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भवानीपुर में महासंग्राम: सीएम ममता के गढ़ में सुवेंदु की ललकार, 2 अप्रैल को करेंगे नामांकन, 'दीदी' भी तैयार
Tue, 31 Mar 2026 05:20 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 31 Mar 2026 05:20 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में भवानीपुर सीट पर राज्य का सबसे बड़ा सियासी मुकाबला होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ में इस बार भाजपा ने उनके धुर विरोधी सुवेंदु अधिकारी को चुनावी मैदान में उतारा है। सुवेंदु 2 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करेंगे। वहीं, ममता बनर्जी 8 अप्रैल को अपने अंदाज में नामांकन दाखिल करेंगी।
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सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है। इस बार कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट एक ऐसे सियासी रणक्षेत्र में तब्दील होने जा रही है, जिसकी धमक पूरे देश में सुनाई देगी। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की शुरुआत 2 अप्रैल को होगी। कयास लगाया जा रहा है कि इस दिन भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी यहां से अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
इस दौरान पार्टी की ओर से शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी है। सुवेंदु अधिकारी के इस जुलूस में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होकर माहौल को गरमाएंगे। भाजपा की रणनीति ममता बनर्जी को उन्हीं के घर में घेरने की है।
8 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगी ममता बनर्जी
हालांकि, 'दीदी' भी पीछे रहने वाली नहीं हैं। सुवेंदु के ठीक छह दिन बाद यानी 8 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नामांकन पर्चा दाखिल करेंगी। इस दौरान 'दीदी' अपने कालीघाट स्थित आवास से पैदल ही पर्चा भरने के लिए निकलेंगी। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व होगा, जो दशकों से हर सियासी तूफान में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा है। महज एक हफ्ते के भीतर निकलने वाले ये दो रोड शो तय कर देंगे कि भवानीपुर सूबे का सबसे बड़ा राजनीतिक कुरुक्षेत्र बन चुका है।
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नंदीग्राम का बदला लेने के लिए तैयार सीएम ममता?
ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर सीट उनका 'सियासी मायका' है। वर्ष 2011 में जब वह पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं, तब इसी सीट ने उन्हें विधानसभा भेजा था। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें मात दी। फिर, इसी भवानीपुर ने उपचुनाव में दीदी को रिकॉर्ड मतों से जिताकर कुर्सी तक पहुंचाया।
इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सियासी जंग अब ममता के घर तक आ पहुंची है। भाजपा ने ममता के खिलाफ उन्हीं के पुराने सिपहसालार सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतार दिया है। यह राजनीतिक लड़ाई 2021 के नंदीग्राम चुनाव का 'पार्ट-2' जैसा है। फर्क सिर्फ इतना है कि नंदीग्राम में ममता बनर्जी, सुवेंदु के इलाके में गई थीं। इस बार सुवेंदु अधिकारी ममता के सबसे मजबूत किले में दाखिल होने की कोशिश में हैं।
यह भी पढ़ें: Assembly Elections: भाजपा ने असम में झोंकी पूरी ताकत; रक्षा मंत्री-CM फडणवीस समेत कई दिग्गजों ने किया प्रचार
मतदाता सूची का 'एक्स-फैक्टर'
भवानीपुर का सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प है। यहां उच्च-मध्यम वर्गीय बंगाली परिवारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में हिंदी भाषी व्यापारी, गुजराती, सिख, अल्पसंख्यक परिवार रहते हैं। टीएमसी हमेशा से यहां महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अपने मजबूत स्थानीय नेटवर्क के दम पर जीतती आई है। लेकिन इस बार भाजपा को लगता है कि गणित बदल चुका है।
इस बदले हुए गणित के पीछे है मतदाता सूची का ताजा संशोधन। आंकड़ों के मुताबिक, भवानीपुर में करीब 47,000 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। वहीं, 14,000 अन्य नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं। 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यह सीट लगभग 58,000 वोटों के अंतर से जीती थी। यानी जितने वोट कटे या अटके हैं, वह जीत के अंतर के बिल्कुल बराबर हैं।
इससे भी बड़ी बात यह है कि जिन 14,000 नामों की जांच चल रही है, उनमें से 56 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम समुदाय से हैं। इस क्षेत्र में उनकी कुल आबादी लगभग 24 फीसदी है। टीएमसी का आरोप है कि जानबूझकर उनके कोर वोटर को निशाना बनाया जा रहा है।
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इस दौरान पार्टी की ओर से शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी है। सुवेंदु अधिकारी के इस जुलूस में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होकर माहौल को गरमाएंगे। भाजपा की रणनीति ममता बनर्जी को उन्हीं के घर में घेरने की है।
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8 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगी ममता बनर्जी
हालांकि, 'दीदी' भी पीछे रहने वाली नहीं हैं। सुवेंदु के ठीक छह दिन बाद यानी 8 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नामांकन पर्चा दाखिल करेंगी। इस दौरान 'दीदी' अपने कालीघाट स्थित आवास से पैदल ही पर्चा भरने के लिए निकलेंगी। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व होगा, जो दशकों से हर सियासी तूफान में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा है। महज एक हफ्ते के भीतर निकलने वाले ये दो रोड शो तय कर देंगे कि भवानीपुर सूबे का सबसे बड़ा राजनीतिक कुरुक्षेत्र बन चुका है।
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नंदीग्राम का बदला लेने के लिए तैयार सीएम ममता?
ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर सीट उनका 'सियासी मायका' है। वर्ष 2011 में जब वह पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं, तब इसी सीट ने उन्हें विधानसभा भेजा था। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें मात दी। फिर, इसी भवानीपुर ने उपचुनाव में दीदी को रिकॉर्ड मतों से जिताकर कुर्सी तक पहुंचाया।
इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सियासी जंग अब ममता के घर तक आ पहुंची है। भाजपा ने ममता के खिलाफ उन्हीं के पुराने सिपहसालार सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतार दिया है। यह राजनीतिक लड़ाई 2021 के नंदीग्राम चुनाव का 'पार्ट-2' जैसा है। फर्क सिर्फ इतना है कि नंदीग्राम में ममता बनर्जी, सुवेंदु के इलाके में गई थीं। इस बार सुवेंदु अधिकारी ममता के सबसे मजबूत किले में दाखिल होने की कोशिश में हैं।
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मतदाता सूची का 'एक्स-फैक्टर'
भवानीपुर का सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प है। यहां उच्च-मध्यम वर्गीय बंगाली परिवारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में हिंदी भाषी व्यापारी, गुजराती, सिख, अल्पसंख्यक परिवार रहते हैं। टीएमसी हमेशा से यहां महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अपने मजबूत स्थानीय नेटवर्क के दम पर जीतती आई है। लेकिन इस बार भाजपा को लगता है कि गणित बदल चुका है।
इस बदले हुए गणित के पीछे है मतदाता सूची का ताजा संशोधन। आंकड़ों के मुताबिक, भवानीपुर में करीब 47,000 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। वहीं, 14,000 अन्य नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं। 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यह सीट लगभग 58,000 वोटों के अंतर से जीती थी। यानी जितने वोट कटे या अटके हैं, वह जीत के अंतर के बिल्कुल बराबर हैं।
इससे भी बड़ी बात यह है कि जिन 14,000 नामों की जांच चल रही है, उनमें से 56 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम समुदाय से हैं। इस क्षेत्र में उनकी कुल आबादी लगभग 24 फीसदी है। टीएमसी का आरोप है कि जानबूझकर उनके कोर वोटर को निशाना बनाया जा रहा है।