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मालेगांव विस्फोट: पीड़ित परिवारों की मदद करने वाला संगठन कोर्ट के फैसले से निराश, पूछा- फिर जिम्मेदार कौन?

Thu, 31 Jul 2025 02:53 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 31 Jul 2025 02:53 PM IST
सार

महाराष्ट्र के मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट ने सातों आरोपियों को बरी कर दिए है। इसको लेकर पीड़ित परिवारों की मदद करने वाले संगठन कुल जमात-ए तंजीम के इंचार्ज फिरोज अहमद आजमी ने फैसले पर गहरा दुख जताया। उन्होंने पूछा कि यदि आरोपी दोषी नहीं, तो असली जिम्मेदार कौन?

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Malegaon blast Organization helping victim families disappointed with courts decision
कोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाराष्ट्र के मालेगांव में 17 साल पहले 29 सितंबर 2008 को हुए विस्फोट के मामले में गुरुवार को एनआईए की विशेष अदालत ने सातों आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले ने जहां एक तरफ राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज कर दी है। वहीं दूसरी ओर मामले में पीड़ित परिवारों की मदद करने वाले संगठन कुल जमात-ए तंजीम ने गहरा दुख जताया है। संगठन के इंचार्ज फिरोज अहमद आजमी ने कहा कि इस फैसले से मृतकों को न्याय नहीं मिला। उन्होंने पूछा कि ये आरोपी दोषी नहीं हैं, तो मालेगांव विस्फोट का असली जिम्मेदार कौन हैं?

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कोर्ट के फैसले ने हमें झकझोर दिया- फिरोज
फिरोज ने बताया कि 2006 और 2008 के मालेगांव धमाकों के बाद जांच एजेंसियों ने सही दिशा में काम किया था। महाराष्ट्र एटीएस के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे ने मामले की गहन जांच कर आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए थे। उन्होंने कहा कि हम खुश थे कि जांच सही दिशा में चल रही है और इतने वर्षों के बाद मजबूत सबूत भी मिलने चाहिए थे, लेकिन कोर्ट के फैसले ने हमें झकझोर दिया।

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विस्फोट का असली जिम्मेदार कौन?
साथ ही मामले में आजमी ने सवाल उठाया कि अगर ये आरोपी दोषी नहीं हैं, तो मालेगांव ब्लास्ट के असली जिम्मेदार कौन हैं? उन्होंने जांच एजेंसियों से अपील की है कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दें ताकि असली दोषियों को पकड़ा जा सके। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की जांच और मामले में कई कमजोरियां बताईं और आरोपियों को शक का फायदा दिया।


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क्या है पूरा मामला, यहां समझिए
बता दें कि ये पूरा मामला 29 सितंबर 2008 का है। जब मालेगांव में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल से बम फटा था, जिसमें छह लोग मारे गए और 101 घायल बताए गए। करीब 17 साल बाद कोर्ट ने पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी आरोपियों को किसी ठोस सबूत के अभाव में बरी कर दिया। इसके बाद संगठन ने नाराजगी जाहिर की है। 

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