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महाराष्ट्र: भाजपा के 12 विधायकों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने एक साल तक निलंबन को असंवैधानिक बताया

Fri, 28 Jan 2022 10:59 AM IST
सुरेंद्र जोशी राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 28 Jan 2022 10:59 AM IST
सार

शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विधायकों को एक साल तक निलंबित करने का स्पीकर का फैसला असंवैधानिक व मनमाना था।

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Maharashtra: Supreme Court quashes one-year suspension of 12 BJP MLAs, calls Speakers decision arbitrary and unconstitutional
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Shutterstock

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा से भाजपा के 12 विधायकों को एक साल के लिए निलंबित करने के निर्णय को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने निलंबन के आदेश को असंवैधानिक, अवैध और मनमाना करार दिया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि निलंबन एक सत्र से अधिक के लिए नहीं हो सकता है। 

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आशीष शेलार और महाराष्ट्र के अन्य भाजपा विधायकों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 5 जुलाई, 2021 को महाराष्ट्र विधानसभा के 12 भाजपा विधायकों को एक साल के लिए निलंबित करने का फैसला अवैध है। पीठ ने कहा है कि इससे संबंधित प्रस्ताव को दुर्भावना से पारित किया गया।
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लिहाजा पीठ ने इसे अप्रभावी घोषित कर दिया। शीर्ष अदालत ने 19 जनवरी को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, एनके कौल और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम की दलीलें सुनी थी।
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कोर्ट ने यह भी कहा
कोर्ट ने यह भी कहा कि संसद और राज्य विधानसभा को पवित्र स्थान माना जाता है तथा सदन में अभद्र आचरण के लिए कोई जगह नहीं है, जहां सदस्यों से शिष्ट व्यवहार प्रदर्शित करने की उम्मीद की जाती है। सदन में होने वाली गतिवधियां समकालिक सामाजिक तानाबाना को प्रदर्शित करती हैं और यह सुनना आम हो गया है कि सदन अपना निर्धारित कामकाज पूरा नहीं कर सका तथा उसका ज्यादातर वक्त रचनात्मक एवं ज्ञानवर्द्धक चर्चा के बजाय हंगामे या व्यक्तिगत आक्षेपों की भेंट चढ़ गया।

एक साल के लिए निलंबन लोकतंत्र के लिए खतरनाक
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि एक साल के लिए विधायकों को निलंबित करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा क्योंकि इसके कारण उनके निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि असली मुद्दा निर्णय की तर्कसंगतता का है। किसी उद्देश्य के लिए ऐसा होना चाहिए। एक साल तक निलंबन के पीछे कोई वाजिब और भारी-भरकम कारण होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक वर्ष के लिए निलंबन का निर्णय तर्कहीन है क्योंकि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र को छह महीने से अधिक समय तक प्रतिनिधित्व से वंचित किया जा रहा है।

जुलाई 2021 में महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के आसन पर बैठे (पीठासीन अधिकारी) भास्कर जाधव ने सदन में हंगामा करने वाले भाजपा के 12 विधायकों को अनियंत्रित व्यवहार करने पर निलंबित कर दिया था। जाधव ने तब कहा था कि जब सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी, तब विपक्ष के नेता उनके कक्ष में आए और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस व वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल के समक्ष उन्हें अपशब्द कहे।

इन विधायकों को मिली 'सुप्रीम' राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भाजपा के इन 12 विधायकों- संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भटकालकर, पराग अलावनी, हरीश पिंपले, राम सातपुते, विजय कुमार रावल, योगेश सागर, नारायण कुचे व कीर्तिकुमार भांगडिया को राहत मिल गई है।

फैसले की प्रतिलिपि मिलने पर स्पीकर अंतिम निर्णय करेंगे : नवाब मलिक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि विधानसभा सचिवालय को फैसले की प्रतिलिपि मिलने के बाद स्पीकर इस बारे में अंतिम निर्णय करेंगे। यह सिर्फ महाराष्ट्र का सवाल नहीं है बल्कि संसद व देशभर की विधानसभाओं का मामला है।

महाराष्ट्र सरकार को शर्म आना चाहिए: फडणवीस
पूर्व सीएम व विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र सरकार के असंवैधानिक कार्यों पर तमाचा है। 12 विधायकों के निलंबन को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया है, राज्य सरकार को शर्म आना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला महाराष्ट्र सरकार पर तमाचा : फडणवीस
वहीं महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महाविकास आघाड़ी सरकार के लिए करारा तमाचा करार दिया है। वहीं, सत्ताधारी दल के नेताओं ने कहा कि यह सरकार का नहीं विधानमंडल का फैसला था। इस पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष लेंगे।

विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने आरोप लगाया कि भाजपा के 12 विधायकों को साजिश के तहत निलंबित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि भाजपा के 12 विधायक ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में सरकारी घालमेल के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

फडणवीस ने कहा, मैं इंसाफ मिलने पर अपने 12 विधायकों को बधाई देता हूं। हम शुरू से कह रहे थे कि विधानसभा में कृत्रिम बहुमत तैयार करने के लिए 12 विधायकों को साल भर के लिए निलंबित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असांविधानिक ठहराया और हमारा पक्ष बरकरार रखा है। यह एक तरह से राज्य सरकार पर थप्पड़ है। उन्होंने कहा कि इस कृत्य के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। एजेंसी

हमें राहत क्यों नहीं मिलती :  संजय राउत 
कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि अदालत की तरफ से एक ही पार्टी को राहत कैसे मिली? हमें राहत क्यों नहीं मिलती। राज्यपाल ने 12 विधायकों की फाइल दबाकर रखी है, क्या यह संविधान का उल्लंघन नहीं है? वहीं, शिवसेना नेता व संसदीय कार्यमंत्री अनिल परब ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद हम इसका अध्ययन करेंगे। इसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या करना है।


वहीं, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष व जलसंसाधन मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि कोर्ट ने सरकार को फटकार नहीं लगाई है। 12 विधायकों को उनके गलत आचरण के लिए निलंबित किया गया था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष और विधानमंडल निर्णय लेगा।

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