फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   mangalyaan-designed-for-6-months-but-still-working-after-34-months

ISRO का चमत्कार: अवधि खत्म होने के बाद भी 3 साल से मंगलग्रह के चक्कर लगा रहा है मंगलयान

Mon, 31 Jul 2017 08:31 AM IST
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार
amarujala.com- presented by: अरविंद कुमार Updated Mon, 31 Jul 2017 08:31 AM IST
विज्ञापन
mangalyaan-designed-for-6-months-but-still-working-after-34-months
Mission Mars
अंतरिक्ष की दुनिया में इसरों नई बुलंदियों को छू रहा है और इस कड़ी में इतिहास में भारत अपनी एक नई पहचान छोड़ने जा रहा है। जानकर सबको हैरानी होगी लेकिन ये सच है कि छह महीने के मिशन पर भेजा गया मंगलयान आज भी उचित तरीके से काम कर रहा है।
विज्ञापन


ये मंगलयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को लगातार मंगल ग्रह की तस्वीरें और डेटा भेज रहा है जिससे भारतीय वैज्ञानिक बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। बता दें कि ये मंगलयान आज से 3 साल पहले भेजा गया था।  
विज्ञापन

 
वहीं, इसरो के वैज्ञानिक इस मंगलयान को 'महायान' कहते नहीं थक रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि छह महीने पहले ही इसकी अवधि खत्म हो चुकी है लेकिन आज 34 महीनों के बाद भी ये रोजाना मंगल ग्रह के महत्वपूर्ण जगह की तस्वीरें और डेटा भेज रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

mangalyaan-designed-for-6-months-but-still-working-after-34-months
Mission Mars

​इतना ही नहीं भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे भारत के अंतरिक्ष इतिहास में सबसे बड़ा मिशन करार दिया और कहा कि इस मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) का प्रदर्शन अंतरिक्ष विज्ञानियों को खुश कर देने वाला है।

बता दें कि 5 नवंबर 2013 को मंगलयान को मंगल ग्रह में भेजा गया था और 24 सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में पहुंचकर इसने भारतीय अंतरिक्ष में एक इतिहास कायम किया था। 24 मार्च 2015 को इसकी 6 महिने की अवधि पूरी हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, भारत ही ऐसा पहला देश है जो पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह में मंगलयान भेजने में सफल साबित हुआ है।

भारत के इस मिशन में 450 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसका उद्देश्य मंगल की सतह, वहां की घाटियों, पर्वतों, बादलों और वहां उठने वाले धूल भरे तूफानों की शानदार तस्वीरें तथा डेटा मुहैया कराना है।

मंगलयान लगभग तीन दिन में मंगल की कक्षा का एक चक्कर पूरा करता है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए मंगलयान अपने साथ 5 पेलोड लेकर गया था जिनमें मार्स कलर कैमरा (एमसीसी), मीथेन सेंसर फॉर मार्स (एमएसएम), लाइमैन अल्फा फोटोमीटर (एलएपी), मार्स एक्सोस्फेयरिक न्यूट्रल कंपोजीशन एनालाइजर (एमईएनसीए) और थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (टीआईएस) शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed