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मणिपुर सीएम बोले: हटाना चाहते हैं AFSPA कानून, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता, इसलिए केंद्र की सहमति से उठाएंगे कदम

Sun, 23 Jan 2022 09:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 23 Jan 2022 09:30 PM IST
सार

मणिपुर में फरवरी में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। बीरेन सिंह राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव बड़े बदलाव को प्रदर्शित करेंगे और उनकी पार्टी अपनी सीटों की संख्या दोगुनी करेगी। 

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Manipur CM Biren Singh AFSPA lifted but with Centre mutual consent National security first priority amid crisis in Myanmar
मणिपुर के सीएम एम बीरेन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : Social Media

विस्तार

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को कहा कि वह राज्य से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफ्सपा) हटाए जाने के पक्ष में हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में सावधानी बरतते हुए कहा कि चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है, इसलिए वे इस कानून को केंद्र के साथ सहयोग कर कानून हटवाना चाहते हैं।
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सीएम बीरेन सिंह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अफ्सपा को केंद्र की सहमति से चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है। लेकिन, हमें यह जरूर याद रखना चाहिए कि म्यांमार में राजनीतिक स्थिरता नहीं है और उसके साथ हमारे देश की सीमा भी लगी हुई है।’’ 
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'मणिपुर में शांति और विकास मुख्य चुनावी मुद्दा'
मणिपुर में फरवरी में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। बीरेन सिंह राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव बड़े बदलाव को प्रदर्शित करेंगे और उनकी पार्टी अपनी सीटों की संख्या दोगुनी करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारा कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर चुनाव के बाद भी गठबंधन किया जा सकता है।’’ उन्होंने इस बार शांति, विकास और सौहार्द्रपूर्ण सह-अस्तित्व को भाजपा का मुख्य चुनावी मुद्दा बताते हुए यह बात कही।
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कांग्रेस की सीटें ज्यादा, पर सरकार बनाने में सफल हुई थी भाजपा
मणिपुर में कांग्रेस के 28 विधायक होने के बावजूद अपने महज 21 विधायकों के साथ भाजपा ने दो स्थानीय दलों, एनपीपी और एनपीएफ के सहयोग से 2017 में सरकार बनाई थी। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में, 27 फरवरी और तीन मार्च को चुनाव होने हैं।

नगालैंड में 14 लोगों की मौत के बाद गरमाया अफ्सपा का मुद्दा
पूर्वोत्तर के राज्यों में अफ्सपा हटाने की मांग को लेकर कई आंदोलन हुए हैं। मणिपुर में इरोम शर्मिला का इस कानून के खिलाफ सालों लंबा अनशन भी पूरी दुनिया में छाया रहा था। मणिपुर के पड़ोसी राज्य नगालैंड में सैन्य कर्मियों की गोलीबारी में 14 आम लोगों के मारे जाने के बाद पूरे पूर्वोत्तर में अफ्सपा हटाने की मांग एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी है। माना जा रहा है कि यह एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

'अफ्सपा हटाने के लिए केंद्र से चर्चा जरूरी'
इस पर बीरेन सिंह ने कहा, ‘‘हम एक सीमावर्ती राज्य हैं और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। मुझे राष्ट्रहित को भी देखना होगा। लेकिन एक मणिपुरी होने और मणिपुर का मुख्यमंत्री होने के नाते, मैं चाहता हूं कि अफ्सपा हटा दिया जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन साथ ही, जमीनी हकीकत का आकलन किये बगैर ऐसा करना संभव नहीं है। केंद्र सरकार से सलाह-मशविरा किए बिना यह मुमकिन नहीं है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘मेरे साथ मणिपुर के लोग चाहते हैं कि अफ्सपा को हटा दिया जाए लेकिन केंद्र सरकार की सहमति के बाद, क्योंकि राष्ट्र की सुरक्षा हमारे लिए पहली प्राथमिकता है। ’’ सिंह ने कहा कि पिछले पांच साल में राज्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई है और उग्रवाद 90 फीसदी तक घट गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर सरकार म्यांमार में मणिपुरी उग्रवादियों के साथ सार्थक वार्ता करने की भी कोशिश कर रही है। ’’
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