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मणिपुर में कांग्रेस-भाजपा के बीच शुरू हुई जुबानी जंग

Tue, 28 Feb 2017 06:19 AM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, इंफाल
रीता तिवारी/ अमर उजाला, इंफाल Updated Tue, 28 Feb 2017 06:19 AM IST
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Manipur: war of words begin between Congress-BJP
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विधानसभा चुनावों की तारीख नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद उत्साहित भाजपा नेताओं ने अब कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए हैं। भाजपा ने जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस पर आर्थिक नाकेबंदी करने वाले संगठनों के साथ हाथ मिलाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर सत्ता हासिल करने के लिए विभिन्न जनजातियों के बीच मतभेदों को बढ़ावा देने और नगा संगठन एनएससीएन (आईएम) के साथ गोपनीय समझौता करने का आरोप लगाया है।

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मोदी ने शनिवार को अपनी रैली में कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे रहने और राज्य के विकास पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार सत्ता में आने पर साढ़े तीन महीने से चल रही आर्थिक नाकेबंदी खत्म कर देगी। कांग्रेस सरकार ने राज्य के विकास के लिए 15 वर्षों में जितना काम नहीं किया है भाजपा 15 महीनों में उससे ज्यादा कर दिखाएगी। अब उसके बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने मोदी के भाषण को ही कांग्रेस पर हमले का हथियार बना लिया है।
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दूसरी ओर, कांग्रेस वोटरों को यह समझाने का प्रयास कर रही है कि आर्थिक नाकेबंदी भाजपा और उग्रवादी संगठन एनएससीएन (आईएम) के दिमाग की उपज है। मणिपुर कांग्रेस के प्रमुख टीएन हाओकिप का आरोप है कि भाजपा आर्थिक नाकेबंदी की आड़ में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहती थी ताकि उसे इसका सियासी फायदा मिल सके। लेकिन मणिपुर के लोग उसकी इस साजिश को समझ चुके हैं।

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मणिपुर विधानसभा चुनाव में दलबदलू मुश्किल में

Manipur: war of words begin between Congress-BJP

मणिपुर विधानसभा चुनावों में दलबदलू भारी मुश्किल में फंसे हैं। आम लोगों के बीच जाने पर उनको कई कड़वे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अक्सर सवाल करते हैं कि क्या आपने महज सत्ता के लिए ही अपनी बरसों पुरानी पार्टी छोड़ी है आपके लिए सत्ता बड़ी है या जनता। उनको इसके जवाब नहीं सूझ रहे हैं।

ध्यान रहे कि कई नेताओं ने चुनावों के एलान के बाद टिकट नहीं मिलने की वजह से अपनी पार्टी बदल ली थी तो कुछ ने इस अंदेशे से पहले ही दूसरे दलों का दामन थाम लिया था। अब कुछ विधानसभा क्षेत्रों में तो स्थानीय कार्यकर्ता तक ऐसे नेताओं के लिए काम करने को तैयार नहीं हैं। एक भाजपा नेता सवाल करते हैं कि हम आखिर ऐसे नेता के लिए काम क्यों करें तो कल तक कांग्रेस में था। हमारा तो पूरा जीवन ही कांग्रेस के कुशासन व भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में बीता है। 

कांग्रेस ने जिन पूर्व भाजपा नेताओं को टिकट दिए हैं उनके इलाकों में भी यही स्थिति है। कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों की सूची में ऐसे दलबदलुओं की भरमार है। दलबदलुओं को टिकट देने में पहले नंबर पर रही भाजपा को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इससे कई जगह टिकट की आस लगाए बैठे स्थानीय नेता भी इस बार सक्रिय चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

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