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Manipur Violence: सुरक्षा बलों के इस्तेमाल की जाने वाली दो बसों में भीड़ ने लगाई आग, कोई जनहानि नहीं

Wed, 26 Jul 2023 10:52 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 26 Jul 2023 10:52 AM IST
सार

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि घटना उस समय की है, जब बसें मंगलवार शाम दीमापुर से आ रही थीं। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच लगातार हिंसा बढ़ रही है। हिंसा कर रहे लोगों के एक समूह ने मणिपुर की बसों को सपोरमीना में रोक दिया। 
 

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Manipur mob torches 2 buses used by security forces; no casualty
जली हुई बस। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। जैसे ही सरकार और आम लोगों को लगता है कि तनाव शांत हो गया है। वैसे ही फिर एक और घटना सामने आ जाती है। अब मणिपुर के कांगपोकपी जिले में भीड़ ने सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो बसों में आग लगा दी। इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। 

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अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि घटना उस समय की है, जब बसें मंगलवार शाम दीमापुर से आ रही थीं। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच लगातार हिंसा बढ़ रही है। हिंसा कर रहे लोगों के एक समूह ने मणिपुर की बसों को सपोरमीना में रोक दिया और बस चालक से कहा कि वह देखना चाहते हैं कि दूसरे समुदाय का कोई सदस्य तो नहीं बैठा है। 

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उन्होंने आगे बताया कि तभी भीड़ में से कुछ लोगों ने बसों में आग लगा दी। हालांकि, इस दौरान जनहानि की कोई खबर सामने नहीं आई। 

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मई से ही हालात खराब

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

ऐसे शुरू हुई हिंसा
तनाव की शुरुआत चुराचंदपुर जिले से हुई। ये राजधानी इम्फाल के दक्षिण में करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर है। इस जिले में कुकी आदिवासी ज्यादा हैं। गवर्नमेंट लैंड सर्वे के विरोध में 28 अप्रैल को द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने चुराचंदपुर में आठ घंटे बंद का ऐलान किया था। देखते ही देखते इस बंद ने हिंसक रूप ले लिया। उसी रात तुइबोंग एरिया में उपद्रवियों ने वन विभाग के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। 27-28 अप्रैल की हिंसा में मुख्य तौर पर पुलिस और कुकी आदिवासी आमने-सामने थे।  

इसके ठीक पांचवें दिन यानी तीन मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर ने 'आदिवासी एकता मार्च' निकाला। ये मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने के विरोध में था। यहीं से स्थिति काफी बिगड़ गई। आदिवासियों के इस प्रदर्शन के विरोध में मैतेई समुदाय के लोग खड़े हो गए। लड़ाई के तीन पक्ष हो गए।  

एक तरफ मैतेई समुदाय के लोग थे तो दूसरी ओर कुकी और नागा समुदाय के लोग। देखते ही देखते पूरा प्रदेश इस हिंसा की आग में जलने लगा। चार मई को चुराचंदपुर में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की एक रैली होने वाली थी। पूरी तैयारी हो गई थी, लेकिन रात में ही उपद्रवियों ने टेंट और कार्यक्रम स्थल पर आग लगा दी। सीएम का कार्यक्रम स्थगित हो गया था। 

 

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