साझा किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे कच्चे तेल का बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय मूल्य भारत जैसे विकासशील देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। कच्चे तेल की कीमत में स्थायित्व लाने के उपायों पर दोनों शिखर नेताओं के बीच में चर्चा हुई।
रूस की तरफ से प्रस्ताव आया कि ईरान जैसे सहयोगी देश कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय मूल्य को स्थिर रखने में सहायता दे सकते हैं। इस दौरान रूस के राष्ट्रपति ने भारत को पूरा रणनीतिक और सामरिक साझीदार देश बताते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
उन्होंने भारत द्वारा 2022 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री भेजने में मदद व प्रशिक्षण आदि का प्रस्ताव रखा। भारत ने रूस के राष्ट्रपति के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई और आगे बढ़ने के लिए विचार करने का आश्वासन दिया है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं ने विश्व की भू-राजनैतिक स्थिति में हो रहे बदलाव तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदल रही केमिस्ट्री को महत्वपूर्ण मानकर चर्चा की है।