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SC: 'आप इतने गरीब हैं कि स्टेशनरी पर खर्च नहीं कर सकते'; कैंपा फंड मामले में उत्तराखंड सरकार से अदालत

Wed, 19 Mar 2025 10:32 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 19 Mar 2025 10:32 PM IST
सार

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव की ओर से दायर हलफनामे पर संज्ञान लिया और फंड के दुरुपयोग के मामले में कार्यवाही बंद कर दी। पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि यदि कोई विचलन है तो वह मामूली प्रकृति का है।

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Majority CAMPA funds spent on forest activities: Uttarakhand to Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) की अधिकांश धनराशि वनरोपण गतिविधियों और संरक्षण पर खर्च की गई। हालांकि, राज्य सरकार ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने 53,000 रुपये मूल्य के एक आईफोन और दो लैपटॉप के अलावा अपने घरों में फर्नीचर के लिए भी कुछ राशि का इस्तेमाल किया। सरकार ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव की ओर से दायर हलफनामे पर संज्ञान लिया और फंड के दुरुपयोग के मामले में कार्यवाही बंद कर दी। पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि यदि कोई विचलन है तो वह मामूली प्रकृति का है। हलफनामे के अनुसार, गतिविधियों पर खर्च की गई राशि कुल फंड का 1.8 फीसदी है. जबकि कुल कैंपा फंड 753.56 करोड़ रुपये है। पीठ ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई विचलन न हो। राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि उपयोग की गई राशि ब्याज सहित चुकाई जाएगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी कि आपका राज्य इतना गरीब है कि वह स्टेशनरी पर खर्च नहीं कर सकता है और उसे वनरोपण के लिए निर्धारित फंड से ही खर्च करना पड़ता है?
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सुप्रीम कोर्ट ने 5 मार्च को राज्य की ओर से लैपटॉप, आईफोन, फ्रिज तथा अन्य वस्तुओं की खरीद के लिए कैंपा निधि के कथित दुरुपयोग पर आपत्ति जताई थी तथा मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार, कैंपा निधि के उपयोग में अनियमितताएं पाई गई थीं तथा इमारतों के जीर्णोद्धार के अलावा आईफोन, लैपटॉप, फ्रिज, कूलर, स्टेशनरी सहित अस्वीकार्य वस्तुओं पर कथित रूप से बड़ी राशि खर्च की गई थी।
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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि कुल राशि 753.56 करोड़ है और उपयोग की गई राशि 1.8 फीसदी है लेकिन फिर भी आईफोन और लैपटॉप खरीदने का औचित्य नहीं है। हरेरा उत्सव के लिए एक करोड़ खर्च किए गए, यह वृक्षारोपण जागरूकता का हिस्सा है। फर्नीचर की खरीद, शिकार विरोधी योजना, वन कार्यालयों के जीर्णोद्धार कार्य और कुछ राशि का उपयोग वन अधिकारियों की ओर से अपने निजी फर्नीचर के लिए किया गया और हमने उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है। टाइगर सफारी पर खर्च कैंपा फंड से नहीं बल्कि समेकित निधि से होना चाहिए था और जांच पहले से ही चल रही है।

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