Maharashtra: जानते हुए भी पार्टी की टूट क्यों नहीं रोक पाए शरद पवार? अब कर रहे भतीजे को 'चित' करने की तैयारी
Maharashtra: शरद पवार दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति के एक अहम किरदार रहे हैं। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उनकी राजनीति को समझना बहुत आसान नहीं है। अपनी इन्हीं विलक्षण क्षमताओं के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में कई बार चौंकाया।
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शरद पवार में आस्था रखने वाले एनसीपी के नेता इस बात से हैरान हैं कि टूट की आशंका के बाद भी इसे रोकने के लिए शरद पवार ने ठोस प्रयास क्यों नहीं किया। हालांकि अमर उजाला से बातचीत में अनिल देशमुख कहते हैं कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार को अपनों ने छोड़ा है। अजीत पवार और अन्य नेता प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई आदि के दबाव में छोड़कर गए हैं। यह भाजपा की दबाव और तोड़-फोड़ की राजनीति का नतीजा है। इस बीच खबर है कि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार मंगलवार को अपने भाई श्रीनिवास पवार के पास पहुंचे। उनसे चर्चा की। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे अंदरखाने के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है।
श्रीनिवास पवार से अजीत पवार की चर्चा के बाद उनके बेटे युगेन्द्र पवार एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पास आए। वहां उनकी मुलाकात अपने दादा शरद पवार और बुआ सुप्रिया सुले से हुई। गौरतलब है कि शरद पवार को छोड़कर अजीत पवार के साथ जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने भी सीनियर पवार पर बड़ा ताना मारा था। छगन भुजबल शरद पवार के नासिक (येवला) आने से चकित थे और खुद के द्वारा धोखा देने के आरोपों को खारिज करते हुए इसे शरद पवार के परिवार में फूट बताया था। ऐसे में इसके भी कयास लग रहे हैं कि पवार परिवार और खासकर श्रीनिवास पवार परिवार कहीं कोई बीच की कड़ी तो नहीं जोड़ रहे हैं। दरअसल पवार परिवार को पता है कि इस बिखराव का आने वाले समय में नतीजा क्या होगा?
अहम सवाल, कितने विधायक कौन जिता पाएगा
अनिल देशमुख कहते हैं कि शरद पवार महाराष्ट्र का दौरा कर रहे हैं। महाराष्ट्र की जनता उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। इससे एनसीपी को छोड़कर गए विधायकों में भी खलबली है। देशमुख कहते हैं कि छह-सात महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव है। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि किसके साथ कितने विधायक हैं? यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आगामी चुनाव में कौन कितने विधायकों को जितवा सकता है। अनिल देशमुख कहते हैं कि यह क्षमता शरद पवार के पास है। देशमुख कहते हैं कि भाजपा के पास विधायकों की संख्या नहीं है। 2019 से लगातार तोड़-फोड़ में लगी है। पहले 2019 में यह प्रयास किया था। इसके बाद पिछले डेढ़-दो साल से इसी में लगी थी। इसे राज्य की जनता पसंद नहीं कर रही है। उसे आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
किसको जोड़कर शरद पवार ने बनाई एनसीपी, समझिए
शरद पवार दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति के एक अहम किरदार रहे हैं। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उनकी राजनीति को समझना बहुत आसान नहीं है। अपनी इन्हीं विलक्षण क्षमताओं के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में कई बार चौंकाया। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे तो देश के रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री भी रहे। पवार ने जून 1999 में भी चौंकाया था, जब उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी की स्थापना की। एनसीपी को खड़ा किया।
दिलचस्प है कि पवार की एनसीपी में लगभग सभी बड़े नेता चाहे वह प्रफुल्ल पटेल हों या छगन भुजबल या फिर अन्य, सभी कारोबारी पृष्ठभूमि से हैं। सीनियर पवार ने इन्हें खूब आगे भी बढ़ाया। उदाहरण के तौर पर छगन भुजबल। छगन भुजबल को भ्रष्टाचार के आरोप में एक से अधिक बार अपना पद छोड़ना पड़ा। तेलगी स्टांप घोटाले का भी आरोप भुजबल पर लगा था। लेकिन पवार ने कभी इसकी परवाह नहीं की। शरद पवार उन्हें शिवसेना से तोड़ लाए थे। शरद पवार ने उन्हें कई बार राज्य का उप मुख्यमंत्री बनवाया।
इसी तरह से प्रफुल्ल पटेल की एनसीपी में राष्ट्रीय हैसियत को अपने बाद और दूसरे नंबर की बनाए रखा। भतीजे अजीत पवार को आगे बढ़ाया। इनकी तुलना में उनका ध्यान पुत्री सुप्रिया सुले की तरफ कम था। शरद के खेमे के नेता कहते हैं कि भाऊ (शरद) को उम्मीद नहीं थी कि लोग (छगन, प्रफुल्ल, दिलीप विलसे पाटिल) इस हद तक चले जाएंगे। शरद पवार के खेमे वाले नेताओं के मुताबिक इनमें से जिन लोगों ने अजीत पवार का साथ छोड़ा है, उनमें से अधिकांश के खिलाफ कोई न कोई जांच चल रही है अथवा उन्हें जांच एजेंसियों के सम्मन मिल चुके हैं।
शरद पवार को पता था कि पार्टी के नेता छोड़ सकते हैं साथ
जयंत पाटिल शरद पवार के साथ हैं। वह दावे के साथ कहते हैं कि अजीत पवार को अभी बड़ा झटका लगने वाला है। जयंत के मुताबिक शरद पवार के साथ एनसीपी के 25 विधायक हैं। यह बड़े पवार साहब का साथ नहीं छोड़ने वाले हैं। जयंत पाटिल अजीत पवार के साथ इतनी संख्या में विधायकों के साथ छोड़ने पर कुछ और नहीं कहना चाहते, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी के स्थापना दिवस के दिन भी शरद पवार से लोगों ने बात की थी। खुद अजीत पवार ने भी शपथ लेने वाले दिन कहा कि वह शरद पवार को जानकारी देकर आए हैं। बताते हैं प्रफुल्ल पटेल ने भी अपनी चिंता जाहिर की थी कि पार्टी के नेता अनिल देशमुख, नवाब मलिक जेल जा चुके हैं। अन्य पर तलवार लटक रही है। बताते हैं कि अजीत पवार ने प्रस्ताव तक भेजा था कि भाजपा के साथ हाथ मिलाने पर महाराष्ट्र से लेकर केन्द्र सरकार तक में हिस्सेदारी मिलेगी। लेकिन इन सबके बाद भी शरद पवार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यहां तक कि जिस प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया, उन्होंने भी साथ छोड़ दिया।
अभी विधायकों का आना-जाना लगा है
जयंत पाटिल कहते हैं कि शरद गुट के साथ 25 से अधिक विधायक हैं। अनिल देशमुख का भी कहना है कि यह संख्या बढ़ेगी। जबकि अजीत पवार अपने साथ 40 विधायक होने का दावा कर रहे हैं। सदस्यता बचाने के लिए अजीत पवार के गुट को कुल 36 विधायकों की जरूरत है। अनिल देशमुख कहते हैं कि अजीत पवार की यह इच्छा पूरी होने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती। इस बीच में विधायकों का आना-जाना लगा है। मकरंद जाधव पाटिल सतारा से विधायक हैं। जब अजीत पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उनके साथ थे। बाद में शरद पवार के खेमे में लौट आए। अब फिर वापस अजीत पवार के खेमे में चले गए हैं। रामराजे नाईक निंबालकर अजीत पवार के साथ गए थे। अब शरद पवार के साथ लौट आए हैं। दीपक चौव्हाण ने भी शरद पवार गुट में वापसी का फैसला किया है।
अब अपने दम पर अजीत पवार को चित करना चाहते हैं शरद पवार
शरद पवार को छोड़कर अजीत पवार के साथ गए तीन विधायक उनके साथ फिर आ गए हैं। सुप्रिया सुले के करीबी का कहना है कि महाराष्ट्र में यही पवार साहब की ताकत है। अनिल देशमुख भी कहते हैं कि अभी थोड़ा दिन बीतने दीजिए। शरद पवार के साथ विधायकों की संख्या बढ़ेगी। महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल भी शरद पवार के साथ विधायकों की संख्या बढऩे के लिए आश्वस्त हैं। बताते हैं विधायकों से संवाद और संपर्क का प्रयास सुप्रिया सुले भी कर रही हैं। शरद पवार के पोते रोहित पवार ने भी मोर्चा संभाल रखा है। कुल मिलाकर शरद पवार चाहते हैं कि अगले 10-15 दिन में अजीत पवार के खेमे के विधायकों की संख्या गिनती मात्र की रह जाए। यदि ऐसा हुआ तो अजीत पवार को राजनीति का करारा झटका लगेगा। शरद पवार एक बार मराठा राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का लोहा मनवा लेंगे।