{"_id":"68c2ad333800359a5c071aa1","slug":"maharashtra-talks-underway-between-thackeray-cousins-mns-leader-nandgaonkar-2025-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharashtra: उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने की अटकलें तेज; महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों से पहले बढ़ी हलचल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Maharashtra: उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने की अटकलें तेज; महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों से पहले बढ़ी हलचल
Thu, 11 Sep 2025 04:36 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 11 Sep 2025 04:36 PM IST
सार
उद्धव और राज ठाकरे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनाने की ओर इशारा कर रही हैं। स्थानीय चुनावों से पहले अगर दोनों दल गठबंधन करते हैं, तो यह न सिर्फ बीएमसी बल्कि पूरे राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। हालांकि, फिलहाल दोनों पक्षों ने औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है। सभी की निगाहें उनकी अगली बैठक पर टिकी हैं।
विज्ञापन
बाला नंदगांवकर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के वरिष्ठ नेता बाला नंदगांवकर ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के बीच लगातार बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी औपचारिक तौर पर इन चर्चाओं का हिस्सा नहीं है। बाला नंदगांवकर ने कहा, 'दोनों नेता आपस में जरूर चर्चा कर रहे हैं।' लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठकों में किन मुद्दों पर बात हुई।
यह भी पढ़ें - VP Polls: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार; सीपी राधाकृष्णन की लेंगे जगह
दो सप्ताह में दूसरी मुलाकात
बुधवार को उद्धव ठाकरे, मुंबई के दादर स्थित राज ठाकरे के घर 'शिवतीर्थ' पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग ढाई घंटे तक मुलाकात चली। यह पिछले दो हफ्तों में उनकी दूसरी औपचारिक मुलाकात थी। इससे पहले जुलाई में, उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए थे जब राज्य सरकार को कक्षा 1 से 5 तक के लिए तीन भाषा फार्मूला वापस लेना पड़ा था। जुलाई के आखिर में राज ठाकरे, उद्धव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने 'मातोश्री' (उद्धव का निवास) भी गए थे। इसके बाद से उनकी मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया है।
विज्ञापन
स्थानीय चुनावों से पहले बढ़ी हलचल
इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में कयास तेज कर दिए हैं कि उद्धव और राज ठाकरे स्थानीय निकाय चुनावों, खासकर बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव से पहले साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह हार ही दोनों को एकजुट होने की दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर रही है।
मनसे की संभावित रणनीति
जब बाला नंदगांवकर से पूछा गया कि क्या मनसे, महा विकास आघाड़ी (एमवीए)- जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं- का हिस्सा बनेगी, तो उन्होंने कहा, 'इस पर फैसला पार्टी हाईकमान लेगा। अलग-अलग पार्टियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। राज ठाकरे सभी पहलुओं पर विचार कर आगे की रणनीति तय करेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि राज ठाकरे ने मनसे के कुछ नेताओं को बुलाकर नागरिक चुनावों को लेकर उनकी राय जानी है।
यह भी पढ़ें - Mumbai Railway Network: मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर दो दिन में पांच मौतें, ठाणे और रायगढ़ में अलग-अलग हादसे
ठाकरे भाइयों पर भाजपा का तंज
उद्धव-राज की बढ़ती नजदीकियों पर महाराष्ट्र बीजेपी के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने तंज कसा। उन्होंने कहा, 'यह मुलाकात शायद राम और भरत जैसी हो सकती है, जहां राम ने भरत को अपनी जगह राज करने का अधिकार दिया था। या फिर यह महाभारत के कौरव और पांडव जैसी भी हो सकती है, जहां पांडव अपना हक मांगने के लिए तैयार थे।' उन्होंने कहा कि संजय राउत को इस तुलना पर जवाब देना चाहिए।
संजय राउत बोले- निजी मुलाकात
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हालांकि राजनीतिक अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'उद्धव और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं। उनका आपस में मिलना स्वाभाविक है। यह पूरी तरह निजी मुलाकात थी, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।'
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - VP Polls: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार; सीपी राधाकृष्णन की लेंगे जगह
विज्ञापन
दो सप्ताह में दूसरी मुलाकात
बुधवार को उद्धव ठाकरे, मुंबई के दादर स्थित राज ठाकरे के घर 'शिवतीर्थ' पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग ढाई घंटे तक मुलाकात चली। यह पिछले दो हफ्तों में उनकी दूसरी औपचारिक मुलाकात थी। इससे पहले जुलाई में, उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए थे जब राज्य सरकार को कक्षा 1 से 5 तक के लिए तीन भाषा फार्मूला वापस लेना पड़ा था। जुलाई के आखिर में राज ठाकरे, उद्धव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने 'मातोश्री' (उद्धव का निवास) भी गए थे। इसके बाद से उनकी मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया है।
विज्ञापन
स्थानीय चुनावों से पहले बढ़ी हलचल
इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में कयास तेज कर दिए हैं कि उद्धव और राज ठाकरे स्थानीय निकाय चुनावों, खासकर बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव से पहले साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह हार ही दोनों को एकजुट होने की दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर रही है।
मनसे की संभावित रणनीति
जब बाला नंदगांवकर से पूछा गया कि क्या मनसे, महा विकास आघाड़ी (एमवीए)- जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं- का हिस्सा बनेगी, तो उन्होंने कहा, 'इस पर फैसला पार्टी हाईकमान लेगा। अलग-अलग पार्टियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। राज ठाकरे सभी पहलुओं पर विचार कर आगे की रणनीति तय करेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि राज ठाकरे ने मनसे के कुछ नेताओं को बुलाकर नागरिक चुनावों को लेकर उनकी राय जानी है।
यह भी पढ़ें - Mumbai Railway Network: मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर दो दिन में पांच मौतें, ठाणे और रायगढ़ में अलग-अलग हादसे
ठाकरे भाइयों पर भाजपा का तंज
उद्धव-राज की बढ़ती नजदीकियों पर महाराष्ट्र बीजेपी के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने तंज कसा। उन्होंने कहा, 'यह मुलाकात शायद राम और भरत जैसी हो सकती है, जहां राम ने भरत को अपनी जगह राज करने का अधिकार दिया था। या फिर यह महाभारत के कौरव और पांडव जैसी भी हो सकती है, जहां पांडव अपना हक मांगने के लिए तैयार थे।' उन्होंने कहा कि संजय राउत को इस तुलना पर जवाब देना चाहिए।
संजय राउत बोले- निजी मुलाकात
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हालांकि राजनीतिक अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'उद्धव और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं। उनका आपस में मिलना स्वाभाविक है। यह पूरी तरह निजी मुलाकात थी, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।'