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Maharashtra Updates: रोहित पवार अस्पताल में भर्ती, जांच के लिए भर्ती किया गया
Mon, 03 Aug 2026 06:19 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 03 Aug 2026 06:19 PM IST
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महाराष्ट्र की बड़ी खबरें
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार को सोमवार को कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह जानकारी उनके सहयोगियों ने दी। उन्होंने बताया कि रोहित पवार पिछले कुछ दिनों से बुखार से भी पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ जांच कराने की सलाह दी थी, जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। रोहित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के महासचिव हैं और करजात-जामखेड़ विधानसभा सीट से विधायक हैं।
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महाराष्ट्र में रेस्तरां का निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर उच्च न्यायालय ने एफडीए को फटकारा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई स्थित एक बार एवं रेस्तरां के पुनः निरीक्षण में 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन पाए जाने के बावजूद उसका लाइसेंस निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग को सोमवार को एक बार फिर फटकार लगाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने कहा कि वह रेस्तरां मालिक को हुए नुकसान के लिए विभाग पर जुर्माना लगाने पर विचार करेगी। पीठ ने रेस्तरां का लाइसेंस निलंबन आदेश भी रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले भी एफडीए को भोजनालयों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई करने और राज्य सचिवालय मंत्रालय की कैंटीनों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने को लेकर फटकार लगाई थी। पीठ नवी मुंबई के बेलापुर स्थित होटल पवन बार एंड रेस्तरां की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एफडीए की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मयूर खांडेफालकर ने अदालत को बताया कि एफडीए ने 29 जून को बार एवं रेस्तरां का निरीक्षण किया था और उसे नियमों का 63 प्रतिशत अनुपालन करने वाला पाया था। इसके बाद 30 जून को उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
अधिवक्ता सागर शेट्टी के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार, रेस्तरां संचालक ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, जिसके बाद 14 जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया। पुनः निरीक्षण में प्रतिष्ठान को 100 प्रतिशत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया।इस पर अदालत ने एफडीए से पूछा कि जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन करने वाला पाया गया, तब भी उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रखा गया।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को प्रतिदिन हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? समस्या यह है कि यह विभाग (एफडीए) अब तक सोया हुआ था और अब जागा है। आपके पास एक प्रशंसनीय आयुक्त (तुकाराम मुंढे) हैं, लेकिन जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत अनुपालन का प्रमाणपत्र मिल चुका है, तो उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रहना चाहिए? पीठ ने कहा कि वह एफडीए पर खर्च लगाने के सवाल पर विचार करेगी। अदालत ने कहा, यदि हम इस पर चुप रहें, तो यह अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने जैसा होगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई स्थित एक बार एवं रेस्तरां के पुनः निरीक्षण में 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन पाए जाने के बावजूद उसका लाइसेंस निलंबन आदेश वापस नहीं लेने पर महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग को सोमवार को एक बार फिर फटकार लगाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने कहा कि वह रेस्तरां मालिक को हुए नुकसान के लिए विभाग पर जुर्माना लगाने पर विचार करेगी। पीठ ने रेस्तरां का लाइसेंस निलंबन आदेश भी रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले भी एफडीए को भोजनालयों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई करने और राज्य सचिवालय मंत्रालय की कैंटीनों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने को लेकर फटकार लगाई थी। पीठ नवी मुंबई के बेलापुर स्थित होटल पवन बार एंड रेस्तरां की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एफडीए की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मयूर खांडेफालकर ने अदालत को बताया कि एफडीए ने 29 जून को बार एवं रेस्तरां का निरीक्षण किया था और उसे नियमों का 63 प्रतिशत अनुपालन करने वाला पाया था। इसके बाद 30 जून को उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
अधिवक्ता सागर शेट्टी के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार, रेस्तरां संचालक ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, जिसके बाद 14 जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया। पुनः निरीक्षण में प्रतिष्ठान को 100 प्रतिशत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया।इस पर अदालत ने एफडीए से पूछा कि जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत नियमों का अनुपालन करने वाला पाया गया, तब भी उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रखा गया।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को प्रतिदिन हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? समस्या यह है कि यह विभाग (एफडीए) अब तक सोया हुआ था और अब जागा है। आपके पास एक प्रशंसनीय आयुक्त (तुकाराम मुंढे) हैं, लेकिन जब याचिकाकर्ता को 100 प्रतिशत अनुपालन का प्रमाणपत्र मिल चुका है, तो उसका लाइसेंस निलंबित क्यों रहना चाहिए? पीठ ने कहा कि वह एफडीए पर खर्च लगाने के सवाल पर विचार करेगी। अदालत ने कहा, यदि हम इस पर चुप रहें, तो यह अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने जैसा होगा।
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बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: आरोपी को परदादी की रस्म में शामिल होने की अनुमति
मुंबई की विशेष अदालत ने बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी दिलीप परधी को अपनी 103 वर्षीय परदादी के निधन के बाद होने वाली अंतिम संस्कार संबंधी रस्मों में एक दिन शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 9 अगस्त को आरोपी को कड़ी पुलिस सुरक्षा में अंबरनाथ के वांगनी-कुलगांव ले जाया जाएगा। अदालत ने कहा कि मानवीय आधार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गंभीर आरोप, आपराधिक रिकॉर्ड और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: आरोपी को परदादी की रस्म में शामिल होने की अनुमति
मुंबई की विशेष अदालत ने बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी दिलीप परधी को अपनी 103 वर्षीय परदादी के निधन के बाद होने वाली अंतिम संस्कार संबंधी रस्मों में एक दिन शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 9 अगस्त को आरोपी को कड़ी पुलिस सुरक्षा में अंबरनाथ के वांगनी-कुलगांव ले जाया जाएगा। अदालत ने कहा कि मानवीय आधार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गंभीर आरोप, आपराधिक रिकॉर्ड और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मुंबई की विशेष अदालत ने बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी दिलीप परधी को अपनी 103 वर्षीय परदादी के निधन के बाद होने वाली अंतिम संस्कार संबंधी रस्मों में एक दिन शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 9 अगस्त को आरोपी को कड़ी पुलिस सुरक्षा में अंबरनाथ के वांगनी-कुलगांव ले जाया जाएगा। अदालत ने कहा कि मानवीय आधार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गंभीर आरोप, आपराधिक रिकॉर्ड और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।