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ड्रग्स के चलते मरने वालों की लिस्ट में महाराष्ट्र टॉप पर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 22 Jul 2016 12:57 PM IST
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ड्रम की समस्या को लेकर आखिरी बार 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कराया गया था।
- फोटो : Getty Images
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अभिषेक चौबे की फिल्म उड़ता पंजाब ने भले ही सियासी गलियारों में ड्रग समस्या को लेकर खलबली मचा दी हो, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ड्रग संबंधी आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है।
अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 3,647 से ड्रग संबंधी आत्महत्या और नशे की लत के मामले सामने आए। इनमें 1,324 महाराष्ट्र में, जबकि तमिलनाडु (552), केरल (475), मध्य प्रदेश (305) और पंजाब (38) में सामने आए।
गुरुवार को राज्यसभा में एक अताराकिंत प्रश्न के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने यह आंकड़े पेश किए। 2012 में नशे की लत और आत्महत्या के मामले 4,008 रहे जो 2013 में बढ़कर 4,591 हो गए। हालांकि 2014 में इन आंकड़ों में तकरीबन 21 प्रतिशत की कमी आई।
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री विजय सांपला ने कहा कि आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंजाब में ड्रग की समस्या को गलत तरह से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय पूरे देश में ड्रग की समस्या को लेकर एक सर्वे कराने जा रहा है। इसके बाद पूरे देश में नशे की लत के प्रभाव को समझने में मदद मिलेगी।
ड्रम की समस्या को लेकर आखिरी बार 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कराया गया था।
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अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 3,647 से ड्रग संबंधी आत्महत्या और नशे की लत के मामले सामने आए। इनमें 1,324 महाराष्ट्र में, जबकि तमिलनाडु (552), केरल (475), मध्य प्रदेश (305) और पंजाब (38) में सामने आए।
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गुरुवार को राज्यसभा में एक अताराकिंत प्रश्न के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने यह आंकड़े पेश किए। 2012 में नशे की लत और आत्महत्या के मामले 4,008 रहे जो 2013 में बढ़कर 4,591 हो गए। हालांकि 2014 में इन आंकड़ों में तकरीबन 21 प्रतिशत की कमी आई।
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री विजय सांपला ने कहा कि आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंजाब में ड्रग की समस्या को गलत तरह से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय पूरे देश में ड्रग की समस्या को लेकर एक सर्वे कराने जा रहा है। इसके बाद पूरे देश में नशे की लत के प्रभाव को समझने में मदद मिलेगी।
ड्रम की समस्या को लेकर आखिरी बार 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कराया गया था।