फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Explainer: Why Did the CM, Army Chief and Election Commissioner Receive SIR Notices? What Should You Do

एक्सप्लेनर: सीएम, सेना प्रमुख से चुनाव आयुक्त तक को एसआईआर में क्यों मिला नोटिस, आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें?

Mon, 21 Sep 2026 03:26 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 21 Sep 2026 03:26 PM IST
सार

दिल्ली में एसआईआर के दौरान 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस मिला है, जिनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं। कहीं नाम में अंतर मिला, तो कहीं पुराने रिकॉर्ड से नाम मैच नहीं हुआ। लेकिन नोटिस मिलने का मतलब आखिर क्या है और आम मतदाता को कब चिंता करने की जरूरत है? आइए जानते हैं।

विज्ञापन
Explainer: Why Did the CM, Army Chief and Election Commissioner Receive SIR Notices? What Should You Do
एसआईआर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े कई मामले चर्चा का करण बने हुए हैं। दरअसल इस दौरान कई बड़े नेताओं, अधिकारियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को नोटिस मिलने के बाद मामला सुर्खियों में है। इन मामलों में कहीं नाम की स्पेलिंग में अंतर मिला, तो कहीं मौजूदा रिकॉर्ड 2002 की पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया। 

विज्ञापन


एसआईआर में रिकॉर्ड की जांच कैसे हो रही है? नोटिस क्यों दिए जा रहे हैं? क्या नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटना है? अगर किसी आम मतदाता का नाम भी मसौदा सूची में नहीं मिलता है, तो उसके लिए आगे क्या विकल्प हैं? अगर आप का नान मसौदा सूची में नहीं तो उसे क्यों हटाया गया, इसे कैसे पता करें? नाम दोबारा जुड़वाने के लिए कौन सा प्रपत्र भरना होगा? आइये जानते हैं...

विज्ञापन

एसआईआर क्या है?

एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को दोबारा जांचने और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम बने रहें और मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, दो जगह दर्ज या अन्य कारणों से अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

एसआईआर में नोटिस क्यों दिए जा रहे हैं?

दिल्ली में 97 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई है। एसआईआर के दौरान न्यूमेरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी में विसंगतियां मिलने पर करीब 33.13 लाख नोटिस जारी किए गए हैं।

ज्यादातर मामलों में मौजूदा मतदाता की जानकारी का 2002 की पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, ये नोटिस सिस्टम से जारी किए गए हैं और इनका उद्देश्य मतदाताओं को अपने ECINET रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को ठीक करने का अवसर देना है।

क्या है न्यूमेरेशन फॉर्म?

न्यूमेरेशन फॉर्म चुनाव आयोग की ओर से मतदाताओं की जानकारी जुटाने और उसका सत्यापन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला फॉर्म है। इसमें मतदाता की पहचान, निवास स्थान, पारिवारिक विवरण, जन्मतिथि और नागरिकता से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है।

किस तरह की विसंगतियां सामने आई हैं?

एसआईआर में अलग-अलग तरह की विसंगतियां सामने आई हैं। कुछ मामलों में नाम की स्पेलिंग में अंतर मिला, जबकि कुछ मामलों में मौजूदा मतदाता की एंट्री 2002 की पिछली मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाई।

परिवार से जुड़ी जानकारी में अंतर भी सामने आया है। उदाहरण के लिए मनीष सिसोदिया के मामले में नोटिस में कारण नहीं बताया गया, जबकि उनकी पत्नी सीमा के नाम और बेटे मीर के माता-पिता के नाम में अंतर का उल्लेख किया गया है।

एसएस संधू को क्यों मिला नोटिस?

चुनाव आयुक्त एसएस संधू को दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र में नोटिस दिया गया। उनके मामले में नोटिस की वजह नाम में विसंगति बताई गई। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के अनुसार, न्यूमेरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी को पिछली मतदाता सूची से मिलाते समय यह विसंगति सामने आई थी। बाद में संधू की ओर से दिए गए विवरण और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। उनकी एंट्री को वैलिडेट कर दिया गया और उसे अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए रखा गया है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।

अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को क्यों मिला नोटिस?

पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, बेटे पुलकित केजरीवाल और उनके माता-पिता गोबिंद राम केजरीवाल और गीता देवी को नोटिस जारी किया गया।

इन सभी को पिछली एसआईआर से अनमैप्ड श्रेणी में रखा गया। न्यू दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के पार्ट-51, केजी मार्ग के 110 मतदाताओं को जारी नोटिस में अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के पांच सदस्यों के नाम शामिल थे। अरविंद केजरीवाल न्यू दिल्ली-40 विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता हैं।

Explainer: Why Did the CM, Army Chief and Election Commissioner Receive SIR Notices? What Should You Do
नोटिस - फोटो : Amar Ujala

'अनमैप्ड' का क्या मतलब है?

अनमैप्ड का मतलब है कि मौजूदा मतदाता की एंट्री को पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से जोड़ा नहीं जा सका। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के मुताबिक, उन मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं जिनकी एंट्री पिछली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो सकी या पिछली मतदाता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया में तार्किक विसंगतियां मिलीं।

और किन बड़े नामों को नोटिस मिला?

नोटिस पाने वाले या नोटिस पाने की संभावना वाले प्रमुख नामों में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व जेएनयू कुलपति एम. जगदीश कुमार, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, पूर्व सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी और सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद शामिल हैं।

इसके अलावा चुनाव आयुक्त एसएस संधू, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई और उनका परिवार भी नोटिस पाने वालों में शामिल है। इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनका परिवार, बांसुरी स्वराज और वीरेंद्र सचदेवा समेत कई नाम सामने आए थे।

क्या नोटिस मिलने से वोटर लिस्ट से नाम हट जाएगा?

नहीं। नोटिस मिलना नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। किसी नाम को हटाने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद उचित, कारणयुक्त और अपील योग्य आदेश जारी किया जाएगा।

दिल्ली में कितने नाम मसौदा सूची से हटे?

दिल्ली में एसआईआर के तहत मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के दौरान 47 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। हालांकि, मसौदा सूची में नाम नहीं होना अंतिम फैसला नहीं है। योग्य मतदाता दावे की प्रक्रिया के दौरान अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

एसआईआर में नाम क्यों कट सकता है?

एसआईआर के दौरान मसौदा मतदाता सूची से नाम बाहर होने के कई कारण हो सकते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, मुख्य कारण हैं,

  • मतदाता घर पर मौजूद नहीं मिला
  • मतदाता दूसरी जगह चला गया
  • मतदाता की मृत्यु हो चुकी है
  • एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज है
  • अन्य श्रेणी

इसलिए मसौदा सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति का मतदान का अधिकार हमेशा के लिए खत्म हो गया।

आपका नाम एसआईआर की मसौदा सूची में नहीं है तो क्या करें?

सबसे पहले चुनाव आयोग के मतदाता खोज पोर्टल (https://voters.eci.gov.in/) या ECINET एप पर जाकर अपना EPIC नंबर (मतदाता पहचान पत्र संख्या) या पंजीकृत मोबाइल नंबर डालकर चेक करें कि आपका नाम ड्राफ्ट सूची में है या नहीं। अगर नाम नहीं मिलता है तो यह भी देखें कि नाम हटाए जाने के पीछे क्या कारण दिया गया है। अगर आप मतदाता बनने की सभी शर्तें पूरी करते हैं और आपका नाम गलती से छूट गया है, तो आप दावा दाखिल कर सकते हैं।

Explainer: Why Did the CM, Army Chief and Election Commissioner Receive SIR Notices? What Should You Do
फॉर्मे-6 - फोटो : Amar Ujala

नाम दोबारा जुड़वाने के लिए कौन सा फॉर्म?

अगर आप पात्र मतदाता हैं लेकिन एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का दावा किया जा सकता है। यह उन पात्र लोगों के लिए भी है जिनका गणना प्रपत्र नहीं भर पाया या घर-घर सत्यापन के दौरान उनका प्रपत्र जमा नहीं हो सका।

फॉर्म-6 में क्या जानकारी देनी होती है?

इसमें सामान्य तौर पर;

  • आपका नाम
  • रिश्तेदार की जानकारी
  • मोबाइल नंबर या ईमेल
  • जन्मतिथि
  • लिंग
  • पूरा आवासीय पता, जैसी जानकारी मांगी जाती है।

कौन से दस्तावेज देने पड़ सकते हैं?

उम्र और पते से संबंधित दस्तावेज आपकी स्थिति और चुनाव आयोग के लागू निर्देशों के अनुसार मांगे जा सकते हैं। उम्र के प्रमाण के लिए संभावित दस्तावेजों में;

  • जन्म प्रमाणपत्र
  • आधार
  • स्थायी खाता संख्या यानी पैन कार्ड
  • वाहन चलाने का लाइसेंस
  • दसवीं या बारहवीं का प्रमाणपत्र
  • पासपोर्ट शामिल हो सकते हैं।
  • पते के प्रमाण के लिए
  • संभावित दस्तावेजों में;
  • बिजली-पानी आदि का बिल,
  • आधार,
  • बैंक या डाकघर की पासबुक,
  • पासपोर्ट,
  • जमीन से जुड़े दस्तावेज,
  • किराये या मकान की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।

फॉर्म-6 कहां जमा करें?

इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प हैं।

  • इसे आप ऑनलाइन माध्यम से चुनाव आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in या ECINET मोबाइल एप के जरिए आसानी से जमा कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन आवेदन के लिए आप अपने क्षेत्र के बीएलओ या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के पास फॉर्म जमा करा सकते हैं।
  • जरूरत पड़ने पर 1950 मतदाता हेल्पलाइन से भी सहायता ली जा सकती है।

अगर नाम है, लेकिन जानकारी गलत है तो?

अगर मसौदा मतदाता सूची में आपका नाम मौजूद है लेकिन नाम, पता, लिंग या दूसरी जानकारी में गलती है तो इसके लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके जरिए पात्र मामलों में मतदाता सूची में सुधार या संशोधन कराया जा सकता है।

किसी गलत व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में है तो?

दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया केवल नाम कटने वाले लोगों के लिए नहीं है। अगर मतदाता सूची में किसी ऐसे व्यक्ति का नाम है जो;

  • मर चुका है,
  • स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुका है,
  • एक से अधिक जगह पंजीकृत है,
  • या किसी अन्य कारण से पात्र नहीं है,

तो उसके नाम पर फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी या प्रमाण भी देना पड़ सकता है।

फॉर्म-6 भरते ही क्या नाम जुड़ जाएगा?

नहीं। फॉर्म-6 जमा करने का मतलब यह नहीं है कि नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित चुनाव अधिकारी आपके दावे की जांच करेंगे। आपकी पात्रता और आवेदन में दी गई जानकारी का सत्यापन किया जा सकता है। अगर जांच में दावा सही पाया जाता है और आप पात्र हैं, तो आपका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। इसलिए केवल प्रपत्र भरना पर्याप्त नहीं है। सही जानकारी और जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करना जरूरी है।

क्या एसआईआर खत्म होने के बाद भी नाम जुड़ सकता है?

यहां मसौदा और अंतिम मतदाता सूची के बीच का अंतर समझना जरूरी है। एसआईआर के बाद पहले मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। इसके बाद पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलता है। इस दौरान जिन लोगों का नाम मसौदा सूची में छूट गया है, वे अपना नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं। इसलिए मसौदा सूची से नाम हटना अंतिम फैसला नहीं है।

Explainer: Why Did the CM, Army Chief and Election Commissioner Receive SIR Notices? What Should You Do
फॉर्म - फोटो : Amar Ujala

30 सितंबर तक क्या करना है?

दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से 30 सितंबर तक है। इस दौरान जिन पात्र मतदाताओं का नाम मसौदा सूची में नहीं है, वे अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद;

  • दावों की जांच और निपटारा: 29 अक्तूबर तक
  • अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 4 नवंबर, यानी अगर आपका नाम मसौदा सूची में नहीं है तो 30 सितंबर की समय-सीमा बेहद महत्वपूर्ण है।

साथ ही सभी पोलिंग स्टेशन पर 20 और 27 सितंबर को खास कैंप लगाने की भी योजना बनाई गई है, जहां नागरिक चुनावी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अगर अंतिम सूची में भी नाम नहीं आया तो?

अगर आपने दावा दाखिल किया, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में भी नाम शामिल नहीं हुआ, तो उपलब्ध अपील प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। अंतिम सूची में नाम नहीं आने पर निर्धारित अवधि में जिला निर्वाचन अधिकारी या जिलाधिकारी के सामने अपील की जा सकती है। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर भी आगे की प्रक्रिया का प्रावधान है। 

अगर एसआईआर हो चुका है और अब भी नाम नहीं जुड़ा तो क्या करें?

अगर आप यूपी या बिहार जैसे ऐसे राज्य के पात्र मतदाता हैं, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आपका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है, तो नाम जुड़वाने का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं होता। चुनाव आयोग के सामान्य नियमों के मुताबिक, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी मतदाता सूची का निरंतर अद्यतन होता रहता है। 

अब तक कितने आवेदन आए?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दैनिक बुलेटिन के मुताबिक, 31 अगस्त से 19 सितंबर के बीच दिल्ली में फॉर्म-6 के 84,263 आवेदन मिले।

  • इससे पहले 30 अगस्त तक 2,12,400 आवेदन मिल चुके थे।
  • इसी अवधि में फॉर्म-6ए के 174, फॉर्म-7 के 1,396 और फॉर्म-8 के 29,705 आवेदन मिले।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed