Manipur: मणिपुर में शाह के 'एक्शन' पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, लूटे हथियारों की वापसी की चेतावनी को बताया बेअसर
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विस्तार
मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर कांग्रेस पार्टी की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई बातों का खुलासा किया है। इस टीम ने मणिपुर में अमित शाह के 'एक्शन' पर सवाल उठाया है। लूटे गए हथियारों और गोला बारूद की खराब बरामदगी, इसका एक सबूत है। मणिपुर में गृह मंत्री की चेतावनी के बावजूद लूटे गए हथियारों की वापसी की रफ्तार बहुत धीमी है। राज्य में 15 जून तक इंटरनेट पर पाबंदी, यह आदेश दर्शाता है कि वहां स्थिति अभी ठीक नहीं है। हिंसा में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं। इसके अलावा 349 राहत कैंपों में 50,000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि मणिपुर में हो रही हिंसा पर प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जल्द से जल्द वहां का दौरा करना चाहिए, ताकि लोगों का प्रशासन में विश्वास बहाल करने और राज्य को दोबारा से सामान्य स्थिति में लाने के लिए सभी प्रयास किए जा सकें।
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गृह मंत्री के दौरे के बाद भी हिंसा जारी
सोमवार को कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश, मुकुल वासनिक और पार्टी की मणिपुर, मिजोरम व बिहार इकाई के इंचार्ज भक्त चरण दास ने कहा, मणिपुर में तीन मई से जो हिंसा शुरू हुई थी, उसे रोकने और वहां के समुदायों का सरकार के प्रति विश्वास बहाल करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन दिवसीय दौरा किया था। गृह मंत्री ने स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए वहां कई उपायों की घोषणा की थी। उसके दो सप्ताह बाद भी राज्य जल रहा है। मणिपुर के उन सभी परिधीय क्षेत्रों में हिंसा और आगजनी जारी है, जहां जातीय हिंसा से प्रभावित दो समुदाय रहते हैं। कई जिलों में क्रॉस फायरिंग हो रही है। आवश्यक वस्तुओं की अनुपलब्धता का गंभीर संकट हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 2 और 37 अभी भी अवरुद्ध हैं। 349 राहत शिविरों में लगभग 50,000 विस्थापित लोगों को ठहराया गया है। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या एक लाख से अधिक है। आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 100 से ज्यादा है।
गृह मंत्री की अपील का असर
एक जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मणिपुर से दिल्ली लौट गए थे। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि पुलिस स्टेशन या दूसरी जगहों से जो भी हथियार लूटे गए हैं, उन्हें वापस जमा करा दें। इसके बाद सख्त कार्रवाई होगी। उनकी अपील के दूसरे ही दिन बताया कि मणिपुर में लूटे गए 140 हथियार जमा कराए गए हैं। वहां पर कुल छह हजार से ज्यादा हथियार लूटे गए थे। सात जून को 57 हथियार जमा होने की बात कही गई। इस तिथि तक कुल 868 लूटे गए हथियारों की वापसी हुई। गत शुक्रवार तक लूटे गए हथियारों की बरामदगी का आंकड़ा 953 तक पहुंच गया था।
इंटरनेट पर प्रतिबंध 15 जून तक बढ़ाया
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कई लोग अभी भी लापता हैं। उनके ठिकाने का कोई पता नहीं है। कई मृतक अभी भी सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में हैं। उनके शव संबंधित परिवारों को नहीं सौंपे गए हैं। इंटरनेट पर प्रतिबंध 15 जून तक बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई से मणिपुर के लोगों में विश्वास पैदा नहीं हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री की कड़ी चेतावनी के बावजूद हथियारों और गोला बारूद की खराब बरामदगी इसका सबूत है। कांग्रेस नेताओं ने कहा, मणिपुर की हिंसा एक बड़ा एवं गंभीर जातीय संघर्ष है। प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते पार्टी के पीसीसी अध्यक्ष और सीएलपी नेता के नेतृत्व में 4 मई को एक प्रतिनिधिमंडल ने मणिपुर में राज्यपाल से मुलाकात की थी। इन नेताओं ने मणिपुर में सामान्य स्थिति लाने के लिए भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। इसके बाद 9 मई व 10 मई को एआईसीसी प्रभारी मणिपुर, भक्त चरण दास ने वहां का दौरा किया।
तीन सदस्यीय तथ्यान्वेषी दल का गठन
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष ने मणिपुर में हुई व्यापक हिंसा के कारणों का पता लगाने के लिए 17 मई को तीन सदस्यीय तथ्यान्वेषी दल का गठन किया था। फैक्ट फाइंडिंग टीम में मुकुल वासनिक, डॉ. अजय कुमार और सुदीप रॉय बर्मन शामिल थे। हालांकि प्रशासन द्वारा इस टीम को इंफाल में स्थित कांग्रेस पार्टी कार्यालय तक सीमित कर दिया गया। इसके बाद 30 मई को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता (राज्य सभा) के नेतृत्व में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 12 मांगों के साथ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार से दो सवाल किए हैं। पहला, 'मन की बात' के 100वें एपिसोड के बाद से प्रधानमंत्री ने मणिपुर के बारे में कुछ भी क्यों नहीं कहा। मणिपुर की बात का क्या हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री की 30 मई, 2023 को 15 दिनों की शांति की अपील पूरी तरह विफल क्यों हो गई। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जल्द से जल्द मणिपुर का दौरा करना चाहिए, ताकि प्रशासन में विश्वास बहाल करने और राज्य में सामान्य स्थिति लाने के लिए सभी प्रयास किए जा सकें। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और सभी हितधारकों से मिलने के लिए एक राष्ट्रीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।