तकरार : ममता बनर्जी बोलीं- दीघा में तूफान प्रभावित क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्य सचिव
ममता बनर्जी ने कहा कि चक्रवात यास प्रभावित क्षेत्र दीघा की जिम्मेदारी मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को दी गई है, इसलिए वे अभी कहीं जा नहीं सकते।
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार तना तनी जारी है। इस मामले में जहां केंद्र सरकार एक्शन के मूड में नजर आ रही है तो वहीं ममता बनर्जी ने सोमवार को चक्रवात यास पर एक बार फिर से समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन्होंने साफ-साफ कहा कि चक्रवात यास प्रभावित क्षेत्र दीघा की जिम्मेदारी मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को दी गई है, इसलिए वे अभी कहीं जा नहीं सकते। वहीं उन्होंने मुख्य सचिव के सेवा विस्तार पर कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है, समय आने पर मामले पर जवाब देंगे।
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि तूफान प्रभावित क्षेत्रों में मछुआरों के मुआवजे के बारे में सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गरीब लोग याद रखें कि मैं आप सबके लिए हूं, इसलिए किसी के उकसावे में मत आइए। उन्होंने पीड़ितों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया। ममता ने कहा कि हमें चक्रवात के लिए कोई राहत पैकेज नहीं मिला और न ही हमने इसके लिए कहा।
क्या है मामला
25 मई को, पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र की मंजूरी का हवाला देते हुए एक आदेश जारी किया कि सार्वजनिक सेवा के हित में, अलपन बंद्योपाध्याय की सेवाओं का विस्तार तीन महीने आगे किया जाता है। लेकिन, 28 मई को केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखा कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने बंद्योपाध्याय की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से भारत सरकार के साथ स्थानांतिरत किया है और राज्य सरकार से अनुरोध है कि अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए। डीओपीटी ने मुख्य सचिव को 31 मई को सुबह 10 बजे तक रिपोर्ट करने का निर्देश भी दिया। लेकिन ममता बनर्जी सरकार के मुख्य सचिव कोलकाता में ही मौजूद रहे और देर शाम पश्चिम बंगाल के सचिवालय में बैठक कर रहे थे।
ममता ने कहा- यह आदेश एकतरफा है
ममता ने पत्र में कहा कि कोरोना संकट के इस मुश्किल वक्त में अपने मुख्य सचिव को रिलीव नहीं कर सकती है। मुख्य सचिव को 24 मई को सेवा विस्तार की अनुमति देने और चार दिन बाद के आपके एकपक्षीय आदेश के बीच आखिर क्या हुआ, यह बात समझ में नहीं आई। ममता ने कहा कि यह एकतरफा आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाला, ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व तथा पूरी तरह से असंवैधानिक है।
ममता ने कहा, "मुझे आशा है कि नवीनतम आदेश (मुख्य सचिव का तबादला दिल्ली करने का) और कलईकुंडा में आपके साथ हुई मेरी मुलाकात का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संघीय सहयोग, अखिल भारतीय सेवा तथा इसके लिए बनाए गए कानूनों के वैधानिक ढांचे का आधार स्तंभ है।" ममता ने अनुरोध किया कि केंद्र ने राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्य सचिव का कार्यकाल एक जून से अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने जो आदेश दिया था, उसे ही प्रभावी माना जाए।