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संघ की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
संजय मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 04 Apr 2017 05:57 AM IST
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राजनीतिक सत्ता पर रंग जमाने के बाद अब संघ देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने की मुहिम में है। इस कवायद में संघ का जोर वर्तमान भारतीय शिक्षा प्रणाली में मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और योग को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर है। इसे जमीन पर उतारने की कोशिश के तहत संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने बीते शनिवार को देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ गुपचुप मंत्रणा कर नई रणनीति तैयार कर ली है।
होसबोले कुछ चुनिंदा कुलपतियों के साथ आगामी 21 अप्रैल को फिर मंत्रणा करेंगे। संघ का मानना है कि राष्ट्र निर्माण के उसके अभियान में शिक्षा क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकती है।
संघ सूत्रों की मानें तो दिल्ली में संपन्न हुए ज्ञान संगम के बाद संघ ने शिक्षा क्षेत्र में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम तेज कर दिया है। अभियान को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने शिक्षा और शिक्षक की भूमिका के मुद्दे पर भगवा संगठन के जरिये आयोजित परिचर्चा को संबोधित किया।
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कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत की महिमा मौलिक उपलब्धियों के वजह से नहीं है बल्कि अध्यात्म की वजह से है। उन्होंने कहा कि लौकिक शिक्षा अकेले विनाशकारी रहेगी। लौकिक के साथ अध्यात्म का मिश्रण होना जरूरी है।
भारत के पुरातन ऋषि मुनियों के जरिये शुरू की गई गुरु-शिष्य परंपरा में ही शिक्षा का भाव है। अकेले विज्ञान विनाशकारी हो सकता है यदि इसमें अध्यात्म को न जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि यह भारतीय परंपरा ही है जो शिक्षा को बचा सकती है। वर्तमान शिक्षा में गुरुत्व का अभाव है, उसे दूर करना होगा। यदि 1 प्रतिशत शिक्षक भी छात्र के भाव को समझ कर (भारतीय परंपरा के अनुसार) कार्य करने लगे तो देश का कायाकल्प हो जाएगा।
दरअसल शिक्षा व्यवस्था में अपने मनमाफिक बदलाव लाने के प्रयास में संघ का जोर शिक्षकों को उस लायक तैयार करने पर है। इस कवायद में 21 अप्रैल को कुछ चुनिंदा कुलपतियों के साथ होने वाली दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल की मंत्रणा बैठक अहम है।
नाम न छापने की शर्त पर संघ के एक वरिष्ठ विचारक ने बताया कि 21 अप्रैल की बैठक में पहले आधे दिन योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने के तौर तरीकों और छात्रों के बीच मूल्य आधारित शिक्षा को पहुंचाने की रणनीति पर मंथन होगा। इसके बाद दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल का संबोधन होगा। बैठक की कमान अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील आंबेकर के हाथो में है।
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होसबोले कुछ चुनिंदा कुलपतियों के साथ आगामी 21 अप्रैल को फिर मंत्रणा करेंगे। संघ का मानना है कि राष्ट्र निर्माण के उसके अभियान में शिक्षा क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकती है।
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संघ सूत्रों की मानें तो दिल्ली में संपन्न हुए ज्ञान संगम के बाद संघ ने शिक्षा क्षेत्र में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम तेज कर दिया है। अभियान को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने शिक्षा और शिक्षक की भूमिका के मुद्दे पर भगवा संगठन के जरिये आयोजित परिचर्चा को संबोधित किया।
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कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत की महिमा मौलिक उपलब्धियों के वजह से नहीं है बल्कि अध्यात्म की वजह से है। उन्होंने कहा कि लौकिक शिक्षा अकेले विनाशकारी रहेगी। लौकिक के साथ अध्यात्म का मिश्रण होना जरूरी है।
भारत के पुरातन ऋषि मुनियों के जरिये शुरू की गई गुरु-शिष्य परंपरा में ही शिक्षा का भाव है। अकेले विज्ञान विनाशकारी हो सकता है यदि इसमें अध्यात्म को न जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि यह भारतीय परंपरा ही है जो शिक्षा को बचा सकती है। वर्तमान शिक्षा में गुरुत्व का अभाव है, उसे दूर करना होगा। यदि 1 प्रतिशत शिक्षक भी छात्र के भाव को समझ कर (भारतीय परंपरा के अनुसार) कार्य करने लगे तो देश का कायाकल्प हो जाएगा।
दरअसल शिक्षा व्यवस्था में अपने मनमाफिक बदलाव लाने के प्रयास में संघ का जोर शिक्षकों को उस लायक तैयार करने पर है। इस कवायद में 21 अप्रैल को कुछ चुनिंदा कुलपतियों के साथ होने वाली दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल की मंत्रणा बैठक अहम है।
नाम न छापने की शर्त पर संघ के एक वरिष्ठ विचारक ने बताया कि 21 अप्रैल की बैठक में पहले आधे दिन योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने के तौर तरीकों और छात्रों के बीच मूल्य आधारित शिक्षा को पहुंचाने की रणनीति पर मंथन होगा। इसके बाद दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल का संबोधन होगा। बैठक की कमान अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील आंबेकर के हाथो में है।