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Manipur: इंफाल में एनआरसी की मांग पर प्रदर्शन, पुलिस से झड़प में छह घायल
Wed, 11 Mar 2026 08:45 PM IST
Rahul Kumar
अमर उजाला ब्यूरो,
अमर उजाला ब्यूरो,
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 11 Mar 2026 08:45 PM IST
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मणिपुर (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
मणिपुर की राजधानी इंफाल में बुधवार को जनगणना से पहले एनआरसीलागू करने की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया। ईमा कैथेल की महिला विक्रेताओं और नागरिक संगठनों ने पहले एनआरसी, फिर जनगणना के नारों के साथ विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने के प्रयास के बाद सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले और मॉक बम दागे, जिसमें छह लोग घायल हो गए।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन के सहायक सचिव नाओरेम वांगांबा ने कहा कि बिना एनआरसी के जनगणना होने पर अवैध प्रवासियों के वैध नागरिक बनने का खतरा है। यह मुद्दा विधानसभा सत्र के दौरान भी गूंजा, जहां विपक्ष ने शांति बहाली तक जनगणना स्थगित करने की मांग की।
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इस पर मुख्यमंत्री खेमनम खेमचंद्र सिंह ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना प्रक्रिया में अभी समय लगेगा। वर्तमान में केवल आवास इकाइयों की सूची तैयार करने जैसी प्रारंभिक तैयारियां चल रही हैं, जिसके बाद ही रजिस्ट्रार जनरल द्वारा मुख्य प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में भारी सुरक्षा बल तैनात है।
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मणिपुर के उखरुल में बढ़ा तनाव, 20 से ज्यादा नागा नागरिकों को बनाया बंधक
मणिपुर के उखरुल जिले में बुधवार को तनाव गहरा गया। उखरुल-इंफाल मार्ग पर यात्रा कर रहे तंगखुल नागा समुदाय के कई नागरिकों को दूसरे समुदाय ने बंधक बना लिया। अधिकारियों के अनुसार यह घटना लिटान पुलिस स्टेशन से महज 5 किलोमीटर दूर शंघाई गांव में हुई। तंगखुल नागा नागरिक संगठनों का दावा है कि बंधकों में महिलाओं और बुजुर्गों समेत 20 से अधिक लोग शामिल हैं।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार निर्दोष नागरिकों की सुरक्षित और बिना शर्त रिहाई के लिए गंभीर है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने और शांति बहाली के निर्देश दिए हैं।
दोनों पक्षों के अपने दावे
तंगखुल नागा लॉन्ग (टीएनएल) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कुकी समूहों द्वारा नागरिकों को बंधक बनाने की कड़ी निंदा की है। दूसरी ओर शंघाई ग्राम प्राधिकरण ने आरोप लगाया कि तंगखुल स्वयंसेवकों ने खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों पर गोलीबारी की थी, जिसके बाद बचाव में इन लोगों को रोका गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके समुदाय के दो लोग लापता हैं। बता दें, फरवरी में लिटान सरेइखोंग में हुई जातीय हिंसा में 30 से अधिक घर जला दिए गए थे, जिसके बाद से क्षेत्र में पहले ही तनाव बना हुआ था। पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है।