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Maharashtra: क्या 'पुरानी पेंशन' बिगाड़ेगी महाराष्ट्र में खेल, 288 सीटों पर 18 लाख कर्मी व उनके 50 लाख परिजन
सार
Maharashtra assembly election: महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर सरकारी कर्मियों की संख्या जीत-हार में निर्णायक साबित हो सकती है। राज्य में एनएमओपीएस से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन, एक बड़ा मुद्दा है।
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महाराष्ट्र चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। राज्य में करीब 9 वर्ष से पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन चल रहा है। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली का जिक्र है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महा विकास अघाड़ी के घोषणा पत्र 'महाराष्ट्रनामा' में सरकारी कर्मियों के लिए 'पुरानी पेंशन' बहाली का वादा किया है। दूसरी तरफ, भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी वाले 'महायुति' गठबंधन में पुरानी पेंशन बाबत कुछ नहीं लिखा है। सरकारी कर्मचारियों का दावा है कि 'पुरानी पेंशन' महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों को बिगाड़ सकती है। राज्य में करीब 18 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। उनके परिजनों की संख्या 50 लाख से अधिक है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के हाथ में लगभग 70 लाख वोट हैं।
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर सरकारी कर्मियों की संख्या जीत-हार में निर्णायक साबित हो सकती है। राज्य में एनएमओपीएस से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन, एक बड़ा मुद्दा है। सरकारी कर्मचारी, लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाल कराने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। सरकारी कर्मियों ने हर जिले एवं ब्लॉक स्तर पर ओपीएस को लेकर आवाज बुलंद की है। धरना प्रदर्शन एवं रैलियां निकाली गई हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के घर जाकर ओपीएस के लिए समर्थन मांगा है। कर्मचारियों से यह अपील की गई है कि वे पुरानी पेंशन के मुद्दे पर वोट करें। जो भी पार्टी अपने घोषणा पत्र में ओपीएस का वादा करे, उसका समर्थन किया जाए। इस साल जुलाई अगस्त में पूरे राज्य में जिला स्तर पर ओपीएस बहाली का आंदोलन हुआ है। चुनाव में इसका असर दिखेगा। पोस्टल बैलेट में भी पुरानी पेंशन बहाली का का मुद्दा अपना असर दिखा सकता है।
पदाधिकारी के मुताबिक, एमवीए गठबंधन ने ओपीएस लागू करने का भरोसा दिया है। शिव सेना ने अलग से अपने घोषणा पत्र में ओपीएस को शामिल किया है। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कह दिया है कि एमवीए की सरकार बनती है तो ओपीएस देंगे। महाराष्ट्र में कुल 18 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इनमें से करीब आठ लाख कर्मचारी एनपीएस में शामिल हैं। एक विधानसभा में लगभग 20 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। इनके परिजनों की संख्या अलग है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने ओपीएस को लेकर कोई वादा नहीं किया है। शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी भी इस मुद्दे पर चुप हैं। कर्मचारियों का मानना है कि पोस्टल बैलेट में ओपीएस के मुद्दे का असर दिखाई पड़ेगा। इस बार 95 प्रतिशत कर्मियों को पोस्टल बैलेट का अधिकार मिला है। हर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार यह संख्या देंखे तो वह तीन हजार पोस्टर बैलेट बनती है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की मुंबई नॉर्थ वेस्ट सीट से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार रविंद्र दत्ताराम वायकर ने 48 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत का यह सबसे छोटा मार्जिन रहा है।
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कुल 3049 पोस्टल वोटिंग हुई थी। इसमें अमोल कीर्तिकर को 1500 वोट मिले थे, जबकि रविंद्र वायकर के खाते में 1549 वोट गए थे। 111 पोस्टल वोट खारिज कर दिए गए थे। ऐसे में सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों के वोट मायने रखते हैं। इस साल जब केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने की घोषणा की थी तो महाराष्ट्र ऐसा राज्य था, जिसने 48 घंटे के भीतर यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने की बात कही। हालांकि केंद्र सरकार एक अप्रैल 2025 से यूपीएस लागू करेगी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने दो दिन के भीतर यह स्कीम लागू करने की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने के फैसले को इस साल मार्च से ही प्रभावी कर दिया है।
एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है, पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा, महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में असर दिखाएगा। राज्य में लंबे समय तक सरकारी कर्मियों ने ओपीएस के लिए संघर्ष किया है। इसकी मांग को लेकर 26 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन किया गया था। एनपीएस/यूपीएस के विरोध में एनएमओपीएस के सदस्यों ने दो सितंबर से छह सितंबर तक काली पट्टी बांधकर काम किया था। केंद्र सरकार ने यूपीएस में जो प्रावधान किए हैं, उन्हें लेकर कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है। यूपीएस तो एनपीएस से भी ज्यादा खराब है।
इसमें शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों को मिलने वाले बेसिक पे व डीए के वेतन का 10वां भाग, सरकार कटौती के नाम पर ले रही है। विजय बंधु ने 29 अगस्त को पीएम मोदी को लिखे पत्र में इस बात का जिक्र किया था। इस कटौती के जरिए जो राशि सरकार अपने पास रखेगी, वह कर्मचारियों को नहीं मिलेगी। पुरानी पेंशन व्यवस्था में यदि कोई कर्मचारी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेता है तो उसकी पेंशन, सेवानिवृत्ति की तिथि से शुरु कर दी जाती थी, लेकिन अब यूपीएस में उसे 60 वर्ष के बाद पेंशन देने की बात कही गई है। यूपीएस, किसी भी तरह से गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना का स्थान नहीं ले सकती। देश के सभी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं, क्योंकि लोक कल्याणकारी राज्य में सामाजिक सुरक्षा, सरकार की जिम्मेदारी है।
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महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर सरकारी कर्मियों की संख्या जीत-हार में निर्णायक साबित हो सकती है। राज्य में एनएमओपीएस से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन, एक बड़ा मुद्दा है। सरकारी कर्मचारी, लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाल कराने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। सरकारी कर्मियों ने हर जिले एवं ब्लॉक स्तर पर ओपीएस को लेकर आवाज बुलंद की है। धरना प्रदर्शन एवं रैलियां निकाली गई हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के घर जाकर ओपीएस के लिए समर्थन मांगा है। कर्मचारियों से यह अपील की गई है कि वे पुरानी पेंशन के मुद्दे पर वोट करें। जो भी पार्टी अपने घोषणा पत्र में ओपीएस का वादा करे, उसका समर्थन किया जाए। इस साल जुलाई अगस्त में पूरे राज्य में जिला स्तर पर ओपीएस बहाली का आंदोलन हुआ है। चुनाव में इसका असर दिखेगा। पोस्टल बैलेट में भी पुरानी पेंशन बहाली का का मुद्दा अपना असर दिखा सकता है।
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पदाधिकारी के मुताबिक, एमवीए गठबंधन ने ओपीएस लागू करने का भरोसा दिया है। शिव सेना ने अलग से अपने घोषणा पत्र में ओपीएस को शामिल किया है। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कह दिया है कि एमवीए की सरकार बनती है तो ओपीएस देंगे। महाराष्ट्र में कुल 18 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इनमें से करीब आठ लाख कर्मचारी एनपीएस में शामिल हैं। एक विधानसभा में लगभग 20 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। इनके परिजनों की संख्या अलग है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने ओपीएस को लेकर कोई वादा नहीं किया है। शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी भी इस मुद्दे पर चुप हैं। कर्मचारियों का मानना है कि पोस्टल बैलेट में ओपीएस के मुद्दे का असर दिखाई पड़ेगा। इस बार 95 प्रतिशत कर्मियों को पोस्टल बैलेट का अधिकार मिला है। हर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार यह संख्या देंखे तो वह तीन हजार पोस्टर बैलेट बनती है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की मुंबई नॉर्थ वेस्ट सीट से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार रविंद्र दत्ताराम वायकर ने 48 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत का यह सबसे छोटा मार्जिन रहा है।
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कुल 3049 पोस्टल वोटिंग हुई थी। इसमें अमोल कीर्तिकर को 1500 वोट मिले थे, जबकि रविंद्र वायकर के खाते में 1549 वोट गए थे। 111 पोस्टल वोट खारिज कर दिए गए थे। ऐसे में सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों के वोट मायने रखते हैं। इस साल जब केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने की घोषणा की थी तो महाराष्ट्र ऐसा राज्य था, जिसने 48 घंटे के भीतर यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने की बात कही। हालांकि केंद्र सरकार एक अप्रैल 2025 से यूपीएस लागू करेगी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने दो दिन के भीतर यह स्कीम लागू करने की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने के फैसले को इस साल मार्च से ही प्रभावी कर दिया है।
एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है, पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा, महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में असर दिखाएगा। राज्य में लंबे समय तक सरकारी कर्मियों ने ओपीएस के लिए संघर्ष किया है। इसकी मांग को लेकर 26 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन किया गया था। एनपीएस/यूपीएस के विरोध में एनएमओपीएस के सदस्यों ने दो सितंबर से छह सितंबर तक काली पट्टी बांधकर काम किया था। केंद्र सरकार ने यूपीएस में जो प्रावधान किए हैं, उन्हें लेकर कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है। यूपीएस तो एनपीएस से भी ज्यादा खराब है।
इसमें शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों को मिलने वाले बेसिक पे व डीए के वेतन का 10वां भाग, सरकार कटौती के नाम पर ले रही है। विजय बंधु ने 29 अगस्त को पीएम मोदी को लिखे पत्र में इस बात का जिक्र किया था। इस कटौती के जरिए जो राशि सरकार अपने पास रखेगी, वह कर्मचारियों को नहीं मिलेगी। पुरानी पेंशन व्यवस्था में यदि कोई कर्मचारी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेता है तो उसकी पेंशन, सेवानिवृत्ति की तिथि से शुरु कर दी जाती थी, लेकिन अब यूपीएस में उसे 60 वर्ष के बाद पेंशन देने की बात कही गई है। यूपीएस, किसी भी तरह से गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना का स्थान नहीं ले सकती। देश के सभी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं, क्योंकि लोक कल्याणकारी राज्य में सामाजिक सुरक्षा, सरकार की जिम्मेदारी है।