चीनी निर्यात में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता, 44 हजार टन चीनी खरीदेगा मलयेशिया
- चीनी निर्यात की संभावनाएं तलाश रही सरकार को मिली सफलता
- 15 लाख टन चीनी निर्यात करने को सरकार कर चुकी है करार
- 50 लाख टन चीनी निर्यात सितंबर, 2019 तक करने की उम्मीद
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चीनी निर्यात की संभावनाएं तलाश रही केंद्र सरकार को धीरे-धीरे सफलता मिल रही है। मलयेशिया 44,000 टन चीनी भारत से खरीदने के लिए तैयार हो गया है। दरअसल, सरकार ने गन्ना किसानों के बढ़ते बकाये के भुगतान के मद्देनजर चीनी निर्यात करने जैसा कदम उठाया है।
निर्यात की संभावनाएं तलाशने के लिए सरकार द्वारा कई टीमें चीन, मलयेशिया और इंडोनेशिया सहित कई अन्य देशों में भेजी गई थीं। जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशियाई देश भी चीनी खरीदने को तैयार हैं, इसलिए एक टीम जल्द ही एक बार फिर इंडोनेशिया होगी।
जानकारी के मुताबिक, सरकार अब तक 15 लाख टन चीनी निर्यात करने के लिए करार कर चुकी है। उसे सितंबर, 2019 तक 50 लाख टन चीनी निर्यात की उम्मीद है। इससे चीनी मिलों को वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे वे गन्ना किसानों का बकाया चुका सकेंगे।
चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार ने गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए 2018 में कई कदम उठाए थे। इसके बावजूद पिछले सीजन का एक चौथाई बकाया रह गया था, जो लगातार बढ़ रहा है।
इसलिए सरकार ने उठाया कदम
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी मिलें गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं कर पा रही हैं, जबकि सरकार ने बकाया चुकाने को मिलों के लापरवाह रवैये के चलते बफर स्टॉक पर सब्सिडी देने के लिए निर्यात की अनिवार्य शर्त रखी है। लेकिन मिलों द्वारा निर्यात को लेकर ज्यादा प्रयास नहीं किए गए। इसी वजह से सरकार को यह कदम उठाना पड़ रहा है।
न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग
उत्तर प्रदेश से हाल ही में गन्ने का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग केंद्र सरकार के पास आई है। राज्य सरकार का कहना है कि न्यूनतम मूल्य को 29 रुपये से बढ़ाकर 32 रुपये कर दिया जाना चाहिए। मौजूदा समय चीनी का बाजार भाव 3,100 से 3,150 रुपये है और प्रति क्विंटन चीनी मिलों को रिकवरी के तौर पर 338 से 343 रुपये मिल रहे हैं। पिछले साल सरकार ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ा दिया था। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपये निर्धारित किया गया था।