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अमेरिका के साथ जल्दबाजी में समझौता?: खरगे ने पीएम मोदी को घेरा, बोले- नासमझी वाली विदेश नीति या एकतरफा सरेंडर

Sat, 21 Feb 2026 07:36 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 21 Feb 2026 07:36 PM IST
सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ जल्दबाजी में समझौता करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि जीरो टैरिफ, 500 अरब डॉलर आयात और रूस से तेल खरीद पर असर जैसे फैसले देश के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने पीएम से पारदर्शिता की मांग की। आइए जानते हैं कि खरगे ने क्या कहा?

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Mallikarjun Kharge attacks the Centre on the trade deal with the US said unilateral surrender News In Hindi
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अक्ष्यक्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते को लेकर देश की सियासत में गर्माहट तेज है। इसी बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को मोदी सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को लेकर मामला चल रहा था, तो भारत सरकार ने फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया और जल्दबाजी में समझौता क्यों कर लिया।

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खरगे ने कहा कि यह साफ नहीं है कि सरकार की विदेश नीति में भ्रम है या फिर एकतरफा झुकाव। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में भारत ने बड़े समझौते किए हैं। उनके मुताबिक, संयुक्त बयान में कई अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ (जीरो ड्यूटी) की बात कही गई है, जिससे भारतीय बाजार, खासकर कृषि क्षेत्र, अमेरिकी सामान के लिए खुल सकता है।

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खरगे ने पीएम मोदी से पूछा तीखा सवाल
खरगे ने आगे यह भी कहा कि इस समझौते में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान आयात करने की बात शामिल है। साथ ही, रूस से तेल खरीदना बंद करने का वादा भी बताया जा रहा है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। डिजिटल व्यापार से जुड़े कुछ टैक्स में छूट देने की बात भी सामने आई है। खरगे ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल करते हुए कहा कि देश को सच बताया जाए।



उन्होंने पूछा कि आखिर किस दबाव में आकर राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को 140 करोड़ भारतीयों, किसानों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यापार समझौता करना चाहिए।

ये भी पढ़ें:- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उलट टैरिफ की वापसी कैसे?: क्या है 'धारा 122', जो ट्रंप के लिए आपदा में बनी अवसर

अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट

गौरतलब है कि अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी तेज तब हुई जब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया है। 6-3 के फैसले में अदालत ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों के तहत कांग्रेस की मंजूरी के बिना आयात शुल्क लगाना अवैध है। फैसले के बाद ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत के साथ समझौका जारी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा भी जताई और कहा कि यह निर्णय उनके आर्थिक एजेंडे के खिलाफ है।

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