फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   manipur tension over high court decision indian army hold flag march amid violance meiteis inclusion in st

Manipur violence: हिंसा में एक युवा फुटबॉल खिलाड़ी की मौत, उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश

Thu, 04 May 2023 07:25 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 04 May 2023 07:25 PM IST
सार

मणिपुर नागरिक प्रशासन की अपील पर विभिन्न इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। यह तैनाती तीन मई शाम से की गई है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

विज्ञापन
manipur tension over high court decision indian army hold flag march amid violance meiteis inclusion in st
मणिपुर में तैनात सेना के जवान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर हाईकोर्ट के एक फैसले से पहाड़ी राज्य में तनाव बढ़ गया है। हालात को देखते हुए सेना को तैनात किया गया। सेना के जवान राज्य के विभिन्न इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं। सेना ने जानकारी दी है कि मणिपुर नागरिक प्रशासन की अपील पर विभिन्न इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। यह तैनाती तीन मई शाम से की गई है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। 

विज्ञापन

एक युवा फुटबॉल खिलाड़ी की मौत

मणिपुर में जारी हिंसा के बीच कांगपोकपी जिले में पुलिस फायरिंग में एक फुटबॉलर की मौत हो गई है। मृतक खिलाड़ी की पहचान 20 वर्षीय मंगमिनजोई हाओकिप के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक खिलाड़ी को सैकुल इलाके में एक कथित पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि सिर में गोली लगने से उसकी मौत हो गई। हालांकि अभी तक पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

विज्ञापन

ममता ने की शांति बहाल करने की अपील

बंगाल की मुखमंत्री ममता बनर्जी ने मणिपुर में हो रही हिंसा पर दुख जताया है। ममता ने ट्विट में लिखा, मैं मणिपुर की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हूं। यह राजनीति का समय नहीं है। राजनीति और चुनाव इंतजार कर सकते हैं, लेकिन पहले हमारे खूबसूरत राज्य मणिपुर की रक्षा करनी होगी। इसलिए मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से आग्रह करती हूं कि पहले मणिपुर का ध्यान रखें, वहां शांति बहाल करें। साथ ही उन्होंने मणिपुर के लोगों से राज्य में शांति और सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

हिंसा भड़कने का डर

बता दें कि बुधवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले मणिपुर के सभी 10 जिलों में मार्च निकाला था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी मैती समुदाय को जनजाति का दर्जा देने का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि बीती 19 अप्रैल को मणिपुर हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि सरकार को मैती समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया है। फैसले के विरोध में मणिपुर के बिशनुपुर और चूराचांदपुर जिलों में हिंसा हुई है। हिंसा को भड़कने से रोकने के लिए सरकार ने राज्य में पांच दिनों के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। चूराचांदपुर जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है।  

गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से की बात

मणिपुर के हालात पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से बात की है। रैपिड एक्शन फोर्स की कई कंपनियां भी मणिपुर भेजी गई हैं। भारतीय वायुसेना के विमानों से आरएएफ के जवानों को मणिपुर भेजा गया है। साथ ही मणिपुर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान पहल से ही तैनात हैं। भारतीय सेना की असम राइफल्स के जवान मणिपुर के हिंसा प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रहे हैं। अभी तक 7500 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। 

वहीं मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने बयान जारी कर कहा कि 'बीते 24 घंटे में कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हमारे समाज के दो समुदायों के बीच गलतफहमी की वजह से यह घटनाएं हो रही हैं। राज्य सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।'


क्या है विवाद

मणिपुर में मैती समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है और ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। मैती समुदाय का कहना है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मौजूदा कानून के तहत उन्हें राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैती समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। 

जनजातीय वर्ग क्यों कर रहा है विरोध?

वहीं हाईकोर्ट के फैसले का राज्य का जनजातीय वर्ग विरोध कर रहा है। जनजातीय वर्ग को डर है कि मैती समुदाय को अगर जनजातीय वर्ग में शामिल कर लिया जाता है तो वह उनकी जमीन और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed