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मणिपुर: नगा-कुकी संघर्ष से फिर बढ़ा तनाव, हिंसा में मारे गए नौ लोग; नगालैंड में भी दो समुदाय भिड़े, एक की मौत
Sun, 11 Oct 2026 03:23 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल/कोहिमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल/कोहिमा
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 11 Oct 2026 03:23 PM IST
सार
मणिपुर के कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसा में नौ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक महिला और गोरखा समुदाय का एक किसान शामिल हैं। दूसरी ओर, नगालैंड के किफिरे जिले में तिखिर और यिमखियुंग समुदायों के बीच विवाद के बाद गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई और दूसरा घायल हो गया।
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मणिपुर में तनाव (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
मणिपुर के तीन पहाड़ी जिलों कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में रविवार को तनाव बना रहा। नागा और कुकी समुदायों के बीच ताजा हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
शुक्रवार और शनिवार को हुई हिंसा में छह नागा, दो कुकी और गोरखा समुदाय के एक किसान की मौत हुई। इस साल मणिपुर में हुई हिंसक घटनाओं में इसे सबसे घातक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। हालांकि, रविवार को इन तीनों पहाड़ी जिलों में किसी नई हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
सीएम खेमचंद सिंह ने हालात पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर काबू पाने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स और फेसबुक पर कहा, "मैं कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में निर्दोष नागरिकों की हत्या और आज हुई हिंसा की निंदा करता हूं।" उन्होंने बताया कि अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करने, शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने तथा सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
खेमचंद सिंह ने कहा, "मैं विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज संगठनों से आगे आने, संयम बरतने और स्थिति को शांत करने में सहयोग करने की अपील करता हूं। मैं समाज के सभी वर्गों से शांति, संवाद और सद्भाव को प्राथमिकता देने का आग्रह करता हूं।" अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा को और बढ़ने से रोकने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और मणिपुर पुलिस ने तीनों प्रभावित जिलों में गश्त और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं।
महिला की हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा
ताजा हिंसा शुक्रवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव में 42 वर्षीय महिला की हत्या के बाद शुरू हुई। कामजोंग में नागा समुदाय की आबादी अधिक है, लेकिन चासाद गांव में कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं। इंफाल में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि डोमखोनेई तौथांग नाम की महिला के गर्दन के पास गोली लगी थी। पांच बच्चों की मां तौथांग की कुछ ही मिनटों में मौत हो गई।
महिला की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार तक जारी रही। झड़पों में 23 वर्षीय एक युवक की भी मौत हो गई और 10 घरों में आग लगा दी गई। कुकी-जो संगठनों ने महिला की हत्या के लिए सुरक्षा बलों और एक नागा सशस्त्र समूह को जिम्मेदार ठहराया।
हिंसा के बाद कामजोंग के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, आग्नेयास्त्रों और अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं को लेकर चलने तथा प्रतिबंधित क्षेत्र में आवाजाही पर रोक लगाई गई।
कांगपोकपी और उखरुल में भी हमले
कांगपोकपी जिले में शनिवार को एक अलग घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने तापन और मकुई गांवों पर हमला किया। अधिकारियों के अनुसार, इसमें दो नागा ग्राम रक्षकों एम. दैमाई और आर. गंगमेई समेत रिंगकांगमाई नाम के एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।
नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने दावा किया कि 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबोउ आर. का उग्रवादियों ने सिर काट दिया। संगठन ने मांग की कि उनका कटा हुआ सिर परिवार को लौटाया जाए, ताकि परिजन सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर सकें।
कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित तांगखुल नागा बहुल निंगचौ गांव में भी संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी की। अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 35 वर्षीय नगाचांसो निंगशेन और 48 वर्षीय लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई।हमले के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हथियारबंद हमलावर म्यांमार की ओर भाग गए।
उखरुल जिले में चेपू याओलेन के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक वाहन पर कथित तौर पर गोलीबारी की, जिसमें 40 वर्षीय संदीप राय की मौत हो गई। पुलिस अधिकारी के अनुसार, नेपाली समुदाय से संबंध रखने वाले राय की मौत उनकी कार के भीतर हुई।
इस साल कितने लोगों की मौत?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस साल फरवरी से प्रभावित जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच संघर्ष में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई घर जला दिए गए हैं। हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग, नोनी और सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है।
नगालैंड के किफिरे में दो समुदायों के बीच गोलीबारी, एक की मौत
नगालैंड के किफिरे जिले में दो समुदायों के सदस्यों के बीच गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि झड़पों के दौरान कई घरों के जलने की भी सूचना है। यह हिंसा तिखिर और यिमखियुंग समुदायों के बीच हुई। स्थिति तनावपूर्ण बनी रहने के कारण संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे यानथुंगो पैटन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतभेदों का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत से किया जा सकता है।
कई जगह निषेधाज्ञा लागू
पुलिस के मुताबिक, दोनों समुदायों की मिश्रित आबादी वाले गांवों में तिखिर समुदाय के लोगों द्वारा एक त्योहार मनाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद जिले के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। शनिवार को लॉन्गत्सुंगर में गोलीबारी हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। वहीं, जोआंगर गांव में संपत्तियों को जलाए जाने की सूचना मिली।
आगे हिंसा बढ़ने और शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पुंग्रो उपमंडल के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। क्षेत्र के प्रमुख आदिवासी संगठन ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) ने भी सभी जनजातियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
ईएनपीओ के अध्यक्ष चिन्गमक चांग ने यिमखियुंग और तिखिर आदिवासी परिषदों से हिंसा रोकने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।
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शुक्रवार और शनिवार को हुई हिंसा में छह नागा, दो कुकी और गोरखा समुदाय के एक किसान की मौत हुई। इस साल मणिपुर में हुई हिंसक घटनाओं में इसे सबसे घातक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। हालांकि, रविवार को इन तीनों पहाड़ी जिलों में किसी नई हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
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सीएम खेमचंद सिंह ने हालात पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर काबू पाने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स और फेसबुक पर कहा, "मैं कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में निर्दोष नागरिकों की हत्या और आज हुई हिंसा की निंदा करता हूं।" उन्होंने बताया कि अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करने, शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने तथा सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
खेमचंद सिंह ने कहा, "मैं विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज संगठनों से आगे आने, संयम बरतने और स्थिति को शांत करने में सहयोग करने की अपील करता हूं। मैं समाज के सभी वर्गों से शांति, संवाद और सद्भाव को प्राथमिकता देने का आग्रह करता हूं।" अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा को और बढ़ने से रोकने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और मणिपुर पुलिस ने तीनों प्रभावित जिलों में गश्त और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं।
महिला की हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा
ताजा हिंसा शुक्रवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव में 42 वर्षीय महिला की हत्या के बाद शुरू हुई। कामजोंग में नागा समुदाय की आबादी अधिक है, लेकिन चासाद गांव में कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं। इंफाल में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि डोमखोनेई तौथांग नाम की महिला के गर्दन के पास गोली लगी थी। पांच बच्चों की मां तौथांग की कुछ ही मिनटों में मौत हो गई।
महिला की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार तक जारी रही। झड़पों में 23 वर्षीय एक युवक की भी मौत हो गई और 10 घरों में आग लगा दी गई। कुकी-जो संगठनों ने महिला की हत्या के लिए सुरक्षा बलों और एक नागा सशस्त्र समूह को जिम्मेदार ठहराया।
हिंसा के बाद कामजोंग के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, आग्नेयास्त्रों और अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं को लेकर चलने तथा प्रतिबंधित क्षेत्र में आवाजाही पर रोक लगाई गई।
कांगपोकपी और उखरुल में भी हमले
कांगपोकपी जिले में शनिवार को एक अलग घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने तापन और मकुई गांवों पर हमला किया। अधिकारियों के अनुसार, इसमें दो नागा ग्राम रक्षकों एम. दैमाई और आर. गंगमेई समेत रिंगकांगमाई नाम के एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।
नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने दावा किया कि 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबोउ आर. का उग्रवादियों ने सिर काट दिया। संगठन ने मांग की कि उनका कटा हुआ सिर परिवार को लौटाया जाए, ताकि परिजन सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर सकें।
कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित तांगखुल नागा बहुल निंगचौ गांव में भी संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी की। अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 35 वर्षीय नगाचांसो निंगशेन और 48 वर्षीय लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई।हमले के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हथियारबंद हमलावर म्यांमार की ओर भाग गए।
उखरुल जिले में चेपू याओलेन के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक वाहन पर कथित तौर पर गोलीबारी की, जिसमें 40 वर्षीय संदीप राय की मौत हो गई। पुलिस अधिकारी के अनुसार, नेपाली समुदाय से संबंध रखने वाले राय की मौत उनकी कार के भीतर हुई।
इस साल कितने लोगों की मौत?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस साल फरवरी से प्रभावित जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच संघर्ष में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई घर जला दिए गए हैं। हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग, नोनी और सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है।
नगालैंड के किफिरे में दो समुदायों के बीच गोलीबारी, एक की मौत
नगालैंड के किफिरे जिले में दो समुदायों के सदस्यों के बीच गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि झड़पों के दौरान कई घरों के जलने की भी सूचना है। यह हिंसा तिखिर और यिमखियुंग समुदायों के बीच हुई। स्थिति तनावपूर्ण बनी रहने के कारण संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे यानथुंगो पैटन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतभेदों का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत से किया जा सकता है।
कई जगह निषेधाज्ञा लागू
पुलिस के मुताबिक, दोनों समुदायों की मिश्रित आबादी वाले गांवों में तिखिर समुदाय के लोगों द्वारा एक त्योहार मनाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद जिले के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। शनिवार को लॉन्गत्सुंगर में गोलीबारी हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। वहीं, जोआंगर गांव में संपत्तियों को जलाए जाने की सूचना मिली।
आगे हिंसा बढ़ने और शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पुंग्रो उपमंडल के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। क्षेत्र के प्रमुख आदिवासी संगठन ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) ने भी सभी जनजातियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
ईएनपीओ के अध्यक्ष चिन्गमक चांग ने यिमखियुंग और तिखिर आदिवासी परिषदों से हिंसा रोकने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।