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Kerala: '42 घंटे में मेरे हाथ-पैरों ने काम करना किया बंद', लिफ्ट में फंसे रहने के दौरान शख्स ने लिखी आपबीती
Tue, 16 Jul 2024 07:16 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 16 Jul 2024 07:16 PM IST
सार
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक सरकारी अस्पताल की लिफ्ट में दो दिन तक फंसे रहने के बाद 59 वर्षीय मरीज की स्थिति इलाज के बाद अब सामान्य है। वहीं मरीज ने बताया है कि लिफ्ट में फंसे रहने के दौरान उसने अपने परिवार के लिए संदेश भी लिखा था।
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केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज (फाइल तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
तिरुवनंतपुरम में एक बड़े सरकारी अस्पताल की लिफ्ट में 42 घंटे तक फंसे रहने वाले शख्स रवींद्रन नायर की स्थिति अब सामान्य हो रही है। वहीं उसने अपने 42 घंटे के मुश्किल भरे वक्त के बारे में बताया कि वहां फंसे रहने के दौरान उन्होंने अपने परिवार के लिए एक नोट लिखा था और उसे अपने बैग में रख लिया था। बता दें कि रवींद्रन नायर शनिवार को सरकारी अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग की ओर जा रहे थे कि इस दौरान अचानक से लिफ्ट नीचे जाकर बंद हो गई। जिससे वो करीब दो दिन तक उसी लिफ्ट में फंसे रहे थे। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक पानी के बिना सीमित स्थान में रहने के कारण उनके हाथ और पैर काम करना बंद कर रहे थे।
'मैंने लिफ्ट से भागने का हर संभव प्रयास किया'
लिफ्ट में फंसने के बाद वहां से निकलने के प्रयासों के बारे में बताते हुए रवींद्रन नायर ने बताया, कि मैंने लिफ्ट से भागने का हर संभव प्रयास किया। मैंने लिफ्ट के दरवाजे खोलने की कोशिश की। और जब मैंने इसे खोला, तो मुझे केवल दीवारें दिखाई दे रही थीं। हताशा में मैंने लिफ्ट की दीवार को जोर से धक्का भी दिया। मेरे पास पीने के लिए पानी नहीं था, लेकिन मेरे पास कुछ कविताएं थीं जो मैंने लिखी थीं, जो मेरे बैग में थीं।
पीड़ित ने अपने परिवार के लिए लिखा था संदेश
पीड़ित रवींद्रन नायर ने आगे बताया कि उसने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च की मदद से अपने परिवार के लिए संदेश लिखा। जिसमें उन्होंने लिखा "मैं हिलने में असमर्थ था; मेरे हाथ और पैर काम करना बंद करने लगे थे, और मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि बाहर समय क्या हो गया है। उन्होंने कहा कि मुझे इस दौरान सबसे चिंता थी कि अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। रवींद्रन नायर ने आगे बताया कि जब सोमवार के दिन लिफ्ट ऑपरेटर ने अपनी ड्यूटी शुरू की और लिफ्ट के दरवाजे को खोला तो वो उन्हें भगवान के दूत के रूप में दिखा।
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मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
बता दें कि सरकारी अस्पताल के लिफ्ट में दो दिन तक रवींद्रन नायर के फंसे रहने की घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है। इस मामले में केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने मंगलवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक से एक रिपोर्ट मांगी कि कैसे एक मरीज 42 घंटे तक अस्पताल की लिफ्ट में फंसा रह सकता है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले में केएसएचआरसी के कार्यवाहक अध्यक्ष और न्यायिक सदस्य के. बिजुनाथ ने अधीक्षक को 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने और यह बताने का निर्देश दिया कि किसकी लापरवाही के कारण यह हुआ। वहीं केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज की तरफ से मंगलवार को अस्पताल में पीड़ित से मिलने के कुछ घंटों बाद, मानवाधिकार आयोग ने मामले में हस्तक्षेप किया है।
पीड़ित को केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ित और उनके परिवार को ये आश्वासन दिया कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जबकि मंत्री के कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि उन्होंने पीड़ित की स्थिति के बारे में पूछताछ की है और डॉक्टरों ने बताया है कि यह संतोषजनक है। वहीं रवींद्रन नायर ने स्वास्थ्य मंत्री के उससे मुलाकात करने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें बहुत राहत मिली है।
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'मैंने लिफ्ट से भागने का हर संभव प्रयास किया'
लिफ्ट में फंसने के बाद वहां से निकलने के प्रयासों के बारे में बताते हुए रवींद्रन नायर ने बताया, कि मैंने लिफ्ट से भागने का हर संभव प्रयास किया। मैंने लिफ्ट के दरवाजे खोलने की कोशिश की। और जब मैंने इसे खोला, तो मुझे केवल दीवारें दिखाई दे रही थीं। हताशा में मैंने लिफ्ट की दीवार को जोर से धक्का भी दिया। मेरे पास पीने के लिए पानी नहीं था, लेकिन मेरे पास कुछ कविताएं थीं जो मैंने लिखी थीं, जो मेरे बैग में थीं।
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पीड़ित ने अपने परिवार के लिए लिखा था संदेश
पीड़ित रवींद्रन नायर ने आगे बताया कि उसने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च की मदद से अपने परिवार के लिए संदेश लिखा। जिसमें उन्होंने लिखा "मैं हिलने में असमर्थ था; मेरे हाथ और पैर काम करना बंद करने लगे थे, और मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि बाहर समय क्या हो गया है। उन्होंने कहा कि मुझे इस दौरान सबसे चिंता थी कि अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। रवींद्रन नायर ने आगे बताया कि जब सोमवार के दिन लिफ्ट ऑपरेटर ने अपनी ड्यूटी शुरू की और लिफ्ट के दरवाजे को खोला तो वो उन्हें भगवान के दूत के रूप में दिखा।
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मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
बता दें कि सरकारी अस्पताल के लिफ्ट में दो दिन तक रवींद्रन नायर के फंसे रहने की घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है। इस मामले में केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने मंगलवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक से एक रिपोर्ट मांगी कि कैसे एक मरीज 42 घंटे तक अस्पताल की लिफ्ट में फंसा रह सकता है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले में केएसएचआरसी के कार्यवाहक अध्यक्ष और न्यायिक सदस्य के. बिजुनाथ ने अधीक्षक को 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने और यह बताने का निर्देश दिया कि किसकी लापरवाही के कारण यह हुआ। वहीं केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज की तरफ से मंगलवार को अस्पताल में पीड़ित से मिलने के कुछ घंटों बाद, मानवाधिकार आयोग ने मामले में हस्तक्षेप किया है।
पीड़ित को केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ित और उनके परिवार को ये आश्वासन दिया कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जबकि मंत्री के कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि उन्होंने पीड़ित की स्थिति के बारे में पूछताछ की है और डॉक्टरों ने बताया है कि यह संतोषजनक है। वहीं रवींद्रन नायर ने स्वास्थ्य मंत्री के उससे मुलाकात करने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें बहुत राहत मिली है।