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Manish Sisodia: सीबीआई जांच को विपक्ष ने भी बनाया हथियार, कांग्रेस के बाद अब केजरीवाल ने खेला ये दांव

Mon, 17 Oct 2022 07:54 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 17 Oct 2022 07:54 PM IST
सार

Manish Sisodia: भाजपा नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार को ‘ग्लैमराइज’ करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया पर शराब घोटाले में गंभीर आरोप हैं और वे इस मामले में आरोपी नंबर वन हैं...

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Manish Sisodia: like congress, arvind kejriwal also play tactics to counter CBI investigation in liquor scam
Manish Sisodia: सीबीआई ऑफिस में जाते हुए उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पर हमेशा ये आरोप लगते रहे हैं कि वे देश की सत्ताधारी पार्टी के लिए काम करती रही हैं। विपक्ष ने उनकी जांच को हमेशा राजनीति से प्रेरित बताया है और इसके जरिये सत्तारूढ़ दलों पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। लेकिन संभवतया यह पहली बार हो रहा है कि अब विपक्षी दलों ने भी सीबीआई-ईडी जांच को भुनाना सीख लिया है। 17 अक्तूबर को मनीष सिसोदिया की सीबीआई से होने वाली पूछताछ के पहले आम आदमी पार्टी ने जो प्रदर्शन किया है, इसे सीधा गुजरात चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पहले राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के पहले कांग्रेस ने भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया था।

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दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी में नियमों का उल्लंघन कर शराब व्यवसायियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। आरोप हैं कि नियमों का बदलाव करने के बदले में व्यवसायियों से आम आदमी पार्टी नेताओं ने अनुचित तरीके से लाभ लिया। लेकिन इन आरोपों में घिरने के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि भाजपा जांच एजेंसी सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों का इसी तरह दुरूपयोग किया जायेगा तो इससे देश के विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
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राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय मानते हैं कि पूछताछ के पहले सिसोदिया ने राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी के समाधि स्थल का दर्शन किया और इसके बाद एक रोड शो करते हुए वे जांच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे। हाई प्रोफाइल मामला होने के नाते पूरे दिन यह मामला मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा और इस तरह गुजरात न जाकर भी सिसोदिया अपनी पार्टी के लिए वही प्रचार करते रहे, जो वे गुजरात जाकर कर सकते थे। आम आदमी पार्टी ने अपने ऊपर हुई कार्रवाई को ही प्रचार का माध्यम बना लिया।    
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उन्होंने कहा कि अब तक सत्तारूढ़ दल ही जांच एजेंसियों एक बहाने अपने राजनीतिक हित साधते थे, अब विपक्ष ने उसी हथियार को अपने पक्ष में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसके पहले कांग्रेस ने अपने नेता राहुल गांधी से पूछताछ के पहले इसी तरह का प्रदर्शन किया था। हालांकि, इससे इन जांच एजेंसियों की साख पर गहरा असर पड़ता है। देश की संवैधानिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों की साख जनता की नजरों में बनी रहे, देश के लोकतंत्र के लिए यही बेहतर है।

भ्रष्टाचार को ‘ग्लैमराइज’ करने की कोशिश

भाजपा नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार को ‘ग्लैमराइज’ करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया पर शराब घोटाले में गंभीर आरोप हैं और वे इस मामले में आरोपी नंबर वन हैं। दिल्ली सरकार को इस बात के जवाब देने होंगे कि नियमों के विरुद्ध जाकर उन्होंने शराब व्यवसायियों को अनुचित लाभ कैसे पहुंचाया। लेकिन जिस प्रकार पूछताछ के पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया, वह उनके अपराध को छिपाने की कोशिश थी।

केजरीवाल ने अब तक सबूत नहीं दिखाए

दिल्ली कांग्रेस उपाध्यक्ष मुदित अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी बंद कर चुकी थी। पहली जांच में ही उसे इस मामले में कोई घोटाला नहीं दिखाई पड़ा था। लेकिन केवल राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि खराब करने के लिए सत्तारूढ़ दल ने इस मामले को दोबारा खोला। यह साबित करता है कि भाजपा इनका राजनीतिक इस्तेमाल कर रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर हमला राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश था, जबकि इस जांच के विरोध में किया गया उनकी पार्टी का प्रदर्शन केवल इस मामले को जनता के संज्ञान में लाने की कोशिश थी।

भ्रष्टाचार में बचाव सही नहीं

मुदित अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली की शराब पॉलिसी में व्यापारियों का कमीशन दो फीसदी से बढाकर 12 फीसदी किया गया। इसी प्रकार अनुचित तरीके से कम्पनियों को 144 करोड़ रुपये की राहत दी गई। ये तथ्य इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि केजरीवाल सरकार ने शराब घोटाले में बड़ा भ्रष्टाचार किया है। कांग्रेस नेता ने केजरीवाल सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जिन्होंने महात्मा गांधी की फोटो अपने कार्यालयों से हटा दिया, अब भ्रष्टाचार में घिरने के बाद उन्हीं के नाम पर बचने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी यह कोशिश सफल नहीं होगी।



उन्होंने कहा कि इन दो मामलों से साफ़ हो जाता है कि इन जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव होता है और देश के कई विपक्षी दलों के नेताओं पर लगातार हो रही कार्रवाई से इस बात का शक विश्वास में बदल जाता है कि एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन केवल इसके नाम पर शराब घोटाले जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में बचा नहीं जा सकता।

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