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दिल्ली में भूख से मौत: चश्मदीद ने बताया, मौत के दो दिन पहले सामान्य थी बड़ी बेटी मानसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 Jul 2018 08:58 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में तीन मासूम बच्चियों की भूख से तड़पकर हुई मौत से लोग हतप्रभ हैं। मृतक बच्ची से उसकी मौत से ठीक दो दिन पहले मिले एक व्यक्ति ने बताया है कि बच्चों की हालत इतनी खराब नहीं थी कि इस तरह उनकी मौत हो जाए, खासकर यह देखते हुए कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि बच्चियों ने पिछले तीन-चार दिन से कुछ भी नहीं खाया था।
मृतक बच्चियों के पिता मंगल के साकेत ब्लॉक स्थित पुराने मकान के ठीक सामने रहने वाले इमरान ने बताया कि बच्चों की सेहत सामान्य थी। खासकर बड़ी बेटी मानसी (8) पूरी तरह स्वस्थ थी। उनके मुताबिक शनिवार को अपना मकान छोड़ने के पहले ही सरकारी नल से पानी भरा था। वह पूरी तरह से सामान्य दिख रही थी। कबाड़ का काम करने वाले इमरान ने बताया कि मानसी ने उसी दिन सुबह उनके पास आकर 10 रुपये की बोतलें बेची थी। बच्ची पूरी तरह से सामान्य दिख रही थी।
इमरान के मुताबिक उसके पिता ने भी उसी दिन उनके पास 170 रुपये का कबाड़ बेचा था। उसने सहारा कंपनी से लगभग 700 रुपये प्रतिमाह का रिकरिंग डिपॉजिट भी करा रखा था। ऐसे में यह बात उनके गले नहीं उतरती कि मंगल के पास खाने के लिए भी पैसे नहीं थे।
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वहीं मंगल के परिवार को पुराने मकान से निकाले जाने के बाद अपने पास जगह देने वाले नारायण की भी स्थिति इतनी खराब नहीं थी कि वह बच्चों को दो दिन खाना न खिला सकता। ऐसे में यह बात पूरी तरह अबूझ पहेली बनी हुई है कि वाकई में सोमवार की रात को क्या हुआ था। यह मंगल के सामने आने के बाद ही पता चल पाएगा जो घटना के दिन से ही लापता है।
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मृतक बच्चियों के पिता मंगल के साकेत ब्लॉक स्थित पुराने मकान के ठीक सामने रहने वाले इमरान ने बताया कि बच्चों की सेहत सामान्य थी। खासकर बड़ी बेटी मानसी (8) पूरी तरह स्वस्थ थी। उनके मुताबिक शनिवार को अपना मकान छोड़ने के पहले ही सरकारी नल से पानी भरा था। वह पूरी तरह से सामान्य दिख रही थी। कबाड़ का काम करने वाले इमरान ने बताया कि मानसी ने उसी दिन सुबह उनके पास आकर 10 रुपये की बोतलें बेची थी। बच्ची पूरी तरह से सामान्य दिख रही थी।
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इमरान के मुताबिक उसके पिता ने भी उसी दिन उनके पास 170 रुपये का कबाड़ बेचा था। उसने सहारा कंपनी से लगभग 700 रुपये प्रतिमाह का रिकरिंग डिपॉजिट भी करा रखा था। ऐसे में यह बात उनके गले नहीं उतरती कि मंगल के पास खाने के लिए भी पैसे नहीं थे।
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वहीं मंगल के परिवार को पुराने मकान से निकाले जाने के बाद अपने पास जगह देने वाले नारायण की भी स्थिति इतनी खराब नहीं थी कि वह बच्चों को दो दिन खाना न खिला सकता। ऐसे में यह बात पूरी तरह अबूझ पहेली बनी हुई है कि वाकई में सोमवार की रात को क्या हुआ था। यह मंगल के सामने आने के बाद ही पता चल पाएगा जो घटना के दिन से ही लापता है।