{"_id":"64508c757fabad56560d53e6","slug":"mahatma-gandhi-grandson-arun-manilal-gandhi-death-tweets-tushar-gandhi-news-and-updates-2023-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Arun Gandhi: महात्मा गांधी के पोते अरुण मणिलाल गांधी का निधन, 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Arun Gandhi: महात्मा गांधी के पोते अरुण मणिलाल गांधी का निधन, 89 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
Tue, 02 May 2023 09:58 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोल्हापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोल्हापुर
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 02 May 2023 09:58 AM IST
सार
महात्मा गांधी के दूसरे पुत्र मणिलाल गांधी के बेटे थे अरुण गांधी।
विज्ञापन
महात्मा गांधी के पोते अरुण गांधी।
- फोटो : Social Media
विस्तार
महात्मा गांधी के पोते अरुण मणिलाल गांधी का 89 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में निधन हो गया। अरुण गांधी के बेटे तुषार गांधी ने मंगलवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। बताया गया है कि अरुण गांधी पिछले काफी दिनों से बीमार थे। तुषार गांधी ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार आज ही कोल्हापुर में किया जाएगा।
कौन हैं अरुण मणिलाल गांधी?
अरुण मणिलाल गांधी का महात्मा गांधी के दूसरे बेटे मणिलाल गांधी के बेटे हैं। उनका जन्म 14 अप्रैल 1934 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनके पिता यहां छपने वाले अखबार इंडियन ओपिनियन के संपादक रहे, जबकि मां इसी अखबार में पब्लिशर रहीं। अरुण गांधी ने बाद में अपने दादा की राह को चुनते हुए सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर कार्यकर्ता के तौर पर काम किया।
विज्ञापन
अरुण गांधी ने कुछ किताबें भी लिखी हैं। इनमें द गिफ्ट ऑफ एंगर: एंड अदर लेसन्स फ्रॉम माई ग्रैंडफादर महात्मा गांधी प्रमुख हैं। अरुण गांधी 1987 में अपने परिवार के साथ अमेरिका में बस गए थे। यहां उन्होंने अपने जीवन के कई साल टेनेसी राज्य के मेम्फिस में गुजारे। यहां उन्होंने क्रिश्चियन ब्रदर्स यूनिवर्सिटी में अहिंसा से जुड़े एक संस्थान की भी स्थापना की थी।
विज्ञापन
Bereaved. Lost my father this morning🙏🏽
— Tushar बेदखल (@TusharG) May 2, 2023
विज्ञापन
कौन हैं अरुण मणिलाल गांधी?
अरुण मणिलाल गांधी का महात्मा गांधी के दूसरे बेटे मणिलाल गांधी के बेटे हैं। उनका जन्म 14 अप्रैल 1934 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनके पिता यहां छपने वाले अखबार इंडियन ओपिनियन के संपादक रहे, जबकि मां इसी अखबार में पब्लिशर रहीं। अरुण गांधी ने बाद में अपने दादा की राह को चुनते हुए सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर कार्यकर्ता के तौर पर काम किया।
विज्ञापन
अरुण गांधी ने कुछ किताबें भी लिखी हैं। इनमें द गिफ्ट ऑफ एंगर: एंड अदर लेसन्स फ्रॉम माई ग्रैंडफादर महात्मा गांधी प्रमुख हैं। अरुण गांधी 1987 में अपने परिवार के साथ अमेरिका में बस गए थे। यहां उन्होंने अपने जीवन के कई साल टेनेसी राज्य के मेम्फिस में गुजारे। यहां उन्होंने क्रिश्चियन ब्रदर्स यूनिवर्सिटी में अहिंसा से जुड़े एक संस्थान की भी स्थापना की थी।