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Maharastra: फिर गरमाया मराठा बनाम ओबीसी आरक्षण का मुद्दा, सरकार के खिलाफ भुजबल ने निकाली एल्गार रैली
Sat, 18 Nov 2023 05:44 AM IST
यशोधन शर्मा
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 18 Nov 2023 05:44 AM IST
सार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर दो बार अनशन करने वाले मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार को 24 दिसंबर तक की मोहलत देकर राज्यव्यापी यात्रा शुरू की है। वहीं, ओबीसी समुदाय के नेताओं ने भी आरक्षण बचाओ आंदोलन शुरू कर राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।
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छगन भुजबल (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
विस्तार
महाराष्ट्र में मराठा बनाम पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण पर राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को राज्य के मंत्री छगन भुजबल ने कैबिनेट की बैठक छोड़ सरकार के खिलाफ एल्गार रैली की, जहां मराठों को कुनबी के नाम पर ओबीसी प्रमाण पत्र देने के विरोध के साथ ही जातिगत जनगणना कराने की मांग की गई। एल्गार रैली में दलगत राजनीति से परे होकर ओबीसी विधायकों और नेताओं ने भी हिस्सा लिया।
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मराठा आरक्षण की मांग को लेकर दो बार अनशन करने वाले मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार को 24 दिसंबर तक की मोहलत देकर राज्यव्यापी यात्रा शुरू की है। वहीं, ओबीसी समुदाय के नेताओं ने भी आरक्षण बचाओ आंदोलन शुरू कर राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।
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मनोज जरांगे पर बोला हमला
इसी कड़ी में शुक्रवार को जालना जिले के अंबाड स्थित पछोड़ रोड पर धाईत नगर में ओबीसी रैली की गई, जिसमें राज्य के खाद्य व आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार सहित कई विधायक शामिल हुए। भुजबल ने मराठा आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरक्षण गरीबी हटाओ कार्यक्रम नहीं है बल्कि वर्षों से जो दबे कुचले हैं उन्हें सामाजिक न्याय देने के लिए आरक्षण दिया गया जबकि मराठा समाज को ऐसी किसी तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ी है।
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भुजबल ने कहा कि मराठा अब कुनबी मराठा के रूप में धनगर, माली और वंजारी समाज में घुसना चाहते हैं लेकिन ओबीसी समुदाय अपने मौजूदा कोटे में उन्हें घुसने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने 30 अक्तूबर को बीड में एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके और विधायक संदीप क्षीरसागर के आवास पर आगजनी और उससे पहले 1 सितंबर को अंतरावली-सराटी गांव में पुलिस पर हुए हमले को लेकर सवाल उठाया जिसमें 70 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
30 साल बाद अंबाड में फिर सजा मंडल-कमंडल की राजनीति का मंच
जालना जिले के अंबाड में 30 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर मंडल-कमंडल की राजनीति का मंच बना। इससे पहले 6 जून 1993 में महात्मा फुले समता परिषद की जनसभा हुई थी जहां छगन भुजबल ने मंडल आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग की थी। भुजबल समता परिषद के अध्यक्ष भी हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत वीपी सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिश को मंजूर किया था और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने ओबीसी समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था। इसके बाद ओबीसी आरक्षण बचाने के लिए छगन भुजबल ने इस स्थान को चुना।