अय्यर की कांग्रेस ऑफिस में एंट्री पर सिद्धू बोले- हमारे जनरल राहुल गांधी करेंगे फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसी के साथ उन्हें लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि पार्टी ऑफिस में देखे जाने के बाद एक बार फिर वह चर्चा में आ गए हैं और माना ये जा रहा है कि पार्टी उनका निलंबन वापस ले सकती है।
मणिशंकर अय्यर के कांग्रेस ऑफिस में देखे जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में लग रही अटकलों के बीच, पूर्व क्रिकेटर और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने भी मजाकिया बयान दे दिया है। उन्होंने कहा, "शतरंज की बिसात बिछी हो और प्यादा अपनी औकात भूल जाए तो कुचला जाता है। ये हमारे जनरल राहुल गांधी के ऊपर है कि वह अय्यर के लिए क्या फैसला लेते हैं। उनका जो फैसला होगा वही हमारा और पार्टी का फैसला होगा।"
मणिशंकर अय्यर ने गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादास्पद बयान दिया था जिसके बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। कांग्रेस की तरफ से कहा गया था कि मणिशंकर अय्यर को पार्टी की तरफ से बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
Shatranj ki bisaat bichhi ho aur pyaada apni aukaat bhool jaaye toh kuchla jaat hai. Ye hamare General Rahul Ji ke upar hai, wo jo faisla karenge wo hamara faisla hai: Navjot Singh Sidhu, Congress on Mani Shankar Aiyar seen at All India Congress Committee office in Delhi y'day pic.twitter.com/cKcpmaMIkq
— ANI (@ANI) February 24, 2018
अय्यर के निलंबन की जानकारी अभिषेक मनु सिंघवी ने दी थी
Mani Shankar Aiyar was seen at All India Congress Committee office in Delhi yesterday. He was suspended from the Congress for his controversial remarks against Prime Minister Narendra Modi. pic.twitter.com/Rt9BhudeOr
— ANI (@ANI) February 24, 2018
13 फरवरी को कराची साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने के दौरान 76 वर्षीय अय्यर का पाकिस्तान प्यार जाग गया था और वहां भी उन्होंने भारत को लेकर बयान दिया था जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। उन्होंने भारत पाकिस्तान मसले पर बातचीत को ही आधार बताया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अपनी इस नीति पर अडिग है, इसका उन्हें गर्व है लेकिन भारत सरकार इस नीति का पालन नहीं कर रही है, इसका उन्हें दुख है।