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Hindi News ›   India News ›   Mannu Bhandari passes away at the age of 90 years storyteller of the changing social reality

स्मृति शेष: बदलते सामाजिक यथार्थ की कहानीकार थीं मन्नू, हिंदी की अग्रणी लेखिका ने 90 की उम्र में ली अंतिम सांस

Tue, 16 Nov 2021 07:50 AM IST
देव कश्यप रवींद्र त्रिपाठी, नई दिल्ली
रवींद्र त्रिपाठी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 16 Nov 2021 07:50 AM IST
सार

आज के भारत में ये अजूबा नहीं लगता, पर यह सातवें दशक के भारत की कहानी है। मन्नू जी इस मायने में ऐसी लेखिका हैं, जिन्होंने एक नए मनोवैज्ञानिक और सामाजिक यथार्थ को पहचाना था।

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Mannu Bhandari passes away at the age of 90 years storyteller of the changing social reality
मन्नू भंडारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मन्नू भंडारी (1931- 2021) हिंदी कहानी के उस ऐतिहासिक दौर से जुड़ी थीं, जिसे ‘नई कहानी’ कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोहन राकेश, राजेंद्र यादव और कमलेश्वर नाम के त्रिमूर्ति की चर्चा होती है। पर ये त्रिमूर्ति नहीं, एक चतुष्टय था और इसकी चौथी सदस्य थीं मन्नू भंडारी।

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लेकिन आगे चलकर मन्नू जी सिर्फ कहानीकार नहीं रहीं। उन्होंने उपन्यास भी लिखे, जिसमें दो काफी चर्चित रहे-आपका बंटी और महाभोज। ‘आपका बंटी’ के बारे में उचित ही ये माना जाता है कि ये उस बच्चे के मनोविज्ञान को समझने के लिए एक अनिवार्य संदर्भ कृति है जिसके माता-पिता अलग हो चुके हैं और फिर दूसरी शादी भी कर चुके हैं और बच्चा इनमें से किसी एक के साथ रह रहा है।
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आज के भारत में ये अजूबा नहीं लगता, पर यह सातवें दशक के भारत की कहानी है। मन्नू जी इस मायने में ऐसी लेखिका हैं, जिन्होंने एक नए मनोवैज्ञानिक और सामाजिक यथार्थ को पहचाना था। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि ये उपन्यास मोहन राकेश और उनकी पहली पत्नी के जीवन प्रसंग से जुड़ा है। जैसा कि हिंदी में सर्वविदित है राकेश-राजेंद्र यादव और कमलेश्वर तथा मन्नू भंडारी आपस में मित्र भी थे और एक दूसरे के अंतरंग जीवन के बारे में भी काफी कुछ जानते थे।
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महाभोज...राजनीति की गिरावट

  • इनके उपन्यास ‘महाभोज’ का राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने कई साल पहले नाट्य मंचन किया था। इसके बाद इसे कई निर्देशकों ने इसका मंचन किया। यह उपन्यास भारतीय राजनीति में आई मूल्य गिरावट को सूचित करता है।
  • ‘रजनीगंधा’ फिल्म को कौन भूल सकता है...जिसके निर्देशक बासु चटर्जी थे और अमोल पालेकर, विद्या सिन्हा जैसे कलाकार प्रमुख चरित्र। ये फिल्म मन्नू जी की कहानी ‘यही सच है’ पर बनी थी।

...इस रिश्ते पर कौन लिखेगा
मन्नू जी का अपने पति और कथाकार राजेंद्र यादव से जटिल रिश्ता रहा। दोनों के बीच औपचारिक संबंध तो नहीं टूटा, लेकिन अंतिम बरसों में वे अलग-अलग ही रहे। फिर भी दोनों के बीच एक समय बेहद रचनात्मक रिश्ता भी रहा जिसका प्रमाण है दोनों का साथ-साथ लिखा उपन्यास-एक इंच मुस्कान। वैसे दोनों के बीच का संबंध भी एक बड़े उपन्यास का विषय हो सकता है। इसे कौन लिखेगा?

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