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AI: एआई की मदद से पांडुलिपि चित्रों को पाठ में बदला जाए, संसदीय समिति ने दिया सुझाव
Mon, 31 Mar 2025 10:09 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 31 Mar 2025 10:09 PM IST
सार
संसद की एक समिति ने ऐसी उन्नत ज्ञान ढांचा विकसित करने की सिफारिश की है, जिसमें पांडुलिपि छवियों को खोज योग्य पाठ में परिवर्तित किया जा सके। इसके साथ ही यह भी सुझाया कि संस्कृति मंत्रालय जमीन पर काम करने वाले कर्मियों को पांडुलिपि मित्र के रूप में सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर सकता है।
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Artificial Intelligence(AI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई)
- फोटो : Freepik
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विस्तार
संसदीय समिति ने एक ऐसा उन्नत ज्ञान ढांचा विकसित करने की सिफारिश की है, जिसमें पांडुलिपि चित्रों को खोजने योग्य पाठ में बदलने और प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुदित करने के लिए एक एआई आधारित मंच बनाना शामिल हो। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाया कि संस्कृति मंत्रालय जमीन पर काम करने वाले कर्मियों को पांडुलिपि मित्र के रूप में सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर सकता है।
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समिति ने पिछले सप्ताह संसद में प्रस्तुत संस्कृति मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर अपनी रिपोर्ट में कहा, इन प्रशिक्षित व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण में सहायता करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान से सशक्त किया जाएगा।
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मौजूदा डिजिटलीकरण प्रयासों के आधार पर समिति ने पांडुलिपियों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की सिफारिश की है। संसदीय समिति ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (एनएमएम) ने पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में प्रगति की है, वहीं वर्तमान दृष्टिकोण वास्तव में संवादात्मक, शोध-सक्षम डिजिटल अवसंरचना बनाने के बजाय बुनियादी दस्तावेजीकरण पर केंद्रित है। समिति ने कहा कि 'पंडुलीपिपटाला 2.0' को एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
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शैक्षिक वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी और टैक्स के दायरे से बाहर करने का सुझाव
वहीं एक अन्य स्थायी समिति ने टयूशन फीस, पाठयपुस्तकों, शैक्षिक वस्त़ुओं और सेवाओं को जीएसटी और टैक्स के दायरे से बाहर करने की जरूरत बताई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अगली जीएसटी काउंसिल बैठक से पहले शैक्षिक वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी और टैक्स के दायरे से बाहर रखने के लिए अध्ययन की सिफारिश की है। समिति ने रिपोर्ट में लिखा कि शैक्षणिक संस्थानों को भवन निर्माण की वस्तुओं पर 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ता है। यही नहीं, साइंटफिक रिसर्च एंड लैबोरेटरी में उपकरण और केमिकल खरीद पर 10 से 150 फीसदी तक कस्टम डयूटी देनी पड़ती है।