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Manipur Violence: 'इंटरनेट सेवा बहाल करने के लिए फिजिकल ट्रायल करे सरकार', मणिपुर हाईकोर्ट का आदेश
Sat, 08 Jul 2023 09:28 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 08 Jul 2023 09:28 PM IST
सार
Manipur Violence: मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अदालत ने मोबाइल फोन के लिए इंटरनेट सेवा प्रदान करने की व्यावहार्यता की जांच करने के लिए भौतिक परीक्षण (फिजिकल ट्रायल) करने का आदेश दिया है।
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Manipur High Court
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अदालत ने मोबाइल फोन के लिए इंटरनेट सेवा प्रदान करने की व्यावहार्यता की जांच करने के लिए भौतिक परीक्षण (फिजिकल ट्रायल) करने का आदेश दिया है। अदालत ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और वह 25 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगी।
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कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति ए बिमोल और न्यायमूर्ति ए गुणेश्वर शर्मा की खंडपीठ ने कहा, फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन के मामले में गृह विभाग की समिति द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों का अनुपालन सुनिश्चित करने के बाद मामला-दर-मामला आधार पर इंटरनेट सेवा प्रदान की जा सकती है।
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12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अदालत को सूचित किया था कि ब्रॉडबैंड कनेक्शन या इंटरनेट लीज्ड लाइन (आईएल) या स्थिर आईपी सुनिश्चित करके एफटीटीएच के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान की जा सकती है। इसने बताया था किसी भी राउटर या सिस्टम से वाईफाई/हॉटस्पॉट पर प्रतिबंध लगाकर, स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया वेबसाइट्स और वीपीएन को अवरुद्ध कर, सिस्टम से वीपीएन सॉफ्टवेयर को हटाकर और किसी भी यूजर्स द्वारा नए सॉफ्टवेयर के इंस्टोलेशन पर प्रतिबंध लगाकर भौतिक निगरानी लागू करनी होगी।
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राज्य सरकार ने उच्च अधिकारियों को इंटरनेट लीज्ड लाइन (आईएलएल) पर प्रतिबंध हटाने पर विचार करने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें अधिकतम गति दस एमबीपीएस की सीमा तय की गई थी, जो अफवाहों के अवैध प्रसार और पोस्ट में शामिल न होने के लिए इच्छित/मौजूदा ग्राहकों से प्राप्त शपथ पत्र के अधीन था।