मणिपुर में नए मुख्यमंत्री से उम्मीदें: जातीय तनाव के बाद शांति व विकास की राह, जमीनी मोर्चे पर सरकार सक्रिय
पूर्वोत्तर के संवेदनशील राज्य मणिपुर में ढाई साल के जातीय तनाव और राष्ट्रपति शासन के बाद पॉपुलर सरकार की वापसी हुई है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में राज्य शांति और विकास की राह पर लौटने की उम्मीद जग रही है। नई सरकार ने जिलों और संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा शुरू किया है और आम लोगों से संवाद कर सकारात्मक माहौल बनाया है।
विस्तार
पूर्वोत्तर के संवेदनशील राज्य मणिपुर में करीब ढाई वर्षों तक चले जातीय तनाव और उसके बाद लागू राष्ट्रपति शासन के दौर के पश्चात दस दिन पहले पॉपुलर सरकार की वापसी हुई है। नई सरकार के गठन के साथ ही राजनीतिक हलकों से लेकर आम नागरिकों तक उम्मीदों का माहौल दिखाई दे रहा है। इंफाल में टेक्सी ड्राइवर हो या फिर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, हर किसी को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से बहुत उम्मीदें हैं। कहते हैं पूरा विश्वास है कि सिंह के नेतृत्व में राज्य एक बार फिर शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने पदभार संभालते ही जिलों,राहत शिविरों और संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। प्रशासनिक बैठकों के साथ-साथ आम लोगों से सीधा संवाद भी स्थापित कर रहे हैं। लंबे समय तक अस्थिरता झेल चुके राज्य में इसे सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अमर उजाला के रिपोर्टर एन. अर्जुन ने राजधानी इंफाल और आसपास के इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।
जमीनी मोर्चे पर सक्रिय सरकार
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह और डिप्टी सीएम लोसी दिखो पदभार संभालने के बाद सेलगातार सक्रिय हैं। दोनों नेता ताबड़तोड़ बैठकों के जरिए प्रशासनिक तंत्र को गति देने में जुटे हैं। आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री लगातार जनता से मुलाकात कर रहे हैं और प्रमुख विकास परियोजनाओं का स्थल पर जाकर निरीक्षण भी कर रहे हैं। उन्होंने इंफाल नदी पर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर,डिप्टी सीएम लोसी दिखो ने शांति बहाली के प्रयासों के तहत चुराचांदपुर का दौरा कर स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों से संवाद किया। सरकार का फोकस प्रशासनिक सक्रियता के साथ-साथ भरोसा बहाली पर भी है।
'पुनर्वास और बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम हो'
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राधा कुमार सिंह कांगजम का कहना है कि राज्य ने बहुत कठिन समय देखा है। नई सरकार से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। दोनों पक्षों से जो लोग विस्थापित हुए हैं, उनका पुनर्वास प्राथमिकता होनी चाहिए। सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं पर तेज़ी से काम हो, ताकि पहाड़ और घाटी के बीच की दूरी कम हो और सामाजिक एकता मजबूत बने। वे कहते हैं कि सरकार के पास सीमित समय है और उसे तेज़ और ठोस परिणाम देने होंगे।
'अनुभवी नेतृत्व से समाधान की उम्मीद'
स्थानीय युवा श्यामानंद का कहना है, “मुख्यमंत्री अनुभवी और सुलझे हुए नेता हैं। हमने अपने क्षेत्र में उनका काम देखा है। हमें भरोसा है कि वे मौजूदा हालात का समाधान निकालेंगे और मणिपुर को फिर से शांत राज्य बनाएंगे।
सुलभ और सक्रिय नेतृत्व
सिंजमोई विधानसभा क्षेत्र के निवास प्रोफेसर राज कुमार मोबी सिंह कहते हैं, वे मेहनती और सहज उपलब्ध रहने वाले नेता हैं। इंफाल की खराब सड़कों पर उन्होंने पद संभालते ही काम शुरू कर दिया। पिछले वर्षों में जो माहौल बना,उसे सुधारने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं।
जो कहते हैं, पूरा करते हैं
स्थानीय निवासी ऋषिकेश शर्मा का कहना है, मुख्यमंत्री बनने के बाद से वे लगातार क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी पहुंचे। लोगों को भरोसा है कि वे जो कहते हैं, उसे पूरा करेंगे।
हमें विकास चाहिए, सीएम पर पूरा भरोसा
इंफाल एअर पोर्ट से बाहर निकलने पर कार के ड्राइवर रजक कहते हैं, हम बम पांगल समुदाय से हैं। हिंदी भले ही कम जानते हों, लेकिन मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह पर हमें पूरा भरोसा है। हमें विकास चाहिए। हमें उम्मीद है कि वे सभी समुदायों को साथ लेकर चलेंगे और राज्य को आगे बढ़ाएंगे।
विकास और एकता की राह पर उम्मीदें
वरिष्ठ लेखक रामेश्वर कहते हैं, करीब ढाई वर्षों के तनाव और राष्ट्रपति शासन के बाद बनी इस नई पॉपुलर सरकार से लोगों की अपेक्षाएं स्पष्ट हैं, शांति की बहाली, विस्थापितों की सम्मानजनक वापसी, आधारभूत ढांचे का विस्तार और सामुदायिक सौहार्द की पुनर्स्थापना। नई सरकार की शुरुआती सक्रियता ने उम्मीद जगाई है कि मणिपुर अब विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। हालांकि, जनता की निगाहें अब ठोस और स्थायी परिणामों पर टिकी हैं।
उखरूल में तनाव के बीच स्कूल से निकालकर दूसरे जिले भेजे गए 51 कुकी छात्र
मणिपुर पुलिस ने नगा बहुल उखरुल जिले के एक स्कूल से 51 कुकी छात्रों को निकाल कर सुरक्षित दूसरे जिले के एक स्कूल पहुंचा दिया है। उखरूल में दो समुदायों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने एहतियाती तौर पर यह कदम उठाया है। यहां तंगखुल नगा जनजाति और कुकी लोगों के बीच एक सप्ताह से अधिक समय से तनाव जारी है। पुलिस ने एक बयान में कहा गया कि जवाहर नवोदय विद्यालय रामवा स्कूल के 51 छात्रों को सुरक्षित निकाला और उन्हें सैकुल पुलिस को सौंप दिया गया ताकि उन्हें कांगपोकपी जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय में भेजा सके। 51 छात्रों में से 31 लड़के और 20 लड़कियां कांगपोकपी भेजी गईं, जो कुकी बहुल जिला है।
पुलिस ने बताया कि छात्रों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया के दौरान, कुछ लोगों ने उन्हें उपद्रवी समझ लिया। उन्हें समझाने-बुझाने के बाद ही छात्रों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित हुई। पुलिस ने सभी समुदायों से संयम बनाए रखने और अफवाहें न फैलाने की अपील की। उखरूल के लिटन सारेखोंग इलाके में 7 फरवरी की शाम कुकी और नगा समुदायों के बीच नशे में हिंसक झड़प हो गई थी, जिसके बाद लगभग 30 घर जला दिए गए थे।