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Maharashtra: शिंदे सरकार अब औरंगाबाद के इस किले का बदलेगी नाम, कभी हुआ करता था तुगलक की सेना का गढ़

Sun, 18 Sep 2022 08:47 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, औरंगाबाद।
पीटीआई, औरंगाबाद। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 18 Sep 2022 08:47 PM IST
सार

इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एलान किया कि समग्र डाटा विश्लेषण और विभिन्न क्षेत्रों में गहन अध्ययन के बाद निर्णय लेने के लिए राज्य में नीति आयोग की तर्ज पर एक संस्थान स्थापित किया जाएगा।

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Maharashtra Tourism Minister Mangal Prabhat Lodha said Will restore old name of Daulatabad fort as Devgiri
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और सीएम एकनाथ शिंदे। - फोटो : ANI

विस्तार

भारत में शहरों के नाम बदलने की परंपरा पुरानी है। मुगल काल में कई शहरों के नाम बदले गए और उसके बाद अंग्रेजों ने, फिर कई सरकारों ने जगहों के नाम बदले हैं। अब महाराष्ट्र की शिंदे सरकार एक फिर नाम बदलने को लेकर खबरों में है। राज्य के पर्यटन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र पर्यटन विभाग औरंगाबाद शहर के पास स्थित दौलताबाद किले का नाम बदलकर उसके पुराने नाम 'देवगिरी' करने का प्रस्ताव पेश करेगा।

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दौलताबाद किले के परिसर में स्थित भारत माता मंदिर में शनिवार को 'हैदराबाद मुक्ति दिवस' मनाने के लिए एक समारोह का आयोजन किया गया था, इस समारोह में लोढ़ा ने तिरंगा फहराया। लोढ़ा ने संवाददाताओं से कहा, "किले को दौलताबाद उर्फ देवगिरी के नाम से जाना जाता है। इसे अभी भी दौलताबाद किले के नाम से जाना जाता है। राज्य पर्यटन विभाग इसका नाम बदलकर देवगिरी किले के रूप में करने का प्रस्ताव पेश करेगा।" उन्होंने कहा कि "हैदराबाद मुक्ति संग्राम दिवस के मौके पर पहली बार तिरंगा फहराया गया है और अब हर साल झंडा फहराया जाएगा।"
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इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं शताब्दी में मोहम्मद तुगलक द्वारा किले का नाम बदलकर दौलताबाद कर दिया गया था। यह किला 1187 में यादव वंश द्वारा बनवाया गया था और इसे देवगिरी के नाम से जाना जाता था। जब मुहम्मद तुगलक ने दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा किया, तो वह इस किले से इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपना दरबार और राजधानी यहां स्थानांतरित करने का फैसला किया और इसका नाम बदलकर दौलताबाद 'भाग्य का शहर' कर दिया। उसने दिल्ली की पूरी आबादी को सामूहिक रूप से नई राजधानी में जाने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में किले को कुब्बतुल इस्लाम के नाम से जाना जाने लगा और इस नाम से सिक्के ढाले गए।
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औरंगाबाद शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित यह किला एक राष्ट्रीय विरासत स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसकी देखरेख की जाती है। बता दें कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पिछली महाराष्ट्र सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार ने औरंगाबाद के नए नाम में 'छत्रपति' जोड़ा।

बता दें कि सितंबर 1948 में, भारतीय सशस्त्र बलों ने हैदराबाद की निजाम शासित रियासत पर आक्रमण किया था और इसे भारतीय संघ में मिला लिया था। इस विलय को 'हैदराबाद मुक्ति संग्राम' दिवस के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र भी तत्कालीन हैदराबाद रियासत का हिस्सा था। देश के पहले केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद में तिरंगा फहराया था। इसलिए इस दिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'हैदराबाद मुक्ति दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया।


नीति आयोग जैसा निकाय स्थापित करेगी सरकार
इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एलान किया कि समग्र डाटा विश्लेषण और विभिन्न क्षेत्रों में गहन अध्ययन के बाद निर्णय लेने के लिए राज्य में नीति आयोग की तर्ज पर एक संस्थान स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। यह प्रस्ताव दिया गया कि सराज्य में नीति आयोग की तर्ज पर एक संस्थान स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।

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