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महाराष्ट्र: सड़े-गले शव की बेटियों के डीएनए से पहचान, 70 वर्षीय प्रेमी की हत्या में 68 साल की महिला गिरफ्तार
सार
महाराष्ट्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक बुजुर्ग महिला ने अपने 70 साल के प्रेमी की हत्या कर दी थी। इसके बाद आरोपी महिला ने शव की पहचान छिपाने के लिए शव को जलाने का प्रयास भी किया था।
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हत्या का मामला
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
सोलापुर की पंढरपुर तहसील में करीब एक महीने पुराने कत्ल की गुत्थी डीएनए प्रोफाइलिंग की मदद से सुलझ गई। खेत के कुएं से मिले सड़े-गले और आंशिक रूप से जले शव की पहचान 70 वर्षीय अंबादास संतराम खांडेकर के रूप में हुई। पुलिस ने हत्या के आरोप में उनकी 68 वर्षीय महिला साथी मंगल श्रीमंत होनमाने को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच पिछले 10 साल से अधिक समय से संबंध थे।
क्या है मामला?
दरअसल, 2 अगस्त को शंकरगांव के एक खेत में बने कुएं में ग्रामीणों ने एक लावारिस शव तैरता देखा था। शव आंशिक रूप से जला हुआ था और बुरी तरह सड़ चुका था। हालत ऐसी थी कि मौके पर उसकी पहचान करना मुश्किल था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शव से फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी सैंपल लिए। इन सैंपलों को डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
इस बीच पुलिस को शंकरगांव निवासी अंबादास खांडेकर के लापता होने की जानकारी मिली। खांडेकर 27 जुलाई को अपनी बेटी मैना पंढारे से मिलने के बाद अचानक लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत पर पंढरपुर तालुका पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया था। शव की पहचान पक्की करने के लिए पुलिस ने खांडेकर की दो बेटियों के डीएनए सैंपल लिए और उन्हें कुएं से मिले शव के सैंपल से मिलान के लिए भेजा।
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डीएनए जांच से हुई शव की पहचान
फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को पुष्टि हुई कि कुएं से मिला शव अंबादास खांडेकर का ही था। डीएनए रिपोर्ट के बाद जांच को नई दिशा मिली। पुलिस ने खांडेकर के संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह अक्सर मंगल होनमाने के घर आते-जाते थे। पूछताछ में परिजनों और आसपास के लोगों ने भी दोनों के बीच लंबे समय से संबंध होने की जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, डीएनए से खांडेकर की पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की और आखिरी संपर्कों को खंगाला। उसी में मंगल होनमाने का नाम आया। उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान महिला ने खांडेकर की हत्या करने की बात स्वीकार की।
पुलिस के मुताबिक, मंगल ने बताया कि 27 जुलाई को किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान उसने धारदार हथियार से खांडेकर पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से उसने शव को आंशिक रूप से जलाया और खेत में बने कुएं में फेंक दिया।
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क्या है मामला?
दरअसल, 2 अगस्त को शंकरगांव के एक खेत में बने कुएं में ग्रामीणों ने एक लावारिस शव तैरता देखा था। शव आंशिक रूप से जला हुआ था और बुरी तरह सड़ चुका था। हालत ऐसी थी कि मौके पर उसकी पहचान करना मुश्किल था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शव से फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी सैंपल लिए। इन सैंपलों को डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
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इस बीच पुलिस को शंकरगांव निवासी अंबादास खांडेकर के लापता होने की जानकारी मिली। खांडेकर 27 जुलाई को अपनी बेटी मैना पंढारे से मिलने के बाद अचानक लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत पर पंढरपुर तालुका पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया था। शव की पहचान पक्की करने के लिए पुलिस ने खांडेकर की दो बेटियों के डीएनए सैंपल लिए और उन्हें कुएं से मिले शव के सैंपल से मिलान के लिए भेजा।
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डीएनए जांच से हुई शव की पहचान
फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को पुष्टि हुई कि कुएं से मिला शव अंबादास खांडेकर का ही था। डीएनए रिपोर्ट के बाद जांच को नई दिशा मिली। पुलिस ने खांडेकर के संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह अक्सर मंगल होनमाने के घर आते-जाते थे। पूछताछ में परिजनों और आसपास के लोगों ने भी दोनों के बीच लंबे समय से संबंध होने की जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, डीएनए से खांडेकर की पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की और आखिरी संपर्कों को खंगाला। उसी में मंगल होनमाने का नाम आया। उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान महिला ने खांडेकर की हत्या करने की बात स्वीकार की।
पुलिस के मुताबिक, मंगल ने बताया कि 27 जुलाई को किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान उसने धारदार हथियार से खांडेकर पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से उसने शव को आंशिक रूप से जलाया और खेत में बने कुएं में फेंक दिया।