फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Many doctors expelled on charges of threat culture in RG Kar Medical College Hospital news in hindi

डॉक्टर से दरिंदगीः धमकी-रैगिंग के आरोप में दस डॉक्टर निष्कासित; 72 घंटे के भीतर हॉस्टल खाली करने का निर्देश

Sun, 06 Oct 2024 08:57 PM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी, कोलकाता
अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी, कोलकाता Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 06 Oct 2024 08:57 PM IST
सार

जूनियर डॉक्टर की हत्या के बाद अस्पताल में कई डॉक्टरों और अन्य स्टाफ पर यौन शोषण, धमकी देने, जबरन वसूली और रैगिंग जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी जांच के लिए अस्पताल ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी।

विज्ञापन
Many doctors expelled on charges of threat culture in RG Kar Medical College Hospital news in hindi
आर जी कर मामले में विरोध। - फोटो : ANI

विस्तार

आर जी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 'थ्रेट कल्चर' के आरोप में 59 लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। कॉलेज की ओर से एक अधिसूचना जारी करते हुए तीन दिनों के अंदर 10 डॉक्टरों को भी निष्कासित करने का फैसला लिया है। इसमें इंटर्न, हाउस स्टाफ और सीनियर रेजिडेंट शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि ये सभी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के करीबी और विश्वासपात्र थे।

विज्ञापन


जूनियर डॉक्टर की हत्या के बाद अस्पताल में कई डॉक्टरों और अन्य स्टाफ पर यौन शोषण, धमकी देने, जबरन वसूली और रैगिंग जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी जांच के लिए अस्पताल ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी। शनिवार को कमेटी की बैठक हुई जिसमें यह कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है वह पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के करीबी हैं जिनके कार्यकाल में जूनियर महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।
विज्ञापन


इस संबंध में कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. मानस बंद्योपाध्याय ने कहा, काउंसिल बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। 10 लोगों के बहिष्कार के मामले में नेशनल मेडिकल काउंसिल के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए निर्णय लिया गया है। जिन चिकित्सकों को बर्खास्त किया गया है, उनके पंजीकरण को रद्द करने के लिए मेडिकल काउंसिल को सूची भेजी जाएगी। उनके चिकित्सा परीक्षा की उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए स्वास्थ्य विश्वविद्यालय को सूची भेजी जाएगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कॉलेज के उपाध्यक्ष डॉ. सप्तशी चट्टोपाध्याय के अनुसार, जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है, उन्होंने अपराध स्वीकार किया है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इनमें से 14 लोग अभी तक डॉक्टर नहीं बने हैं। आर जी कर अस्पताल की पीड़िता के मामले में आंदोलन करने वाले जूनियर डॉक्टरों की मांगों में से एक 'थ्रेट कल्चर' भी था। वास्तव में, इसी मांग के चलते राज्य सरकार के निर्देश पर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में जांच समिति बनाई गई है।

क्या हैं निष्कासित डॉक्टर्स पर आरोप
अधिसूचना के अनुसार, निलंबित किए गए व्यक्ति दूसरे छात्रों को बात नहीं मानने पर परीक्षा में फेल करवाने और हॉस्टल से निकलवाने की धमकी देते थे। जूनियर डॉक्टरों को जबरन एक खास राजनीतिक पार्टी से जुड़ने के लिए मजबूर करने, यौन शोषण, जबरन वसूली, फर्जी एफआईआर दर्ज करवाने के भी आरोप हैं। इसके अलावा, इन लोगों पर जूनियर स्टाफ को देर रात नशा और शराब खरीदने के लिए मजबूर करने और लड़कों को कॉमन रूम में अश्लील हरकतें करने के लिए बाध्य करने और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के साथ मारपीट करने के आरोप भी हैं। जिन लोगों के खिलाफ महिलाओं के यौन शोषण के ठोस सबूत पाए गए हैं उनके मामले को आगे की जांच और कार्रवाई के लिए कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति के पास भेजा गया है।

72 घंटे में मेडिकल कॉलेज हॉस्टल खाली करने का आदेश
निलंबित डॉक्टरों में सौरभ पाल, आशीष पांडे (जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया), अभिषेक सेन, आयुष्री थापा, निरंजन बागची, शरीफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं। निष्काषित लोगों को अगले 72 घंटों में हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है। इन आरोपितों के नामों को राज्य मेडिकल काउंसिल को भी भेजा जाएगा, जिससे उनके रजिस्ट्रेशन की जांच और रद्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। वहीं, निलंबित हाउस स्टाफ में अशोक पांडे भी है जो संदीप घोष का बेहद करीबी बताया गया है।

राज्यपाल का ममता सरकार पर निशान
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने से दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं। बोस का यह बयान दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर इलाके में 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले के बाद आया है। उन्होंने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले से निपटने में राज्य सरकार की अक्षमता ऐसी ही भयावह घटनाओं की पुनरावृत्ति को बढ़ावा दे रही है। राज्य सरकार को समझना चाहिए कि समय रहते संभलने से बड़ी आफत टलती है। बंगाल में मौजूदा सरकार के तहत हिंसा का कोई इलाज नहीं दिख रहा है। यह विचित्र है।


आरोपों के हिसाब से बनाई गई थी चार श्रेणियां
सूत्रों के मुताबिक शिकायत को ध्यान में रखते हुए जांच के लिए चार श्रेणियां बनाई गई थीं। इसके तहत सबसे गंभीर मामले के दस डॉक्टरों को निष्कासित किया गया। इसके अलावा दूसरी श्रेणी में 27 लोगों के नाम शामिल हैं। उन्हें सभी को हॉस्टल से बाहर निकालने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी में शामिल चिकित्सा छात्रों, इंटर्न और हाउस स्टाफ के लिए विभिन्न प्रकार की सजा की सिफारिश की गई है। इसी तरह से तीसरी श्रेणी में 16 लोग शामिल हैं। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी तरह से चौथी श्रेणी में बाकियों को रखा गया है, इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
 


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed